Sunday, June 28, 2026
Home देहरादून दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म 'अङ्वाल'  का प्रदर्शन

दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म ‘अङ्वाल’  का प्रदर्शन

दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म ‘अङ्वाल’  का प्रदर्शन

Angwal docomentri film
Angwal docomentri film

कुमाऊंनी काव्य यात्रा पर लंदन में रह रहे फ़िल्मकार ललित मोहन जोशी ने अपनी आत्मकथात्मक पर कुमाऊनी भाषा में फ़िल्म ‘अङ्वाल’ बनाई है जिसे दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के सभागार में प्रदर्शित किया गया है।

दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के प्रोग्राम एसोसिएट चन्द्रशेखर तिवारी ने फिल्मकार ललित मोहन जोशी  का परिचय प्रस्तुत किया और सभागार में उपस्थित लोगों का स्वागत करते हुए कहा कि संस्थान द्वारा आम लोगों में बौद्धिक व अकादमिक विमर्श के लिए  समय-समय पर इस तरह के  कार्यक्रमों के प्रयास के आयोजन किये जाते रहे हैं। कार्यक्रम में उत्तराखन्ड के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

Angwal docomentri film
Angwal docomentri film

उन्होंने ललिलमोहन जोशी को इस कुमाउनी फ़िल्म के निर्माण पर बधाई दी और कहा कि आंचलिक व मातृभाषा में बनी इस तरह की फिल्मों का बनना एक बड़ी बात है। फिल्मकार ललित मोहन जोशी ने  कहा कि पहाड़ के पुराने कवियों के काव्य के माध्यम से  पहाड़ की ज्वलन्त मुद्दों को इस फ़िल्म में समेटने की एक कोशिश की है। जिसका सही मूल्यांकन फ़िल्म के दर्शक ही कर सकते हैं।  इसके बाद फ़िल्म प्रदर्शन का शुभारम्भ किया गया।

Angwal docomentri film
Angwal docomentri film

एक डाक्यूमेंट्री फ़िल्म्कार के रूप में ललित मोहन जोशी की ‘लेखकों की भीड़ से अलग – गौतम सचदेव’  और  ‘बियॉन्ड पार्टीशन’ जैसी फ़िल्में हिंदी साहित्य और हिंदी फिल्मों के कथ्य और सरोकारों की पड़ताल करती हैं। उल्लेखनीय बात यह है कि अङ्वाल कुमाऊनी कविता के उद्भव, विकास और उसमें अंतर्निहित दर्द की एक  दास्तान है।

वर्ष 2019 में उत्तराखंड की मनोरम पहाड़ियों में फ़िल्मायी गयी अङ्वाल पहाड़ से होने वाले पलायन और वनोन्मूलन की भी काव्यात्मक दास्तान है।

अङ्वाल डोकोमेंट्री फिल्म गुमानी से होती हुई, गौर्दा, श्यामाचरण दत्त पंत, रामदत्त पंत, चारु चंद्र पांडे, त्रिभुवन गिरी, देव सिंह पोखरिया और दिवा भट्ट तक जाती है।

अङ्वाल के जीवंत किरदार, हिमालय की अलौकिकता, बुरांश और काफल जैसे फल-फूल, अल्मोड़ा सरीखे बौद्धिक शहर की खासियत, नौकुचियाताल और भीमताल झील की शांत लहरें और कुमाऊँ के शहरों और पहाड़ियों को जोड़ने वाली खूबसूरत घुमावदार मोटर सड़कें हैं।

अङ्वाल का छायांकन पूना फिल्म संस्थान से प्रशिक्षित रंगोली अग्रवाल ने किया है। इसका संगीत कुमाऊँ के प्रसिद्ध सरोद वादक पं.चंद्र शेखर तिवारी और बांसुरी वादक पं हरीश चंद्र पंत ने दिया है।

यह भी उल्लेखनीय है कि  लंदन के सांस्कृतिक, साहित्यिक और सिनेमाई मंच पर 1990 के दशक से रेडियो प्रसारक, लेखक, कवि, फ़िल्म इतिहासकार और फ़िल्मकार, ललित मोहन जोशी की उपस्थिति महत्त्वपूर्ण रही है। ललित मोहन जोशी अपने सांस्कृतिक कार्य व लेखन के लिए भारतीय उच्चायोग, विश्व रंग भोपाल, लमही साहित्यिक पत्रिका और यूके हिन्दी समिति द्वारा सम्मानित किये जा चुके हैं।

फ़िल्म प्रदर्शन के बाद सभागार में उपस्थित फ़िल्म के दर्शकों ने फिल्मकार जोशी से सवाल-जबाब भी किये। इस अवसर पर निकोलस हॉफलैण्ड, विकल्प पांडे, गीता गैरोला, सुंदर सिंह बिष्ट, कमला पन्त, विनोद सकलानी, डॉ.योगेश धस्माना, हिमांशु आहूजा, राकेश कुमार, आदि सहित कई फ़िल्म प्रेमी, साहित्यकार, लेखक व युवा पाठकगण उपस्थित रहे।

RELATED ARTICLES

अतीत का प्रतिशोध नहीं लिया जा सकता, उसे केवल समझा जा सकता है : IAS शशि रंजन कुमार

By - Prem Pancholi ।। अतीत हमारी स्मृतियों में, खंडहरों में, और उन तरीकों में जीवित रहता है जिनसे वह आज भी हमारे अस्तित्व को...

