Sunday, September 13, 2026
Home lifestyle ब्लड डोनेशन का अनुभव साझा कर रहे है वरिष्ठ पत्रकार अर्जुन बिष्ट।...

ब्लड डोनेशन का अनुभव साझा कर रहे है वरिष्ठ पत्रकार अर्जुन बिष्ट। विचार एक नई सोच द्वारा आयोजित ब्लड डोनेशन कार्यक्रम।

डेढ़ साल की अवधि में आज फिर तीसरी बार रक्तदान करने का अवसर मिला। रक्त इंसानी जीवन के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि हवा और पानी। हवा और पानी की आवश्यकता को पूरा करने के लिए कई वैकल्पिक इंतजाम हो चुके हैं लेकिन खून एक ऐसा महत्वपूर्ण तत्व है जिसका आज तक कोई विकल्प नहीं है। यानी किसी इंसान को यदि खून की आवश्यकता पड़ती है तो उसको इंसान का ही खून चाहिए होता है।
अमोलाज रेस्टोरेंट में आज “विचार एक नई सोच” सामाजिक संगठन द्वारा आयोजित ब्लड डोनेशन कैंप मैं दूसरी बार रक्तदान करने का अवसर मिला। जब डॉ एस जोशी और डॉ सयाना जी ने रक्तदान के महत्व पर बात रखी तो बरबस ही कुछ पुराने प्रसंग जेहन में उतर आए।
उस दौर में देहरादून में सिर्फ दो ही बड़े अस्पताल होते थे। एक था सरकारी दून अस्पताल और दूसरा सीएमआई। पहाड़ से भी ज्यादातर मरीज इन्हीं दो अस्पतालों में आते थे। एक बार तो हिमनी गांव से अमर सिंह बूबू आए। उनकी बेटी को बहुत बड़ी समस्या हो गई थी और उसका खून ही नहीं बन पा रहा था। खून की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती थी। मैं दून अस्पताल के परिसर में ही इस समस्या के समाधान के लिए सोच रहा था, तभी मेरे मित्र कर्नल एमके जोशी जो उस समय यहां देहरादून में एनसीसी की 11th गर्ल्स बटालियन के सीओ थे, का फोन आ गया।
कर्नल साहब ने कहा, अरे परेशान मत होइए। मैं करता हूं कुछ व्यवस्था। उन्होंने दूसरे दिन एनसीसी की करीब 20 लड़कियों को दून अस्पताल भेज दिया। कैडेट्स की कम उम्र और हीमोग्लोबिन की समस्या के कारण ज्यादातर लड़कियां रिजेक्ट हो गई। मगर दो या तीन यूनिट खून का इंतजाम आसानी से हो गया। उस दौरान कई बार दून अस्पताल के डॉक्टरों की मदद से कम से कम 4-5 लोगों के लिए खून का इंतजाम करवाया। दवाइयां और दूसरी मदद तो पता नहीं कितने लोगों को दिलवायी होगी।
आप में से बहुत सारे साथियों ने भी अस्पतालों में ऐसे ही अनगिनत लोगों की मदद की होगी।
इस पोस्ट को लिखने का बस एक ही कारण है। आज अस्पतालों में बहुत सारे ऐसे लोग पहुंच रहे हैं जिन्हें बचाने के लिए खून की आवश्यकता पड़ती है। आए दिन सड़क हादसों में न जाने कितने लोग घायल होकर अस्पतालों में पहुंचते हैं। ऐसे लोगों को दवाई से पहले खून की ही जरूरत पड़ती है।
दवाई आदि की व्यवस्था तो सरकार या कोई व्यक्तिगत रूप से भी कर सकता है, लेकिन खून एक ऐसा तत्व है, जिसकी पूर्ति मानवीय खून से ही हो सकती है।
एक और दिलचस्प बात। मनुष्य अपने शरीर से करीब करीब 50 अंगों या तत्वों को दान देकर दूसरे की जान बचा सकता है, लेकिन खून एक ऐसा तत्व है जिसकी शायद अस्पतालों में सबसे अधिक न केवल आवश्यकता है बल्कि उसको डोनेट करना भी सबसे आसान है।
यह वैज्ञानिक तथ्य है कि हमारे रक्त की कोशिकाएं और प्लेटलेट्स 180 दिन के बाद बेकार हो जाती हैं और उनके स्थान पर नई कोशिकाएं और प्लेटलेट्स बनती है। इसलिए रक्तदान से हमारे शरीर को किसी तरह का नुकसान भी नहीं होता। 6 महीने की अवधि में हम जो रक्तदान करते हैं वह वैसे भी नए रक्त से रिप्लेस हो जाता है।
आज के कार्यक्रम डॉक्टर अनिल वर्मा भी एक मुख्य आकर्षण थे। वर्मा साहब अपने जीवन में डेढ़ सौ से अधिक बार रक्तदान कर चुके हैं और 72 वर्ष की उम्र में भी उनके चेहरे की ताजगी बताती है कि रक्तदान इंसान को स्वस्थ और तरोताजा रखने के लिए भी कितना काम करता है।
एक बार फिर से विचार एक नहीं सोच के साथ ही उन सभी संस्थाओं को साधुवाद जो समय-समय पर रक्तदान करा कर इंसान की जान बचाने का महान व पुनीत कार्य कर रहे हैं।
आइए हम सभी संकल्प लें कि अस्पतालों में आने वाला कोई भी व्यक्ति कम से कम खून की कमी से जान गंवाने को मजबूर न हो।
विचार एक नई सोच के सभी साथियों को लेखक की ओर से हृदय के तल से आभार एवं बधाई।

RELATED ARTICLES

हर स्कूल का बनेगा आपदा प्रबंधन प्लान : सरकार

हर स्कूल का बनेगा आपदा प्रबंधन प्लान यूएसडीएमए की शिक्षा विभाग के साथ बैठक में बनी रणनीति चेतावनी-सूचना से लेकर खोज-बचाव तक की...

