Saturday, March 7, 2026
Home उत्तरकाशी पुरोला नगर पालिक चुनाव : नाव न डूबे, राजनीतिक गोताखोर तैनात।

पुरोला नगर पालिक चुनाव : नाव न डूबे, राजनीतिक गोताखोर तैनात।

पुरोला नगर पालिक चुनाव : नाव न डूबे, राजनीतिक गोताखोर तैनात।

@

सीमांत जनपद उत्तरकाशी का पुरोला ऐसा क्षेत्र है जहां राजनीति की पाठशालाएं चलती है। इस बात का प्रमाण पूर्व पर्वतीय विकास मंत्री बर्फिया लाल जुवांठा हैं। और बहुत कुछ है पुरोला में राजनीति को लेकर।

फिलहाल वर्तमान में हो रहे पुरोला नगर पालिका के चुनाव पर एक नजर डालते है। 4200 मतदाताओं वाली नगर पालिका पुरोला में पांच प्रत्याशी मैदान में है। इस तरह यहां भाजपा कांग्रेस की सीधी टक्कर नहीं दिख रही है, बल्कि चुनावी समीकरण त्रिकोणीय बनते दिखाई दे रहे है। अब कहा नहीं जा सकता कि चुनाव का यह रथ किस कदर अपनी कड़बट लेता है। बता दें कि यहां भाजपा को बगावती तेवर सर्वाधिक डैमेज कर सकते है। जबकि इस चुनावी समर में भाजपा ने अपने राजनीतिक गोताखोर तैनात कर रखे है। यह राजनीतिक गोताखोर एकदम सक्रिय दिखाई दे रहे है, मगर कभी कभी वे भावनात्मक हो जाते है। इसको देखते हुए ख़ांटी राजनीतिक खिलाड़ी प्यारेलाल ने समय की नजाकत को देखते हुए “चुनावी नाव” को पार लगाने के लिए सेतु का मजबूत कार्य कर रखा है।

इधर पांच में से एक ऐसा प्रत्याशी बताया जा रहा है जो डूबती हुई “चुनावी नाव” के लिए सेतु बनकर बचाने का भरसक कोशिश कर रहे है। अलबत्ता यहां जब आप प्रत्याशियों से बात करेंगे तो वे अंगुलियों पर मतदान गिनवाकर अपनी जीत पक्की बता रहे है।

ज्ञात हो कि कांग्रेस के प्रत्याशी बिहारी लाल छात्र जीवन से ही पुरोला में रहते है। कांग्रेस के साथ जुड़कर उन्होंने कई सामाजिक तथा विकासीय कार्यों को अंजाम दिया है। बिहारी लाल की पत्नी पुरोला नगर पंचायत की निवर्तमान सभासद है। इस कारण भी पिछली परफॉर्मेंस को देखते हुए वे लोगों से मतदान की अपील कर रहे है। वैसे भी बिहारी लाल लोगो की नजर में बहुत ही सौम्य और मिलनसार बताये जा रहे है। बिहारी लाल का कहना है कि पिछली नगर पंचायत में विकास को लेकर एक अच्छा खासा बजट आया था, सो भाजपा के नेताओं ने उस बजट को वापस करवाया दिया। इसलिए इस दौरान भाजपा की कथनी करनी सामने आ रही है। फलस्वरूप इसके उनकी जीत का आंकड़ा पार हो रहा है।

भाजपा के प्यारेलाल भी पुरोला क्षेत्र में बहुत लोकप्रिय राजनेता है। वे मीठा बोलते है, लोगो के के साथ उनका दोस्ताना व्यवहार है। वे पुरोला के ब्लॉक प्रमुख रहे है तो निवर्तमान नगर पंचायत पुरोला के अध्यक्ष भी रहे है। लंबे समय तक कांग्रेस के सक्रिय कार्यकर्ता रहे है। मौजूदा वक्त में इन्हें भी मोदी का जादू चढ़ा और भाजपा के खेवनहार हो गए। अपनी पुरानी जनप्रतिनिधि की पहचान को वे इस बार पुनः चुनाव जीतने के लिए इस्तेमाल कर रहे है। वे भी एकदम आश्वस्त हैं कि इस बार पुरोला की जनता प्यारेलाल का ही फिर से चुनाव करना चाहती है।

