Thursday, May 14, 2026
Home lifestyle सरला बहन का बचाया जंगल अंतिम सांस गिन रहा है।

सरला बहन का बचाया जंगल अंतिम सांस गिन रहा है।

क्या अनियोजित विकास की भेंट चढ़ते रहेंगे जंगल?
——————
सरला बहन का बचाया जंगल अंतिम सांस गिन रहा है।
——————–

By – Suresh bhai

उत्तराखंड में बागेश्वर जिले के बाली घाट से कोटमन्या तक मौजूदा मोटर मार्ग की दूरी लगभग 54 किमी है। यहां सघन वनों के बीच से गुजर रही सड़क के दोनों ओर हिमालय का अद्भुत नजारा है। जहां भारी संख्या में वनों के कटान की संभावना से लोग बहुत चिंतित है। यहां पर महात्मा गांधी की शिष्या सरला बहन का आश्रम है जो दुनिया में “हिम दर्शन कुटीर” के नाम से जाना जाता है। जहां उन्होंने अपने जीवन के अंतिम दिन पूरे किये थे।
सन् 1980 में भी जब यहां पर पेड़ों के कटान की संभावना थी तब सरला बहन ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी को पत्र लिखकर इसका विरोध किया था जिसके बाद सड़क चौड़ीकरण के नाम पर पेड़ों का कटान रोक दिया गया था।

यहां पर बड़ी संख्या में बांज, बुरांश, काफल, उतीश जैसी दुर्लभ वन प्रजातियां के वृक्ष मौजूद है जो उत्तराखंड हिमालय में लगभग 6-9 हज़ार फीट के बीच में पाये जाते हैं। यहां लोग काफल जैसे स्वादिष्ट जंगली फल का भरपूर आनंद उठाते हैं। और गांव के लोग भी आने- जाने वाले यात्रियों को टोकरियों में लेकर काफल उपलब्ध कराते हैं। यहां पर अभी सड़क मार्ग की चौड़ाई 5 से 6 मीटर तक है जिसमें दो गाड़ियां आसानी से आना- जाना कर सकती है लोगों का कहना है कि यदि यहां पर 12 से 18 मीटर चौड़ी सड़क बनेगी तो उस स्थिति में यहां के पर्यावरण को भारी नुकसान होगा जिसमें यहां पर्वत की टॉप पर अनगिनत दुर्लभ वन प्रजाति के पेड़ कट जाएंगे। काबिले गौर है कि यहां पर दुर्लभ वन्य जीव प्रजाति कस्तूरी मृग अनुसंधान केंद्र है। जिसका अस्तित्व यहां की जैव विविधता पर टिका हुआ है। यहां से बरड़ और पुंगर नदियां निकलती है।बरड नदी थल के पास राम गंगा में मिलती है और पुंगर नदी बालीघाट में सरयू में मिल जाती है जो कोसी की सहायक नदियां हैं और आगे गंगा में मिलती है। वन संपदा से घिरे हुए इस पर्वतमाला के दोनों ओर सैकड़ों गांव बसे हुए हैं। जहां से लोगों की प्यास बुझाने वाले जल स्रोत और खेती-बाड़ी चलती है। यहां शीतकाल में सघन बर्फ भी पड़ती है जिसको देखने के लिए मसूरी की तरह ही लोग मैदानों से वहां पहुंच जाते हैं। यह उत्तराखंड का एक सुंदर मनमोहक पर्यटन केंद्र भी है जहां प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में लोग हिम दर्शन कुटीर को देखने और यहां की मनोरम प्राकृतिक छटा का आनंद लेने के लिए पहुंचते हैं।

