Sunday, June 28, 2026
Home lifestyle मुख्यमंत्री के रूप मे धामी के दिन क्यों गिन रहे ये भाजपाई...

मुख्यमंत्री के रूप मे धामी के दिन क्यों गिन रहे ये भाजपाई ?

मुख्यमंत्री के रूप मे धामी के दिन क्यों गिन रहे ये भाजपाई ?

By Gajendra Rawat

कल से सोशल मीडिया में धामी के घोषित और अघोषित समर्थकों ने ऐसा मजमा लगाया हुआ है जिससे भाजपा की अंदरूनी राजनीति मे त्रिवेंद्र बनाम धामी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। पुष्कर सिंह धामी द्वारा 3 साल और 358 दिन पूरा करने पर जहां फेसबुकिया जश्न का माहौल दिखाने की कोशिश हो रही है वहीँ त्रिवेंद्र सिंह रावत के 3 साल 11 महीने और 21 दिन के कार्यकाल को छोटा भी दिखाया गया.यही नहीं धामी को अब उत्तराखंड के कांग्रेसी मुख्यमंत्री जिन्होंने 5 साल पूरा किया नारायण दत्त तिवारी के समकक्ष बताया जा रहा है. धामी के पक्ष में बनाई इस ख़ास पोस्ट को तमाम राज्य मंत्रियों से लेकर कई और छुट्टभइये घोषित और पोषित नेताओं ने भी पोस्ट किया है. मजेदार बात यह है कि अपने को पत्रकार कहने वाले कई पत्रकार भी इस बहती गंगा मे हाथ धोते दिखे कि क्या पता धामी जी खुश हो जायँ और लोतगी मोतगी मतलब खुर्चन ही हाथ लग जाय. धामी के अब तक के कार्यकाल को जिसमें बाकायदा दिन गिन गए हैं को स्थिरता का सूचक बताया जा रहा है. असल सच्चाई मतलब कड़वी सच्चाई यह है कि अस्थिरता वाला विषय उत्तराखंड में उसी दिन शुरू हो गया था जिस दिन उत्तराखंड के पहले मुख्यमंत्री के रूप में नित्यानंद स्वामी ने शपथ ली थी.
भाजपा की वर्तमान राजनीति मे आज नेता खुलकर बोलने से कतरा रहे हो लेकिन जिस अंदाज में त्रिवेंद्र रावत से धामी को आगे दिखाया गया उसकी गूंज दिल्ली से लेकर देहरादून और गैरसैण से लेकर खटीमा तक जरूर सुनाई दे रही है.
धामी को श्रेष्ठ बताने वाले लोगों ने यह नहीं बताया कि धामी से पहले भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत सिर्फ 116 दिन मुख्यमंत्री रहे भगत सिंह कोश्यारी 122 दिन उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे जनरल भुवन चंद्र खंडूरी पौने 3 साल और रमेश पोखरियाल निशंक सवा दो साल उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे.विजय बहुगुणा 2 साल और हरीश रावत 3 साल मुख्यमंत्री रहे भगत सिंह कोश्यारी से पहले उत्तराखंड के पहले मुख्यमंत्री नित्यानंद स्वामी सिर्फ एक साल उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे और उन्हें हटाकर भगत सिंह कोश्यारी को मुख्यमंत्री बनाया गया. कुर्सी खाने और जाने का यह क्रम 9 नवम्बर 2000 से ही जारी है नित्यानंद स्वामी के बाद भाजपा के मुख्यमंत्री भुवन खंडूरी की कुर्सी छीनी गई फिर रमेश पोखरियाल की छीनी गई त्रिवेंद्र सिंह रावत की छीनी गई और तीरथ सिंह की भी छीनी गई। तुलना सिर्फ त्रिवेंद्र सिंह रावत से श्रेष्ठ वाली करने से स्पष्ट है कि धामी के घोषित अघोषित और पोषित समर्थक अभी भी मानते हैं कि कुछ ना कुछ चल रहा है. इस ख़ास पोस्ट ने चर्चा को और गर्म कर दिया है की आने वाले दिनों में उत्तराखंड की सियासत में क्या हो सकता है।
कांग्रेस की कृपा से मुख्यमंत्री बने और अब भाजपाई बने विजय बहुगुणा की भी 2 साल बाद छीन ली गई।
घोषित अघोषित और पोषित समर्थकों ने यह नहीं बताया कि उत्तराखंड में दो बार राष्ट्रपति शासन लगा जब विजय बहुगुणा के नेतृत्व में नौ विधायकों ने अपनी सरकार गिराने का षड्यंत्र किया तब 27 मार्च 2016 से 21 अप्रैल 2016 और 22 अप्रैल 2016 से 11 में 2016 तक राष्ट्रपति शासन रहा.
बहरहाल मुख्यमंत्री धामी को 3 वर्ष और 358 दिन पूरा करने की बहुत-बहुत बधाई का ये क्रम और क्या गुल खिलाता है इस पर सबकी नजरें टिकी हैँ.
उत्तराखंड मे भाजपा की एक दूसरे को निबटाओ वाली राजनीति के लिहाज से पुष्कर सिंह धामी को उज्जवल भविष्य की अब लोग शुभकामनाएं देते दिख रहे है।

RELATED ARTICLES

एथलीट संदीप गुसाई बना उत्तरकाशी विधिक सेवा प्राधिकरण एंबेसडर

जनसामान्य में नशा उन्मूलन, विधिक जागरूकता, सामाजिक उत्थान एवं खेलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, उत्तरकाशी द्वारा संदीप गुंसाई...

