Thursday, May 14, 2026
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नगर निकाय बड़कोट : छः भाजपाईयों के सामने एक कांग्रेसी और एक निर्दलीय

छः भाजपाईयों के सामने एक कांग्रेसी और एक निर्दलीय।

चुनाव के दौरान अलग अलग अनुभव सामने आते है। आज मैं ऐसे स्थान के चुनाव के बारे में बताने जा रहा हूं जहां कभी चुनावी मैदान के लिए राजनतिक दलो को एक दूसरे के प्रतिद्वन्दी ढूंढने पड़ते थे। जी हां। सीमान्त जनपद उत्तरकाशी के बडकोट नगरपालिका परिषद के चुनाव के परिणाम जो भी आये मगर चुनाव से पहले क्या क्या हो रहा है आप मेरे साथ देख सकते है।

कभी यमुना घाटी स्थित बड़कोट नगर पालिका एक मात्र नगर निकाय हुआ करती थी। आज इसी सहित तीन हो गई है। मौजूदा वक्त के चुनाव में बड़कोट नगर पालिका परिषद में आठ प्रत्याशी मैदान में है। हालात इस कदर है कि अधिकांश प्रत्याशी भाजपा से नाराज होकर चुनाव मैदान में कूद पड़े है। जबकि भाजपा से ही बगावत करके एक ऐसा उम्मीदवार डा० कपिलदेव रावत ने निर्दलीय के रूप पर्चा भर दिया था। मगर उनका पर्चा त्रुटिवश निर्वाचन अधिकारी ने रद्द कर दिया, अब उनके समर्थन का जो एक बड़ा समूह है, उन पर भीतरघात करने का आरोप लगाया जा रहा है। इधर कांग्रेस के प्रत्याशी किसी भीतरघात के शिकार नहीं है। बताया जा रहा है कि आठ प्रत्याशियों में से छः भाजपा से टूटकर चुनाव मैदान में उत्तर आए है, एक भाजपा का अधिकृत प्रत्याशी है। इस तरह यदि देखा जाय तो भाजपा के वोट यहां बंटते नजर आ रहे है। भीतरघात का भी खतरा भाजपा के प्रत्याशी के ऊपर ही मंडरा रहा है। क्योंकि भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी को भाजपा से बगावत करके आए अन्य प्रत्याशी पैराशूट प्रत्याशी का आरोप लगा रहे है।

हालांकि ऐसा बताया जा रहा है कि भाजपा के क्षत्रपों ने बड़कोट में आकर डैमेज कंट्रोल कर दिया है। इधर आम लोगों में कानाफूसी हो रही है कि भाजपा के झगड़े का खतरा अतोल रावत ने भाजपा का प्रत्याशी बनाकर क्यों मोल लिया होगा? कुछ लोगों का कहना है कि भाजपा के झगड़े का फायदा कांग्रेस को नहीं बल्कि किसी तीसरे को होने वाला है। यह भी चर्चा है कि निर्दलीय प्रत्याशी विनोद डोभाल उर्फ कुतरू ने अपने जोड़ तोड़ की राजनीति आरंभ कर दी है। विनोद डोभाल कोई ख़ांटी राजनीतिक कार्यकर्ता तो नहीं, पर वे क्षेत्र में एक सामाजिक कार्यकर्ता की हैसीयत रखते है। श्री डोभाल ने राजनीतिक दलों से छिटके हुए कार्यकर्ताओं, जो दल इस बार यहां चुनाव में नहीं है उन्हें साधना सहित युवाओं को अपने पक्ष में करने के कई कार्यक्रम आरंभ कर दिए है। इस तरह बड़कोट नगर पालिका परिषद में पहली बार जोड़तोड़ की राजनीति सामने आ रही है। अन्य निर्दलीय प्रत्याशी भी किसी से कम नहीं है वे सभी अपने अपने कुनबों के बलबूते नगर पालिका परिषद को एक नया रूप देने की वकालत कर रहे है। कुलमिलाकर 10 हजार 800 मतदाताओं वाली नगर पालिका परिषद बड़कोट के अध्यक्ष के चुनाव में जीत का कोई बड़ा आंकड़ा सामने नहीं रहेगा। माना कि प्रत्येक प्रत्याशी को व्यक्तिगत छबि के कारण यदि पांच पांच सौ मतदान मिल जाए तो इस तरह 4 हजार मतदान आठ प्रत्याशियों की झोली में चला जाएगा। शेष मतदान यानी लगभग 2 हजार या 2500 जो होगा उसमें ही जीत हार की गणित बताई जा सकती है।

उल्लेखनीय हो कि भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी अतोल रावत कई सालों तक कांग्रेस के खेवनहार रहे है। वे छात्रसंघ अध्यक्ष रहे है और पूर्व में नगर पालिका परिषद बड़कोट के चेयरमैन भी रहे है। यही नहीं उन्होंने लंबे समय तक मुख्यधारा की पत्रकारिता की है। अर्थात कह सकते है कि अतोल रावत मंझे हुए राजनीतिक खिलाड़ी है। अलावा इसके उनके पास मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के कई कारण भी है।