देहरादून : धामी कैबिनेट की बैठक संपन्न, खास विषयों पर त्वरित निर्णय

।। राज्य कैबिनेट ने कुल 12 प्रस्तावों को दी मंजूरी ।। उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा संशोधन नियमावली-2026 को मंजूरी दी, जिसके तहत संस्कृत विद्यालयों की मान्यता,...

जिलाधिकारी के शख्त निर्देश, कहा आपदा के दौरान सभी विभाग बनायें समन्वय

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जनपद देहरादून में आगामी मानसून एवं संभावित आपदा परिस्थितियों के दृष्टिगत आपदा प्रबंधन संबंधी...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

एथलीट संदीप गुसाई बना उत्तरकाशी विधिक सेवा प्राधिकरण एंबेसडर

जनसामान्य में नशा उन्मूलन, विधिक जागरूकता, सामाजिक उत्थान एवं खेलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, उत्तरकाशी द्वारा संदीप गुंसाई...

अतीत का प्रतिशोध नहीं लिया जा सकता, उसे केवल समझा जा सकता है : IAS शशि रंजन कुमार

By - Prem Pancholi ।। अतीत हमारी स्मृतियों में, खंडहरों में, और उन तरीकों में जीवित रहता है जिनसे वह आज भी हमारे अस्तित्व को...

सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स को उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद से लेनी पड़ेगी अनुमति

चारधाम यात्रा की गरिमा, सुरक्षा और शुचिता बनाए रखने हेतु सोशल मीडिया कंटेंट निर्माण के संबंध में शासन से दिशा निर्देश जारी हुए हैं।...

देहरादून : धामी कैबिनेट की बैठक संपन्न, खास विषयों पर त्वरित निर्णय

।। राज्य कैबिनेट ने कुल 12 प्रस्तावों को दी मंजूरी ।। उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा संशोधन नियमावली-2026 को मंजूरी दी, जिसके तहत संस्कृत विद्यालयों की मान्यता,...

इतिहास के पन्नो से : अपना दायां अंगूठा दिखाना चाहिए और हम दिखायेंगे भी – दादा दौलतराम खुगशाल

By - dr. Arun Kuksal   दादा दौलतराम खुगशाल (मार्च, 1891- 3 फरवरी, 1960) टिहरी रियासत के विरुद्ध जन-संघर्षों का अग्रणी व्यक्तित्व- ‘‘आज तक राजा ने हमको पढ़ने-लिखने...

जिलाधिकारी के शख्त निर्देश, कहा आपदा के दौरान सभी विभाग बनायें समन्वय

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जनपद देहरादून में आगामी मानसून एवं संभावित आपदा परिस्थितियों के दृष्टिगत आपदा प्रबंधन संबंधी...

जब वरिष्ठ पत्रकार चारू तिवारी ने वैज्ञानिक डी० डी० पंत को देखा

सुप्रसिद्ध भौतिकशास्त्री और हिमालय के चिंतक प्रो. डीडी पंत की पुण्यतिथि (11 जून, 2008) पर विशेष हमारे हिस्से के प्रो. डीडी पंत - चारु तिवारी By...

केतन लाल की निर्मम हत्या की चहुंओर चर्चा, समाज पर बड़ा कलंक।

By - Prem Pancholi   सोशल मीडिया पर जिस तरह से प्रतापनगर के ओण पट्टी के देवल गांव निवासी अनुसूचित जाति के किशोर केतन लाल की...

आपदाओं के प्रभाव को न्यूनतम करने के लिए सरकारी वर्जिश

वैज्ञानिक योजना, कुशल प्रशासन और समयबद्ध निर्णय प्रक्रिया के जरिए आपदाओं के प्रभाव को न्यूनतम करने का प्रयास किया जा रहा है।” उन्होंने कहा कि...

पर्यावरण दिवस : पद्मश्री प्रेमचंद शर्मा ने किया कृषि अनुसंधान संस्थान में वृक्षारोपण

विश्व पर्यावरण दिवस पर IATR देहरादून में पौधारोपण एवं गोष्ठी का आयोजन। पद्मश्री प्रेम चंद शर्मा ने छात्रों को मोरिंगा और पंच पल्लव के...