Sunday, September 13, 2026
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संस्कृतिकर्मी, लेखक और सतत शोधार्थी चन्द्रशेखर तिवारी की किताब है- उत्तराखण्ड का भूगोल।

@दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के रिसर्च एसोसिएट और वरिष्ठ स्तंभकार चंद्रशेखर तिवारी की किताब है “उत्तराखंड का भूगोल”

@प्राकृतिक और सामाजिक संदर्भ को पिछले कई वर्षों से चन्द्रशेखर तिवारी संमसामयिक संदर्भों, पर्यावरण, भूगर्भ, भूगोल और इतिहास को पैनेपन के साथ देखते रहे हैं। आपके लेखन में विविध विषयों की यह समझ स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

Uttarakhand ka bhoogol
Uttarakhand ka bhoogol

दरअसल चंद्रशेखर तिवारी कुमाऊं विश्वविद्यालय से भूगोल विषय में एम.ए. होने के साथ ही विश्वविद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले छात्र रहे हैं।

संस्कृति संबंधी विषयों पर आपकी जानकारी इतनी गहन है कि आपने कुमाऊं अंचल में रामलीला, उत्तराखंड होली के लोक रंग और लोक में पर्व और परंपरा जैसी लोकोन्मुखी पुस्तकों की रचना की है। एक शोधार्थी के रूप में हिमालय के गांव में तथा उत्तराखण्ड का पर्वतीय समाज और बदलता आर्थिक परिदृश्य आपकी लेखनी को सामने लाते हैं।
यह दोनों पुस्तकें उत्तराखण्ड के चार दर्जन से अधिक गांव में तीस वर्ष के अंतराल में आए बदलाव को दर्ज करते हुए लिखी गई हैं।
उत्तराखण्ड का भूगोल पुस्तक चन्द्रशेखर तिवारी ने अपने चार दशक की लेखन यात्रा के बाद अपने विषय के प्रति सम्मान प्रकाट करने के रूप में लिखी है। विगत वर्ष के अंतिम महीनों में प्रकाशित यह पुस्तक पाठकों के बीच खास ही चर्चा में आ चुकी है। भूगोल विषय और उत्तराखंड के भूविज्ञान पर रुचि रखने वाले पाठक इस किताब को पहचानने लगे हैं। इस किताब के प्रति एक तरह का अंडर करन्ट को महसूस किया जा रहा है।
चन्द्रशेखर तिवारी ने शोध एवं अध्ययन कर्ता के रूप में विभिन्न संस्थाओं में अपनी सेवाएं देते हुए उत्तराखंड में अपनी सेवाएं दी हैं। पूर्व में आप लखनऊ स्थित गिरिविकास अध्ययन संस्थान के साथ ही इंस्टीट्यूट ऑफ काॅपरेटिव एण्ड काॅरपोरेट मैनेजमेंट रिसर्च एण्ड ट्रेनिंग तथा राज्य विकास संस्थान में कार्यरत रहे हैं। इनके अतिरिक्त अल्मोड़ा स्थित उत्तराखंड सेवा निधि पर्यावरण शिक्षा संस्थान में आप सेवारत रहे।
वर्तमान में दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र देहरादून में संचालित विभिन्न परियोजनाओं से संबद्ध हैं। उत्तराखंड के भौगोलिक व सामाजिक विषयों पर गहन जानकारी रखने वाले चन्द्रशेखर तिवारी अपनी पुस्तक के साथ न्याय करने में सफल रहे हैं। इन्होंने अपनी पुस्तक उत्तराखंड के भूगोल को एक जटिल तकनीकी भौगोलिक शब्दावली से बचाते हुए उसे सहज व बोधगम्य शैली की ओर ले जाने का सफलतम प्रयास किया है। उत्तराखंड के प्राकृतिक और सामाजिक संदर्भ में यह किताब स्थानीय भौगोलिक जानकारी देने के साथ ही उत्तराखंड के समाज, पर्यावरण, प्रकृति, वनस्पति, वन्य जीव, मृदा, खनिज और परम्परांगत उद्योग जैसे विषयों की जानकारी देती हुई चलती है।
इस किताब में आठ अध्याय हैं। अध्ययतन जानकारियों को जोड़ने के लिए लेखक ने चालीस प्रमाणिक ग्रंथों को संदर्भ के रूप में प्रयोग किया है। इसके अतिरिक्त आठ विभागीय रिपोर्टस भी संदर्भित किये हैं। पुस्तक के साथ उत्तराखंड का एक रंगीन भौगोलिक मानचित्र व आठ रंगीन पृष्ठों में विभिन्न भूअवस्थाओं को दर्शाते चित्र दिए गए हैं।
पूरी पुस्तक में दर्जनों रेखाचित्र व तुलनात्मक तालिकाएं अपने विषय के प्रति लेखक की प्रतिबद्धता को परिलक्षित कर रही हैं। किताब की भूमिका कुमाऊं विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति व दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के संस्थापक प्रो. बी.के. जोशी ने लिखी है। बकौल प्रो. जोशी पुस्तक में सरल भाषा में पर्वतीय राज्य उत्तराखंड के भौगोलिक परिवेश पर अधिकारिक जानकारी दी गई है। पुस्तक के विभिन्न खंडों के अंतर्गत यहां की भौगोलिक संरचना जल प्रवाह जल वायु, वनस्पति आदि पर विस्तार से लिखा गया है।
चन्द्रशेखर तिवारी अपने प्राक्कथन में लिखते हैं कि कुल मिलाकर इस पुस्तक में उत्तराखंड प्रदेश के भौगोलिक स्वरूप और उसमें विद्यमान प्राकृतिक व सामाजिक विशेषताओं को उज्जागर करने का प्रयास किया गया है।

@पुस्तक का प्रकाशन समय साक्ष्य व दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र द्वारा किया गया है।

@पुस्तक का मूल्य 325 रुपये है।

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