गांधीवादी डॉ० रमेश पंत जी का कहना है कि यहां पर लगभग 13 हजार से अधिक हरे पेड़ों पर निशान लगाए गये हैं जिन्हें सड़क चौड़ीकरण के नाम पर काटने की तैयारी चल रही है। जिसका वे विरोध कर रहे है। उन्होंने कहा है कि उच्च न्यायालय नैनीताल में भी याचिका दायर की गई है जिस पर आगे काम चल रहा है। लेकिन उनकी चिंता है कि विकास के नाम पर सरकार का पक्ष अधिक सुना जा रहा है और पर्यावरण को जो न्याय मिलना चाहिए उस विषय पर खामोशी लगती है। दूसरी ओर गर्मी से राहत पाने के लिए मैदानी क्षेत्र के लोगों का हिमालय की तरफ पहले से अधिक आना- जाना बढ़ गया है। जिनकी सुविधा के लिए पर्वतों की शांत वादियों में पर्यावरण के साथ बहुत बड़ी छेड़छाड़ हो रही है। महसूस किया जा रहा है कि मनुष्य कुछ क्षणों की सुविधा के लिए बहुत बड़ी बर्बादी की तरफ कदम बढ़ा रहा है।

उत्तराखंड जैसे हिमालय राज्य में जहां जलवायु परिवर्तन का प्रभाव बहुत तेजी से बढ़ रहा है और यहां की बची- खुची दुर्लभ वन प्रजातियों का इस तरह से नुकसान होगा तो आस-पास के गांव के जल स्रोत और यहां से निकलने वाली नदियां सूख सकती है। नंगे पहाड़ बरसात के समय तेजी से फिसलने लगेंगे। बार-बार इन गंभीर विषयों पर चर्चा भी हो रही है लेकिन लापरवाही का अंतहीन सिलसिला जारी है।

सरला आश्रम की साधिका शोभा बहन के नेतृत्व में स्थानीय वन पंचायत सरपंचों, ग्राम प्रधानों और क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी सरकार को अक्टूबर 2024 में एक पत्र लिखा है जिसमें मांग की गई है कि यहां मौजूदा सड़क पर जहां अंधे मोड़ के कारण आने-जाने में दिक्कत महसूस होती है, उनका सुधार करने की आवश्यकता है।उनकी इस मांग के साथ प्रख्यात समाजसेविका और पद्मश्री राधा बहन का समर्थन है। लेकिन जिस तरह से हरे पेड़ों को काटने के लिए बड़ी संख्या में निशान लगाए गए हैं उससे पेड़ों का व्यापारीकरण हो सकता है अधिक राजस्व भी मिल जायेगा। लेकिन यहां की भौगोलिक संरचना के अनुसार जितनी चौड़ी सड़क प्रस्तावित की जा रही है उसके अनुसार पर्याप्त स्थान ही उपलब्ध नहीं है। अतः विकास ऐसा हो जो आफत खड़ी न करें। इस अनियोजित कार्य से हिमालय के शिखर तक पहुंचना आसान नहीं होगा। क्योंकि पिछले वर्षों में जहां-जहां पर भीषण बाढ़ और भूस्खलन से तबाही हुई है वहां अनेक स्थान डेंजर जोन का रूप ले चुके हैं। जहां भविष्य में किसी भी प्रकार का निर्माण करना और अधिक जोखिमपूर्ण हो गया है। परिणाम स्वरूप भविष्य में भूस्खलन की बड़ी समस्या बढ़ती जाएगी जो उत्तराखंड में जगह-जगह दिखाई दे रही है। इसलिए लोगों का संदेश है कि हिमालय के वनों को उजाड़ने से कोई लाभ नहीं मिलेगा। अच्छा हो कि जलवायु संकट से बचने के लिए प्राकृतिक वनों की रक्षा करना सर्वोपरि उद्देश्य होना चाहिए।

……………………………..

लेखक पर्यावरण के जानकार है।

RELATED ARTICLES

फूलचंद नारी शिल्प मंदिर गर्ल्स इंटर कॉलेज में अत्याधुनिक स्टेम लैब का उद्घाटन, विज्ञान एवं नवाचार को मिलेगा नया आयाम

फूलचंद नारी शिल्प मंदिर गर्ल्स इंटर कॉलेज में अत्याधुनिक स्टेम लैब का उद्घाटन, विज्ञान एवं नवाचार को मिलेगा नया आयाम। स्पार्क टेक्नोलॉजीज , स्पेक्स एवं...

शास्त्रीय और उप-शास्त्रीय संगीत संध्या का आयोजन

शास्त्रीय और उप-शास्त्रीय संगीत संध्या का आयोजन।   By - Prem Pancholi ।।13 मई, 2026 ,देहरादन।। दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में भारत के लोक सेवा प्रसारक...

