Sunday, September 13, 2026
Home crime एपल मिशन की हकीकत। यहां पढ़े, इस तरह से लगाया जाता है...

एपल मिशन की हकीकत। यहां पढ़े, इस तरह से लगाया जाता है बजट ठिकाने।

एपल मिशन की हकीकत। यहां पढ़े, इस तरह से लगाया जाता है बजट ठिकाने।

By – Dr. Rajendra Prasad kuksal

“एप्पल मिशन” राज्य सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है जिसका उद्देश्य राज्य में सेब उत्पादन को बढ़ाना तथा किसानों की आय में बढ़ोतरी करना है, साथ ही राज्य को सेब उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना जिससे एक मजबूत सेब उद्योग स्थापित हो सके।

हिमाचल प्रदेश में सेब की औसत उत्पादकता 7 मैट्रिक टन प्रति हेक्टेयर है जबकि उत्तराखंड में 4 मैट्रिक टन प्रति हेक्टेयर है। प्रति इकाई क्षेत्र फल में सेब की उत्पादकता बढ़ाने हेतु आवश्यक है सेब की सघन व अति बागवानी।

सेब की सघन बागवानी –

पारम्परिक सीडलिंग पर आधारित सेब के बागीचे को लगाने में सेब के पेड़ों को काफी दूरी में लगाया जाता है। यह इसलिए किया जाता है क्योंकि पेड़ जैसे- जैसे बड़े होते हैं, वह काफी फैलाव लेने लगते हैं। इसके साथ ही पेड़ों की जड़ें भी इसी अनुपात में फैलती हैं। पेड़ का फैलाव अधिक भूमि में होता है। एक हैक्टेयर क्षेत्र फल में सीड लिंग पर ग्राफ्ट किये 250-300 ही लग पाते हैं।

वही ‘‘सेब की सघन बागवानी’’ में पेड़ से पेड़ की दूरी बमुश्किल कुछ फीट होती है। इस तकनीक में रूट स्टॉक वाले पौंधों का प्रयोग किया जाता है। जिसके कारण जड़ों का फैलाव कम होता है और इसमें मूसला जड़ तो होती ही नहीं।

पारम्परिक बगीचे में जितनी भूमि में 1 सेब का पेड़ लगाया जाता है वही सघन बागवानी में 10 पेड़ लगते हैं ।पारम्परिक बागीचों में लगने वाली सेब की प्रजातियों के बजाय ‘‘सेब की सघन बागवानी’’ में लगाई जाने वाली प्रजातियाँ भिन्न होती हैं, ‘‘सेब की सघन बागवानी’’ में उत्पादन कई गुना अधिक होता है।

बर्ष 2020-21में एप्पल मिशन योजना के निर्धारित मानक एक एकड़ याने 20 नाली भूमि में 1000 सेब पौध रोपण हेतु (बाद के बर्षो में संशोधन किया गया) –

1- नवीन प्रजाति के उच्च संघनता वाले हाईडेन्सिटी पौधे अधिकतम 1000 पौधे रुपए – 1,50,000

2 – डिप सिंचाई व्यवस्था रुपए – 65,000 ।

3- प्लास्टिक मल्चिंग स्थापित करना रुपए- 50,000

4- एन्टी हैलनेट विद ट्रेलिस सिस्टम रुपए – 3,40,000

5- हैल नेट ऑन टॉप कवर रुपए- 1,50,000

6- चैन लिंग फैन्सिग रुपये – 1,60,000

7- दवा एवं खाद रुपए- 15,000

8- औजार संयत्र रुपए – 10,000

9- इन्सटालेशन चार्ज इनक्लूडिंग लेवर चार्ज रुपए – 50,000

10- प्राईमरी सर्वे, सलेक्शन आफ बेनिफीशरी , लेआउटस , मौनिटरिंग एक वर्ष हेतु रुपए -60,000

योग- 12,00,000(बारह लाख)

नोटः स्वीकृत अनुदान 80%, कृषक अंश 20%

दिनांक 08 अक्टूबर को पर्वतीय कृषक बागवान उद्यमी संगठन की बागवानों के साथ हुई बैठक में यह तथ्य सामने आया कि जिन बागवानों ने वित्तीय वर्ष 2020-21, 2021 -22, 2022- 23, 2023- 24 एवं 2024-25 में मिशन एप्पल योजना के अंतर्गत सेब के बगीचे लगाए, उन्हें आज तक सरकार द्वारा राज्य सहायता की 80% धनराशि प्रदान नहीं की गई है।