भाजपा से बगावत करके आए अमीचंद शाह भी दर दर, घर घर जाकर लोगो से अपने पक्ष में मतदान की भावनात्मक अपील कर रहे है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़कर भाजपा के बैनर पर अमीचंद शाह की एक विशिष्ट पहचान रही है। श्री शाह के पक्ष में यह बात लोग खुलकर कहते हैं कि अमीचंद शाह ने भाजपा के अलावा कभी कुछ और देखा ही नहीं है। लोग यहां तक बताते हैं कि भाजपा के कार्यक्रम को वे विकास का ही कार्यक्रम मानते थे। यानी पुरोला में भाजपा के सच्चे सिफाही रहे है। अब वे न तो थूक पा रहे है और ना ही घूंट पा रहे है। हालांकि पूर्व में उनकी पत्नी खलाड़ी जिला पंचायत सीट से सदस्य जिला पंचायत रही है। भाजपा से दुखी होकर वे मंदिर मंदिर माथा टेक रहे है। यह भी कह रहे हैं कि उनके साथ जो भाजपा के कुछ लोगों ने अन्याय किया है उसका बदला अब अपने पक्ष में मतदान करके लिया जाएगा।

निर्दलीय प्रत्याशी प्रकाश डबराल भी कोई कम हैसियत नहीं रखते है। पुरोला क्षेत्र में ऐसा कोई सार्वजनिक या व्यक्तिगत कार्यक्रम नहीं होगा, जहां प्रकाश की उपस्थिति न हो। वे हर संभव अपने क्षेत्र में उपस्थित रहते है। यानी सुख दुख में वे लोगों के साथ कंधा से कंधा मिलाकर चले है। प्रकाश के पास विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ कार्य करने का एक अच्छा खासा अनुभव है। जबकि उन्हें लोग मूल रूप से समाज सेवक मानते है। लोग सहानुभूति के आधार पर प्रकाश के पक्ष में मतदान कर सकते है। प्रकाश एकदम आश्वस्त है कि पुरोला की जनता इस बार कार्यकर्ता को जिम्मेदारी देना चाहती है। यानी उनकी जीत पक्की है।

निर्दलीय प्रत्याशी हरिमोहन जुवांठा कभी स्टेट बैंक में सेवारत थे। राजनीति का खुमार उन्हें चुनाव मैदान में खींच लाया है। बताया जाता है कि जब वे स्टेट बैंक पुरोला में कार्यरत थे तो वे लोगों से मिलते भी नहीं थे। क्योंकि वे अपने को ऑफिसर बताते थे। एक बार पुरोला के ही पास के गांव की एक विधवा का खाता कई महीनों तक इसलिए नहीं खुल पाया कि पुरोला स्टेट बैंक में मैनेजर के पद पर हरिमोहन जुवांठा बैठे थे। जब हरिमोहन जुवांठा वहां से तबादला हुए तब जाकर उक्त महिला का बैंक खाता खुल पाया। यही नहीं एक बार पुरोला की एक प्रतिष्ठित सांस्कृतिक संस्था ने स्टेट बैंक में बचत खाता खोलना था। मगर खाता खोलने के बाद भी तत्काल स्टेट बैंक के मैनेजर रहे हरिमोहन जुवांठा ने न की सिर्फ बैंक खाता खोलने के कानून पढ़ाये, बल्कि इस संस्था का खाता ही बैंक से बंद करवा दिया। जिसका उन्हें कुछ समय बाद खामियाजा भी भुगताना पड़ा। दरअसल हरिमोहन जुवांठा के ऐसे कई कारनामे है जिन्हें लोग आजकल उनके चुनाव मैदान में आते ही याद कर रहे है।

Election
Election

कुलमिलाकर भाजपा के चुनावी गोताखोर जीत की बैतरणी पार लगाने के लिए मुस्तैद हैं, तो कांग्रेस यह एकजुटता का संदेश दे रही है। भाजपा के खोटे कारनामों को जन जन तक पहुंचा रही है। इधर निर्दलीय भी किसी से कम नहीं है। अर्थात भाजपा से बगावत करके आए दोनों प्रत्याशी जोर आजमाईश कर रहे है। अब देखना यह होगा कि यह चुनावी नाव पार्टियों के प्रत्याशियों को सुरक्षित पहुंचती है या निर्दलीयों को। जो समय की गर्त में है।

RELATED ARTICLES

विज्ञान दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चन्देली में।

विज्ञान दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चन्देली में। By - Neeraj Uttarakhandi पुरोला विकासखंड के अंतर्गत राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चन्देली में राष्ट्रीय...

