Thursday, May 14, 2026
Home टिहरी गढ़वाल अदरक बीज का कैसे करें भंडारण।

अदरक बीज का कैसे करें भंडारण।

अदरक बीज का कैसे करें भंडारण।

संपर्क – डा० राजेंद्र कुकसाल।
मो० 9456590999

समय पर प्रमाणित/ ट्रुथफुल अदरक का बीज न मिल पाने के कारण उत्तराखंड में कृषक अदरक की लाभकारी खेती नहीं कर पा रहे हैं।

योजनाओं में अदरक बीज खरीद हेतु राजकीय पौधालयों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के संस्थानों / राज्य कृषि / औद्यानिक विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केन्द्रों एवं अदरक बीज उत्पादक सार्वजनिक संस्थाओं से क्रय करने के स्पष्ट निर्देश है।उद्यान विभाग वर्षों से टेंडर द्वारा निजि फर्मों / दलालों के माध्यम से पूर्वोत्तर राज्योंअसम,मणिपुर, मेघालय व अन्य राज्यों से सामान्य किस्म के अदरक को क्रय कर प्रमाणित / Truthful रियोडी जिनेरियो किस्म बता कर राज्य के कृषकों को योजनाओं में बीज के नाम पर बांटता आ रहा है। हिमाचल प्रदेश की तरह कभी भी राज्य को अदरक बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास नहीं किया गया।

अदरक उत्पादकों का कहना है कि उद्यान विभाग से प्राप्त अदरक बीज समय पर नहीं मिल पाता साथ ही इस बीज से कई तरह की बीमारियों खेतों में आने का डर रहता है।

अदरक भंडारण
अदरक भंडारण

प्रगतिशील अदरक उत्पादक स्वयमं अपनी अदरक उपज से अदरक को बीज हेतु भंडारित करते हैं। इसलिए आवश्यक है कि अदरक की भरपूर उपज हेतु ,कृषक अपनी स्वस्थ उपज से ही अदरक बीज का भंडारण करें।

*अदरक की भरपूर उपज के लिए, स्वयंम की उत्पादित अदरक का करें बीज हेतु भंडारण*

अदरक बीज का भंडारण –

बीज हेतु अदरक उपज को लम्बे समय याने तीन माह से अधिक समय ( दिसंबर- मार्च ) तक भंडारण करना होता है , इसलिए आवश्यक है भंडारण सही विधि से करें जिससे अदरक सड़े नहीं।

जिस खेत में अदरक की फसल पर बीमारियों लगी हों ,उस खेत के अदरक को बीज के लिए भंडारण न करें।

अच्छे सुडौल, पूर्ण रूप से विकसित प्रकंदों का चयन करके उन्हें अलग से रखें तथा अच्छी तरह से छाया में सुखा लें।

प्रकन्दों का भंडारण ठंडे,सूखे ऊंचे एवं छाया दार स्थान पर एक उचित वायु संचार युक्त गड्ढों में करना चाहिए।

भंडारण करने से पूर्व गड्ढे को एक भाग फौरमिलीन तथा 8 भाग पानी का घोल बनाकर उपचारित कर दें ,गड्ढे के अन्दर घास फूस जलाकर भी गड्ढे को उपचारित किया जा सकता है।

उपचारित गड्ठे को भलीभांति सफाई कर लें तथा उसे अंदर से गाय के गोबर + गोमूत्र से भलीभांति पुताई कर एक सप्ताह तक धूप में खुला छोड़ दें जिससे गड्ढे में नमी न रहे।

भंडारण करने से पूर्व प्रकन्दों को कार्बेन्डाजिम ( 100 ग्राम) + मैन्कोजैव ( 250 ग्राम ) को 100 लीटर पानी में घोल तैयार कर लें इस घोल में 70 – 80 किलोग्राम अदरक को एक घंटे तक उपचारित करें। घोल का प्रयोग दो बार किया जा सकता है।

ट्राइकोडर्मा कल्चर से भी अदरक बीज का उपचार कर सकते हैं उपचार छाया में करें तेज धूप में ट्राइकोडर्मा जीवाणु मर सकते हैं। अदरक पर हल्का सा पानी छिड़क कर, दस ग्राम ट्राइकोडर्मा प्रति किलो अदरक बीज की दर से (याने एक कुन्तल बीज हेतु एक किलोग्राम ट्राइकोडर्मा ) उपचारित करें, जिससे ट्राइकोड्रमा की पर्त अदरक कन्दो पर बन जाय।उपचारित अदरक को छाया में भली भांति सुखायें।

बीज भंडारण से पूर्व गड्ढे में सबसे नीचे एक परत रेत या बुरादा या धान की पुलाव बिछा दें फिर उपचारित बीज को भरें। हवा के संचार के लिये छिद्र युक्त प्लास्टिक के पाईप को गड्ढे के बीच में डालें। गड्ढे में प्रकन्दों को पूरी तरह से न भरें 1/4 भाग खाली रखें। ऊपर के खाली भाग में सूखी घास रखें तथा गड्ढे को ऊपर से लकड़ी के तख्ते से ढक दें। तख्तों किनारों को मिट्टी से पोत दें। हवा के आवा गमन हेतु यदि छिद्र युक्त पौलीथीन पाइप की व्यवस्था नहीं हो पा रही है तो ऊपर से बिछे तखत्तो के बीच में हवा के आव गमन हेतु जगह छोड़ दें।

सही भंडारण के लिए खत्तियों को अच्छी तरह ढकना जरूरी है इसके लिए पत्तियों व घास का रिंगांल / बांस के साथ कच्चा ढांचा बनाया जा सकता है जिससे बर्षा का पानी खत्तियों में जाने से रोका जा सके।