योजना की स्वीकृति के समय सरकार ने किसानों से 20% कृषक अंश जमा करवाया था, किंतु चार वर्ष बीत जाने के उपरांत भी शेष 80% राज्य अंश न तो किसानों को दिया गया और न ही सेवा प्रदाताओं को उनके बकाए का भुगतान किया गया, इस कारण आज किसान और सेवा प्रदाता दोनों भुखमरी के कगार पर पहुंच चुके हैं।

योजना में सरकार ने 80% अनुदान देने का वादा किया था, जिसके आधार पर किसानों ने ₹1,20,000 से लेकर ₹12,00,000 तक की लागत से अपने बगीचे स्थापित किए। अधिकांश किसानों ने यह कार्य या तो ऋण लेकर या सेवा प्रदाताओं को विश्वास में लेकर यह सोचकर कि जब राज्यांश मिलेगा तो वे कर्जमुक्त हो जाएंगे। परंतु चार वर्ष बीत जाने के उपरांत भी न तो भुगतान हुआ और न ही सरकार की ओर से कोई ठोस कार्रवाई की गई।

वहीं दूसरी ओर समाचार पत्रों और मीडिया में मिशन एप्पल एवं मिशन कीवी की सफलता के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, जबकि वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है।

संगठन को प्राप्त सूचना के आधार पर पांच सौ से अधिक बागवानों एवं सेवा प्रदाताओं का पैंतीस करोड़ रुपए से अधिक धनराशि का भुगतान होना है। साथ ही छ करोड़ से अधिक की धनराशि बागवानों द्वारा विभाग के पास कृषक अंश के रूप में जमा है।

इस प्रकरण पर संगठन ने पूर्व में तीन बार उद्यान मंत्री गणेश जोशी, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव एवं सचिव कृषि से मिलकर यह मुद्दा उठाया, किंतु हर बार केवल झूठे आश्वासन ही प्राप्त हुए।

वर्तमान में अधिकारीगण इस मामले को CBI जांच के नाम पर टाल रहे हैं, CBI के नाम पर किसानों के बकाया भुगतान को अनावश्यक रूप से रोका जा रहा है।

जबकि वास्तविकता यह है कि यह सब उद्यान विभाग के अधिकारियों की भ्रष्टाचार में संलिप्तता के कारण बागवानों के बिलों का समय पर भुगतान न करना रहा है। कई जनपदों में कमिशन के चक्कर में बिना बजट आवंटन के ही बागवानों को योजना आवंटित करदी गई, कई जनपदों के अधिकारियों के द्वारा कमिशन न मिल पाने के कारण आवंटित बजट ही सरेन्डर कर दिया गया।

कई सेवा प्रदाताओं से मिलीभगत कर योजना में चयनित बागवानों की योजना पूर्ण होने पहले ही बागवानों को बहला फुसलाकर दस रुपए के स्टांप पेपर योजना पूर्ण होने के प्रमाण पत्र प्राप्त कर लिये विवाद होने पर भुगतान नहीं हो पाये।

अधिकारियों की भ्रष्टाचार में संलिप्ता के कारण CBI जांच से बचने हेतु बिलों का भुगतान रोके रहे या आवंटित बजट ही लैप्स होने दिया।

आज किसान एपल मिशन योजना अंतर्गत लगे बागों के अनुदान की धनराशि के लिए भटक रहे हैं।

RELATED ARTICLES

हर स्कूल का बनेगा आपदा प्रबंधन प्लान : सरकार

हर स्कूल का बनेगा आपदा प्रबंधन प्लान यूएसडीएमए की शिक्षा विभाग के साथ बैठक में बनी रणनीति चेतावनी-सूचना से लेकर खोज-बचाव तक की...

हवाई यात्रा का एक खास अनुभव साझा कर रहे है संयुक्त निदेशक सूचना एवं लोक संपर्क विभाग डॉ० नितिन उपाध्याय

By - Dr. Nitin upadhyay अगर आप कनेक्टिंग फ्लाइट्स पकड़ते हैं और हब एंड स्पोक्स मॉडल नहीं जानते तो ये पोस्ट आपके लिए है। बनारस...