छात्रसंघ अध्यक्ष रहे और कांग्रेस में विभिन्न पदों पर कार्य करने का विजयपाल रावत अच्छा खास अनुभव है। इसके अलावा विजयपाल रावत ने वर्धा में गांधी विचार की शिक्षा ली है। गढ़वाल मंडल विकास निगम के सदस्य रहे है। यानी विजयपाल रावत को राजनीति की शिक्षा छात्र जीवन से मिल गई थी। विजयपाल रावत ताल ठोककर कह रहे हैं कि बड़कोट की जनता बदलाव चाहती है। इसलिए वे इस चुनाव को बड़कोट की जनता के सहयोग से और कांग्रेसजनों की मदद से फतह करने जा रहे है।
निर्दलीय प्रत्याशी विनोद डोभाल क्षेत्र के जानेमाने युवा उद्यमी है। कई सालों से वे स्थानीय स्तर पर गरीब, असहाय और जरूरतमंदों की मदद करते आए है। बड़कोट में उनके परिवार को पूर्व से ही एक प्रतिष्ठित परिवार माना जाता है। जबकि उनके बड़े भाई संजय डोभाल भी वर्तमान में यमनोत्री से निर्दलीय विधायक है। विनोद ऊर्फ कुतरू आम लोगों के मध्य बेहद लोकप्रिय है। विनोद का कहना है कि वह इस बार चुनाव जीत रहे हैं। क्योंकि इस बार का चुनाव बड़कोट में दलगत से ऊपर उठकर हो रहा है।

छात्रसंघ अध्यक्ष रहे और पिछले 20 सालो से अधिक समय से सुनील थपलियाल बड़कोट क्षेत्र में पत्रकार के रूप में कार्य कर रहे है। उनके पास बड़कोट को आदर्श नगर बनाने का एक खास प्रकार का ब्लूप्रिंट है। वे बड़कोट क्षेत्र की जनता की समस्या से अक्षरशः ज्ञात है। इसलिए वे घर घर जाकर मतदाताओं को बड़कोट की दुर्दशा से वाकिफ करवा रहे है। श्री थपलियाल भी बड़कोट में कोई नया चेहरा नहीं है। इसलिए उनका प्रबल विश्वास है कि इस बार उनकी जीत पक्की है। वे कहते है कि यदि बड़कोट की जनता ने उनके हाथ मजबूत कर दिए तो वे पूर्व के घोटालों का पर्दाफाश करेंगे और घोटालेबाज पर आवश्यक कार्रवाई करवाएंगे।

राजाराम जागूड़ी बड़कोट नगर के पूर्व व्यापार मंडल अध्यक्ष है। श्री जगूड़ी बड़कोट व्यापार मंडल के 14 सालो तक अध्यक्ष रहे है। उनके पास बड़कोट नगर के विकास और समस्याओं की अच्छी खासी जानकारी है। वैसे भी राजाराम जगूड़ी बड़कोट में एक व्यवस्थित व्यापारी है। श्री जगूड़ी भी लंबे समय तक भाजपा के कार्यकर्ता रहे है। टिकट न मिलने के कारण निर्दलीय चुनाव मैदान में है।

निर्दलीय सोबन राणा बड़कोट नगर के वर्तमान में होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष है। सेना से सेवानिवृती के बाद वे भाजपा के कार्यकर्ता बन गए। भाजपा के बैनर पर श्री राणा ने क्षेत्र में सामाजिक गतिविधियों में खूब हिस्सा लिया है। वे कहते हैं कि उनके पक्ष में सेवानिवृत सैनिक तो है ही साथ में क्षेत्र के लोग उन पर इसलिए विश्वास कर रहे है कि उनकी साफ सुथरी छबि है।

निर्दलीय प्रत्याशी अजय रावत कभी भाजपा का सक्रिय कार्यकर्ता रहे है। भाजपा के मार्फत उनकी क्षेत्र में एक विश्वसनीय छबि है। उन्हें जब भाजपा का टिकट नहीं मिला तो अपने किए कार्यों के बलबूते निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर आए।

छटांगा गांव के पूरन सिंह रावत अपने पूर्व के सामाजिक कार्यों के बलबूते इस बार चुनाव मैदान में है। श्री रावत के पास नगर पालिका बड़कोट की खास जानकारी है। उन्हें लोग घर घर पहचानते है। अपनी इस पहचान को देखते हुए चुनाव मैदान में आ गए है।

अब देखना यह होगा कि यह चुनाव किस ओर कड़बट लेने वाला है। भाजपा के झगड़े का फायदा कांग्रेसजन उठाते है कि निर्दलीय इसका फायदा उठाने में सफल होते है। अथवा भाजपा डैमेज कंट्रोल करके अपने कैडर मतों का भरपूर उपयोग कर पाती है। जो भी हो चुनाव की इस नाव को किनारे में लगाने का कार्य मतदाता ही कर पाएगा।

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