कथाकार राम प्रकाश अग्रवाल ‘कण’ की एक और कृति पाठकों के बीच

कथाकार राम प्रकाश अग्रवाल ‘कण’ के कथा संग्रह ‘मां जिसकी गोद में सभ्यताएं पलीं’ का लोकार्पण दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र देहरादून के सभागार...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

फूलचंद नारी शिल्प मंदिर गर्ल्स इंटर कॉलेज में अत्याधुनिक स्टेम लैब का उद्घाटन, विज्ञान एवं नवाचार को मिलेगा नया आयाम

फूलचंद नारी शिल्प मंदिर गर्ल्स इंटर कॉलेज में अत्याधुनिक स्टेम लैब का उद्घाटन, विज्ञान एवं नवाचार को मिलेगा नया आयाम। स्पार्क टेक्नोलॉजीज , स्पेक्स एवं...

शास्त्रीय और उप-शास्त्रीय संगीत संध्या का आयोजन

शास्त्रीय और उप-शास्त्रीय संगीत संध्या का आयोजन।   By - Prem Pancholi ।।13 मई, 2026 ,देहरादन।। दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में भारत के लोक सेवा प्रसारक...

कथाकार राम प्रकाश अग्रवाल ‘कण’ की एक और कृति पाठकों के बीच

कथाकार राम प्रकाश अग्रवाल ‘कण’ के कथा संग्रह ‘मां जिसकी गोद में सभ्यताएं पलीं’ का लोकार्पण दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र देहरादून के सभागार...

ट्राइकोग्रामा एक उत्तम प्राकृतिक खेती की तकनीकी। पढ़े पूरी रिपोर्ट

ट्राइकोग्रामा एक सूक्ष्म परजीवी ततैया है जो हानिकारक कीड़ों के अंडों पर हमला करता है। यह लगभग 200 प्रकार के नुकसानदायक कीटों के अंडों...

स्मृति शेष : बलदेव सिंह आर्य -उत्तराखंड में शिल्पकार पहचान

बलदेव सिंह आर्य -उत्तराखंड में शिल्पकार पहचान   By - Vinod Arya   सामाजिक न्याय, शिल्पकार चेतना और समानता के महान अग्रदूत बलदेव सिंह आर्य जी (12 मई...

वरिष्ठ साहित्यकार राम प्रकाश अग्रवाल कण की पुस्तक का लोकार्पण।

पुस्तक लोकार्पण "मॉं जिसके गोद में सभ्यताएं पलीं" लेखक - राम प्रकाश अग्रवाल कण, प्रकाशन - समय साक्ष्य (देहरादून)   By - Neeraj Naithani ।।   लैंसडाउन चौक स्थित...

तुलसी माला को लेकर क्यों विरोध कर रहे हैं बद्रीनाथवासी? पढ़े पूरी रिपोर्ट

By - Sanjana bhagwat   बद्रीनाथ धाम में तुलसी माला को लेकर बामणी गांव के लोगों द्वारा किया जा रहा विरोध केवल एक व्यापारिक विषय नहीं,...

12 मई विशेषांक : शिल्पकारों के उत्थान के लिए लड़ते रहे बलदेव सिंह आर्य।

‘जातीय जड़ता जाने का जश्न मनायें’। उत्तराखण्ड के शिल्पकार वर्ग में सामाजिक-शैक्षिक चेतना के अग्रदूत बलदेव सिंह आर्य (12 मई, 1912 से 22 दिसम्बर, 1992)...

अक्टूबर में होगा फिल्म पुरुस्कार समारोह : उफ्तारा

अक्टूबर में होगा फिल्म पुरुस्कार समारोह। फिल्म परिषद का कार्यालय शीघ्र। सी.ई.ओ. बंशीधर तिवारी का उफतारा ने जताया आभार। दूरदर्शन और संस्कृति विभाग को...

National Technology Day Celebrated at Forest Research Institute, Dehradun.

National Technology Day Celebrated at Forest Research Institute, Dehradun. By - News Desk - The exhibition aimed to disseminate scientific and technical knowledge through posters, models,...