कॉन्क्लेव की सहभागिता से राज्य में फिल्म निर्माण के साथ फिल्म टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा – श्री चौहान

चेन्नई में आयोजित ‘इंडिया इंटरनेशनल फिल्म टूरिज्म कॉन्क्लेव में उत्तराखंड फिल्म नीति की हुई सराहना तमिल फिल्म इंडस्ट्री ने दिखाई उत्तराखण्ड में फिल्मांकन...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

हर स्कूल का बनेगा आपदा प्रबंधन प्लान : सरकार

हर स्कूल का बनेगा आपदा प्रबंधन प्लान यूएसडीएमए की शिक्षा विभाग के साथ बैठक में बनी रणनीति चेतावनी-सूचना से लेकर खोज-बचाव तक की...

हवाई यात्रा का एक खास अनुभव साझा कर रहे है संयुक्त निदेशक सूचना एवं लोक संपर्क विभाग डॉ० नितिन उपाध्याय

By - Dr. Nitin upadhyay अगर आप कनेक्टिंग फ्लाइट्स पकड़ते हैं और हब एंड स्पोक्स मॉडल नहीं जानते तो ये पोस्ट आपके लिए है। बनारस...

कॉन्क्लेव की सहभागिता से राज्य में फिल्म निर्माण के साथ फिल्म टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा – श्री चौहान

चेन्नई में आयोजित ‘इंडिया इंटरनेशनल फिल्म टूरिज्म कॉन्क्लेव में उत्तराखंड फिल्म नीति की हुई सराहना तमिल फिल्म इंडस्ट्री ने दिखाई उत्तराखण्ड में फिल्मांकन...

सरस्वती ताल और केदारताल का होगा वैज्ञानिक सर्वे, वैज्ञानिको का दल रवाना

सरस्वती ताल और केदारताल के लिए दल रवाना सचिव आपदा प्रबंधन ने दिखाई हरी झंडी मुख्यमंत्री तथा आपदा प्रबंधन मंत्री ने दी शुभकामनाएं प्रदेश...

जल प्रबंधन को मिलेगा आधुनिक तकनीक का वैज्ञानिक आधार – MIKE Hydro Basin सॉफ्टवेयर

जल संसाधन प्रबंधन में आधुनिक तकनीक का नया अध्याय—MIKE Hydro Basin पर राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ देशभर से 400 से अधिक विशेषज्ञ,...

डिजिटल युग में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और पॉप कल्चर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ

डिजिटल युग में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और पॉप कल्चर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ https://www.facebook.com/janmanchaajkal?locale=hi_IN हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय...

Shaurya and Legacy of Karmaveer Jayanand Bharti Remembered on the 94th Anniversary of Pauri Kranti Diwas

Shaurya and Legacy of Karmaveer Jayanand Bharti Remembered on the 94th Anniversary of Pauri Kranti Diwas By - Prem Pancholi The Shail Shilpi Vikas Sangathan organized...

समाधान दिवस पर 120 शिकायतें दर्ज, त्वरित निस्तारण की प्रक्रिया आरम्भ – जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान

जनसमस्याओं के त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के उद्देश्य से सोमवार को कलेक्ट्रेट परिसर स्थित ऋषिपर्णा सभागार में समाधान दिवस आयोजित किया गया। जिलाधिकारी डॉ....

झीलें कुछ समय के लिए दिखाई देती हैं, स्वतः समाप्त हो जाती हैं।

गंगोत्री ग्लेशियर क्षेत्र में दिखाई देने वाली छोटी हिमनदीय झीलों से तत्काल बड़े खतरे की स्थिति नहीं-वाडिया मीडिया में प्रसारित खबरों के संबंध में यूएसडीएमए...

आयोग से दिए जाने वाले आदेशों का पालन सुनिश्चित करें अधिकारी : मुकेश कुमार

आयोग से दिए जाने वाले आदेशों का पालन सुनिश्चित करें अधिकारी : मुकेश कुमार उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष श्री मुकेश कुमार की अध्यक्षता...