हवाई यात्रा का एक खास अनुभव साझा कर रहे है संयुक्त निदेशक सूचना एवं लोक संपर्क विभाग डॉ० नितिन उपाध्याय

By - Dr. Nitin upadhyay अगर आप कनेक्टिंग फ्लाइट्स पकड़ते हैं और हब एंड स्पोक्स मॉडल नहीं जानते तो ये पोस्ट आपके लिए है। बनारस...

कॉन्क्लेव की सहभागिता से राज्य में फिल्म निर्माण के साथ फिल्म टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा – श्री चौहान

चेन्नई में आयोजित ‘इंडिया इंटरनेशनल फिल्म टूरिज्म कॉन्क्लेव में उत्तराखंड फिल्म नीति की हुई सराहना तमिल फिल्म इंडस्ट्री ने दिखाई उत्तराखण्ड में फिल्मांकन...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

हर स्कूल का बनेगा आपदा प्रबंधन प्लान : सरकार

हर स्कूल का बनेगा आपदा प्रबंधन प्लान यूएसडीएमए की शिक्षा विभाग के साथ बैठक में बनी रणनीति चेतावनी-सूचना से लेकर खोज-बचाव तक की...

हवाई यात्रा का एक खास अनुभव साझा कर रहे है संयुक्त निदेशक सूचना एवं लोक संपर्क विभाग डॉ० नितिन उपाध्याय

By - Dr. Nitin upadhyay अगर आप कनेक्टिंग फ्लाइट्स पकड़ते हैं और हब एंड स्पोक्स मॉडल नहीं जानते तो ये पोस्ट आपके लिए है। बनारस...

कॉन्क्लेव की सहभागिता से राज्य में फिल्म निर्माण के साथ फिल्म टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा – श्री चौहान

चेन्नई में आयोजित ‘इंडिया इंटरनेशनल फिल्म टूरिज्म कॉन्क्लेव में उत्तराखंड फिल्म नीति की हुई सराहना तमिल फिल्म इंडस्ट्री ने दिखाई उत्तराखण्ड में फिल्मांकन...

सरस्वती ताल और केदारताल का होगा वैज्ञानिक सर्वे, वैज्ञानिको का दल रवाना

सरस्वती ताल और केदारताल के लिए दल रवाना सचिव आपदा प्रबंधन ने दिखाई हरी झंडी मुख्यमंत्री तथा आपदा प्रबंधन मंत्री ने दी शुभकामनाएं प्रदेश...

जल प्रबंधन को मिलेगा आधुनिक तकनीक का वैज्ञानिक आधार – MIKE Hydro Basin सॉफ्टवेयर

जल संसाधन प्रबंधन में आधुनिक तकनीक का नया अध्याय—MIKE Hydro Basin पर राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ देशभर से 400 से अधिक विशेषज्ञ,...

डिजिटल युग में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और पॉप कल्चर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ

डिजिटल युग में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और पॉप कल्चर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ https://www.facebook.com/janmanchaajkal?locale=hi_IN हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय...

Shaurya and Legacy of Karmaveer Jayanand Bharti Remembered on the 94th Anniversary of Pauri Kranti Diwas

Shaurya and Legacy of Karmaveer Jayanand Bharti Remembered on the 94th Anniversary of Pauri Kranti Diwas By - Prem Pancholi The Shail Shilpi Vikas Sangathan organized...

समाधान दिवस पर 120 शिकायतें दर्ज, त्वरित निस्तारण की प्रक्रिया आरम्भ – जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान

जनसमस्याओं के त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के उद्देश्य से सोमवार को कलेक्ट्रेट परिसर स्थित ऋषिपर्णा सभागार में समाधान दिवस आयोजित किया गया। जिलाधिकारी डॉ....

झीलें कुछ समय के लिए दिखाई देती हैं, स्वतः समाप्त हो जाती हैं।

गंगोत्री ग्लेशियर क्षेत्र में दिखाई देने वाली छोटी हिमनदीय झीलों से तत्काल बड़े खतरे की स्थिति नहीं-वाडिया मीडिया में प्रसारित खबरों के संबंध में यूएसडीएमए...

आयोग से दिए जाने वाले आदेशों का पालन सुनिश्चित करें अधिकारी : मुकेश कुमार

आयोग से दिए जाने वाले आदेशों का पालन सुनिश्चित करें अधिकारी : मुकेश कुमार उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष श्री मुकेश कुमार की अध्यक्षता...