चिन्यालीसौड़ : समान कार्य, समान वेतन लागू होने पर उपनल कार्मिकों ने मुख्यमंत्री का जताया आभार।

‘जन जन की सरकार, जन जन के द्वार’ अभियान कार्यक्रम में विकासखंड मुख्यालय चिन्यालीसौड़ में मुख्यमंत्री ने सुनी जनसमस्या। - जनसंवाद बन रहा कार्यक्रम की...

पर्यटन के साथ कचरा निष्पादन भी हो। हिमालय में शीतकालीन पर्यटन के प्रभाव।

- पर्यटन के साथ कचरा निष्पादन भी हो। - हिमालय में शीतकालीन पर्यटन के प्रभाव --------------------------- By - Suresh bhai सन् 2000 में जब उत्तराखंड राज्य बना तो...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

धराली आपदा : वैज्ञानिकों ने किया खुलासा, एक बड़े ग्लेशियर के टुकड़े के टूटने से हुई तबाही।

न बादल फटा, न ग्लेशियल झील… वैज्ञानिक अध्ययन में खुलासा: श्रीकांता ग्लेशियर से बर्फ का बड़ा हिस्सा गिरने से हुआ था धराली हादसा। ....................... 5 अगस्त...

2017 तक स्टार्टअप की संख्या थी शून्य। वर्ष 2025 में बढ़कर हुई 1750

- 2024-25 में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) ₹ 3,81,889 करोड़ का रहा - 2021-22 के मुकाबले जीएसडीपी में आया डेढ़ गुना से ज्यादा...

एक साधारण व्यक्ति में असाधारण व्यक्तित्व की जीवन्त जीवन जीने की शब्द-यात्रा है – BARLOWGANJ AND BEYOND

- साधारण व्यक्ति का असाधारण व्यक्तित्व : प्रो. बी. के. जोशी। - प्रो. बी. के. जोशी जी के जीवनीय आत्म-संस्मरणों पर केन्द्रित पुस्तक 'BARLOWGANJ...

विकास के नए आयाम स्थापित करती ग्राम पंचायत भगवन्तपुर की ग्राम प्रधान

विकास के नए आयाम स्थापित करती ग्राम पंचायत भगवन्तपुर की ग्राम प्रधान   By - Harishankar saini   कभी गड्ढों, कीचड़ और टूटे किनारों से जूझती सलान गाँव...

होली विशेषांक : खोलो किवाड़ चलो मठ भीतर।

- खोलो किवाड़ चलो मठ भीतर। - दून पुस्तकालय में संगीताजंलि की शानदार होली प्रस्तुति दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के एम्फीथियेटर में आज संगीतांजली शास्त्रीय...

बर्लोगंज एंड बियोंड पुस्तक का लोकार्पण

पुस्तक : बर्लोगंज एंड बियोंड   By - Dr. Yogesh dhasmana   देश के प्रसिद्ध शिक्षाविद प्रो बी के जोशी के संस्मरणों पर आधारित पुस्तक बर्लोगंज एंड बियोंड...

विज्ञान दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चन्देली में।

विज्ञान दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चन्देली में। By - Neeraj Uttarakhandi पुरोला विकासखंड के अंतर्गत राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चन्देली में राष्ट्रीय...

स्पैक्स संस्था ने होली के प्राकृतिक रंगों पर दून पुस्तकालय में बच्चों को दी जानकारी।

स्पैक्स संस्था ने होली के प्राकृतिक रंगों पर दून पुस्तकालय में बच्चों को दी जानकारी। .......... दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में ‘स्पेक्स’ संस्था के सहयोग...

जनगणना की पूरी तैयारी, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होगी जनगणना

जनगणना-2027 की डिजिटल तैयारियां शुरू, देहरादून में 25-27 फरवरी तक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू चार्ज अधिकारियों से लेकर सेन्सस क्लर्क तक, सभी ले रहे डिजिटल...

एक स्वस्थ परंपरा है स्कूल ऑफ थॉट्स – प्रो० पंवार

स्कूल ऑफ थॉट्स, श्रीनगर (गढ़वाल), भारतीय-हिमालयी ज्ञान परंपरा,  मुख्य वक्ता- प्रो. मोहन पंवार। भारतीय : हिमालय ज्ञान परंपरा पर अपनी बात शुरू करते हुए मुख्य...