अतीत का प्रतिशोध नहीं लिया जा सकता, उसे केवल समझा जा सकता है : IAS शशि रंजन कुमार

By - Prem Pancholi ।। अतीत हमारी स्मृतियों में, खंडहरों में, और उन तरीकों में जीवित रहता है जिनसे वह आज भी हमारे अस्तित्व को...

सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स को उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद से लेनी पड़ेगी अनुमति

चारधाम यात्रा की गरिमा, सुरक्षा और शुचिता बनाए रखने हेतु सोशल मीडिया कंटेंट निर्माण के संबंध में शासन से दिशा निर्देश जारी हुए हैं।...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

एथलीट संदीप गुसाई बना उत्तरकाशी विधिक सेवा प्राधिकरण एंबेसडर

जनसामान्य में नशा उन्मूलन, विधिक जागरूकता, सामाजिक उत्थान एवं खेलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, उत्तरकाशी द्वारा संदीप गुंसाई...

अतीत का प्रतिशोध नहीं लिया जा सकता, उसे केवल समझा जा सकता है : IAS शशि रंजन कुमार

By - Prem Pancholi ।। अतीत हमारी स्मृतियों में, खंडहरों में, और उन तरीकों में जीवित रहता है जिनसे वह आज भी हमारे अस्तित्व को...

सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स को उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद से लेनी पड़ेगी अनुमति

चारधाम यात्रा की गरिमा, सुरक्षा और शुचिता बनाए रखने हेतु सोशल मीडिया कंटेंट निर्माण के संबंध में शासन से दिशा निर्देश जारी हुए हैं।...

देहरादून : धामी कैबिनेट की बैठक संपन्न, खास विषयों पर त्वरित निर्णय

।। राज्य कैबिनेट ने कुल 12 प्रस्तावों को दी मंजूरी ।। उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा संशोधन नियमावली-2026 को मंजूरी दी, जिसके तहत संस्कृत विद्यालयों की मान्यता,...

इतिहास के पन्नो से : अपना दायां अंगूठा दिखाना चाहिए और हम दिखायेंगे भी – दादा दौलतराम खुगशाल

By - dr. Arun Kuksal   दादा दौलतराम खुगशाल (मार्च, 1891- 3 फरवरी, 1960) टिहरी रियासत के विरुद्ध जन-संघर्षों का अग्रणी व्यक्तित्व- ‘‘आज तक राजा ने हमको पढ़ने-लिखने...

जिलाधिकारी के शख्त निर्देश, कहा आपदा के दौरान सभी विभाग बनायें समन्वय

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जनपद देहरादून में आगामी मानसून एवं संभावित आपदा परिस्थितियों के दृष्टिगत आपदा प्रबंधन संबंधी...

जब वरिष्ठ पत्रकार चारू तिवारी ने वैज्ञानिक डी० डी० पंत को देखा

सुप्रसिद्ध भौतिकशास्त्री और हिमालय के चिंतक प्रो. डीडी पंत की पुण्यतिथि (11 जून, 2008) पर विशेष हमारे हिस्से के प्रो. डीडी पंत - चारु तिवारी By...

केतन लाल की निर्मम हत्या की चहुंओर चर्चा, समाज पर बड़ा कलंक।

By - Prem Pancholi   सोशल मीडिया पर जिस तरह से प्रतापनगर के ओण पट्टी के देवल गांव निवासी अनुसूचित जाति के किशोर केतन लाल की...

आपदाओं के प्रभाव को न्यूनतम करने के लिए सरकारी वर्जिश

वैज्ञानिक योजना, कुशल प्रशासन और समयबद्ध निर्णय प्रक्रिया के जरिए आपदाओं के प्रभाव को न्यूनतम करने का प्रयास किया जा रहा है।” उन्होंने कहा कि...

पर्यावरण दिवस : पद्मश्री प्रेमचंद शर्मा ने किया कृषि अनुसंधान संस्थान में वृक्षारोपण

विश्व पर्यावरण दिवस पर IATR देहरादून में पौधारोपण एवं गोष्ठी का आयोजन। पद्मश्री प्रेम चंद शर्मा ने छात्रों को मोरिंगा और पंच पल्लव के...