गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर ऋषिकेश से लेकर धराली तक भयंकर भूस्खलन हो रहा है। जिसके कारण आवाजाही बार – बार रोकनी पड़ रही है। पैदलयात्रा कर रहे लोगों की जिंदगी खतरे में है। डवरानी के पास सुखी गांव के दो युवक मलवे में दबकर मर गये हैं।
धराली में 69 लापता लोगों को ढूंढा जा रहा है। हर्षिल और धराली के बीच भागीरथी पर बन रही झील से भविष्य में मुश्किलें बढ़ सकती हैं। मनेरा से गुजरने वाला बाईपास भूस्खलन की चपेट में हैं।
इस मार्ग पर दर्जनों डेंजर जोन बन गये। इस क्षेत्र में हुए बड़े निर्माण कार्यों के कारण भूस्खलन रुकने का नाम नहीं ले रहा है। सिकुड़ते ग्लेशियर तबाही का कारण बन रहे हैं। बस्तियां भी कुछ ऐसी बसी हुई है कि जहां गदेरों के मुहाने है।
ऐसे गदेरों में पानी बढ़ता जा रहा है जो साल भर तो सूखे रहते हैं, लेकिन आजकल कई बस्तियों के ऊपर खतरा मंडरा रहा है।
मातली गांव की स्थिति बहुत चिंतित करने वाली है। जहां गांव के ऊपर से आ रहे तीन नालों ने बस्ती में मलवा भर दिया है। यहां लोगों के घरों के अंदर पानी भरा हुआ है।मानसून से पहले भी मातली गांव के श्मशान घाट की तरफ जाने वाला रास्ता ऑल वेदर रोड में जमा हुए भारी जल प्रलय के कारण क्षतिग्रस्त हो रखा है।
पर्वतीय क्षेत्रों में ढालदार पहाड़ियों पर निवास करने वाले लोग आजकल की भारी बरसात के कारण रात को भी सो नहीं पा रहे हैं।
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5 अगस्त...
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