गणेश गोदियाल, राजनीति की हरी-भरी उम्मीद
राठ को बदला, अब सत्ता का सूखापन मिटाने की चुनौती
By – Seetaram Bahuguna
साल 2000, उत्तराखंड राज्य गठन का समय। मुंबई में कारोबार कर रहा राठ का एक युवा गणेश कुछ करने का इरादा लेकर वापस अपनी जड़ों की ओर लौटता है। उस दौर में राठ के बहुत कम युवा 12वीं से आगे की पढ़ाई कर पाते थे। कारण—क्षेत्र में कोई डिग्री कॉलेज नहीं था। क्षेत्र की इस समस्या ने गणेश को जैसे कुछ करने का मकसद दे दिया। उन्होंने राठ शिक्षा समिति का गठन कर प्रवासियों की मदद से पैठानी में डिग्री कॉलेज की नींव डालने का काम शुरू किया।
फिर आया 2002—पृथक उत्तराखंड राज्य का पहला विधानसभा चुनाव। तब के कांग्रेसी सतपाल महाराज के कहने पर पार्टी ने दिग्गज नेता डॉ. शिवानंद नौटियाल का टिकट काटकर युवा गणेश गोदियाल को थलीसैंण विधानसभा से दिग्गज भाजपा नेता डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के खिलाफ प्रत्याशी बना दिया। उस दौर में एक पत्रकार के रूप में मैं भी राठ क्षेत्र में इलेक्शन कवर करने गया था। निशंक जी स्वयं अपनी एंबेसेडर कार से हम पत्रकारों को नयार किनारे बन रहे इस डिग्री कॉलेज को दिखाने ले गए और कहने लगे—“गणेश गोदियाल सिर्फ चुनाव के मद्देनज़र इस दूरस्थ क्षेत्र में डिग्री कॉलेज का सपना दिखा रहे हैं। डिग्री कॉलेज बनाना कोई बच्चों का काम है क्या? चुनाव परिणाम के बाद न यह लड़का वापस मुंबई दिखेगा, न डिग्री कॉलेज बन पाएगा।”
लेकिन राठ के लोगों को गणेश गोदियाल की बातों में एक उम्मीद दिखाई दी, भरोसा दिखाई दिया। नतीजतन गणेश गोदियाल दिग्गज रमेश पोखरियाल निशंक को चुनाव हराने में कामयाब रहे। विधायक बनने के बाद गणेश गोदियाल राठ क्षेत्र में शानदार डिग्री कॉलेज बनाने में सफल हुए। राठ महाविद्यालय का उदय हुआ, जो आज इस क्षेत्र में उच्च शिक्षा का बहुत बड़ा केंद्र है।
फिर आया साल 2012—उत्तराखंड राज्य का तीसरा विधानसभा चुनाव। इस चुनाव में गणेश गोदियाल ने राठ क्षेत्र को ओबीसी का दर्जा दिलाने का वादा जनता से किया। उनके विरोधियों ने यह कहकर उनका मज़ाक उड़ाया कि यह देना किसी भी सरकार के लिए संभव नहीं है, क्योंकि यदि एक क्षेत्र को यह दर्जा दिया गया तो अन्य क्षेत्रों के लोग भी इसकी मांग करने लगेंगे। लेकिन राठ की जनता ने एक बार फिर गणेश गोदियाल की बातों पर भरोसा किया और उन्हें एक बार फिर विधानसभा पहुंचा दिया। अपने इस कार्यकाल में गणेश गोदियाल राठ क्षेत्र को ओबीसी का दर्जा दिलाने में सफल रहे। आज इसका खूब लाभ राठ के युवाओं को सरकारी नौकरियों में मिल रहा है।
शिक्षा के जरिए राठ के पिछड़ेपन को दूर करने में दो लोगों का योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। पहला—डॉ. शिवानंद नौटियाल, जिन्होंने उत्तरप्रदेश सरकार में मंत्री रहते हुए यहां के चप्पे-चप्पे में स्कूल खोलकर शिक्षा का मार्ग प्रशस्त किया। और दूसरा—गणेश गोदियाल, जिन्होंने इस क्षेत्र के युवाओं के लिए उच्च शिक्षा के न सिर्फ दरवाज़े खोले, बल्कि ओबीसी आरक्षण के जरिए सरकारी नौकरी पाने की राह आसान की।
कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि गणेश गोदियाल सिर्फ वादे नहीं करते, बल्कि उन्हें पूरा भी करते हैं।
राजनीति के तमाम उतार-चढ़ावों के बीच अपनी कार्यशैली से वे अपने समकालीन राजनेताओं में सबसे विशिष्ट एवं भरोसेमंद नज़र आते हैं। ऐसे में उम्मीद की जा सकती है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में वे न सिर्फ पार्टी का कायाकल्प करेंगे, बल्कि 2027 में पार्टी को सत्ता तक पहुंचाने की चुनौती को भी पूरा करेंगे।







