आजादी के बाद बापू का सपना था कि समाज में अनुसूचित जाति को समान अधिकार दिलाएंगे। क्योंकि समाज में उनकी स्थिति आज भी अछूत जैसी है। इनके साथ अपराध के आंकड़े बढ़ते जा रहे हैं। वे न तो खुले रूप से मंदिर में जा सकते हैं।अपनी बेटी- बेटा की शादी डोली या घोड़ी में बिठाकर भी नहीं कर सकते हैं। यदि किसी ने हिम्मत भी की होगी तो उच्च वर्ग के लोगों ने उन्हें प्रताड़ित किया। गांव समाज में भी उनके पक्ष में कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया है।आज भी उन्हें गांव में जल स्रोतों के पास पानी भरने के लिए तब तक इंतजार करना पड़ता है जब तक उच्च वर्ग के लोग वहां से पानी लेकर घर नहीं पहुंचते।