समय समय पर भंडारित अदरक को पलट कर देखते रहें यदि सड़ा अदरक दिखाई दे तो उसे हटा लें।

टेहरी जनपद के आगरा खाल में अदरक उत्पादक खत्तियो में बीज हेतु अदरक भरने के बाद ऊपर से मालू के पत्तों से बने बिशेष आवरण जिसे स्थानीय भाषा में पितलोट कहते हैं , से ढक देते हैं जिससे बर्षा का पानी अन्दर नहीं जा पाता साथ ही हवा का आवा गमन भी बना रहता है जिससे अदरक बीज सुरक्षित रहता है।

RELATED ARTICLES

पहल : पाली बना अखरोट ग्राम, हर परिवार को जोड़ा गया इस योजना से। पढ़े पूरी रिपोर्ट।

गांव पाली, अंजनीसैंण, टिहरी गढ़वाल में ‘वालनट विलेज पहल’ के अंतर्गत अखरोट उत्पादन एवं उद्यमिता पर एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम संपन्न। By - Prem Pancholi पहाड़...

⁠वीबी – जी राम जी मिशन योजना एक महत्वपूर्ण पहल है : किशोर उपाध्याय

'विकसित भारत- जी राम जी अधिनियम' विषय पर नई टिहरी में मीडिया कार्यशाला 'वार्तालाप' का हुआ आयोजन - कार्यशाला का उद्देश्य योजना के प्रावधानों एवं...

भारतीय भोजन को अंतराष्ट्रीय स्तर पर परोस रहे है कुलदीप

By - Prem Pancholi जगजाहिर है कि दुनियाभर में उत्तराखंडी युवाओं का होटल कारोबार में एक अलग पहचान है। इसी कड़ी में आपको मै ऐसे...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

यात्रा संस्मरण : जब यायावर डॉ० अरुण कुकसाल मिले जखोली की डॉ० आशा से।

जीवन के आघातों से जूझकर हासिल की कामयाबी-डा. आशा। Dr. Arun kuksal श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, तिलवाड़ा, मयाली से होकर जखोली पहुँचा हूँ। ‘जखोली (समुद्रतल से ऊँचाई लगभग...

फूलचंद नारी शिल्प मंदिर गर्ल्स इंटर कॉलेज में अत्याधुनिक स्टेम लैब का उद्घाटन, विज्ञान एवं नवाचार को मिलेगा नया आयाम

फूलचंद नारी शिल्प मंदिर गर्ल्स इंटर कॉलेज में अत्याधुनिक स्टेम लैब का उद्घाटन, विज्ञान एवं नवाचार को मिलेगा नया आयाम। स्पार्क टेक्नोलॉजीज , स्पेक्स एवं...

शास्त्रीय और उप-शास्त्रीय संगीत संध्या का आयोजन

शास्त्रीय और उप-शास्त्रीय संगीत संध्या का आयोजन।   By - Prem Pancholi ।।13 मई, 2026 ,देहरादन।। दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में भारत के लोक सेवा प्रसारक...

कथाकार राम प्रकाश अग्रवाल ‘कण’ की एक और कृति पाठकों के बीच

कथाकार राम प्रकाश अग्रवाल ‘कण’ के कथा संग्रह ‘मां जिसकी गोद में सभ्यताएं पलीं’ का लोकार्पण दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र देहरादून के सभागार...

ट्राइकोग्रामा एक उत्तम प्राकृतिक खेती की तकनीकी। पढ़े पूरी रिपोर्ट

ट्राइकोग्रामा एक सूक्ष्म परजीवी ततैया है जो हानिकारक कीड़ों के अंडों पर हमला करता है। यह लगभग 200 प्रकार के नुकसानदायक कीटों के अंडों...

स्मृति शेष : बलदेव सिंह आर्य -उत्तराखंड में शिल्पकार पहचान

बलदेव सिंह आर्य -उत्तराखंड में शिल्पकार पहचान   By - Vinod Arya   सामाजिक न्याय, शिल्पकार चेतना और समानता के महान अग्रदूत बलदेव सिंह आर्य जी (12 मई...

वरिष्ठ साहित्यकार राम प्रकाश अग्रवाल कण की पुस्तक का लोकार्पण।

पुस्तक लोकार्पण "मॉं जिसके गोद में सभ्यताएं पलीं" लेखक - राम प्रकाश अग्रवाल कण, प्रकाशन - समय साक्ष्य (देहरादून)   By - Neeraj Naithani ।।   लैंसडाउन चौक स्थित...

तुलसी माला को लेकर क्यों विरोध कर रहे हैं बद्रीनाथवासी? पढ़े पूरी रिपोर्ट

By - Sanjana bhagwat   बद्रीनाथ धाम में तुलसी माला को लेकर बामणी गांव के लोगों द्वारा किया जा रहा विरोध केवल एक व्यापारिक विषय नहीं,...

12 मई विशेषांक : शिल्पकारों के उत्थान के लिए लड़ते रहे बलदेव सिंह आर्य।

‘जातीय जड़ता जाने का जश्न मनायें’। उत्तराखण्ड के शिल्पकार वर्ग में सामाजिक-शैक्षिक चेतना के अग्रदूत बलदेव सिंह आर्य (12 मई, 1912 से 22 दिसम्बर, 1992)...

अक्टूबर में होगा फिल्म पुरुस्कार समारोह : उफ्तारा

अक्टूबर में होगा फिल्म पुरुस्कार समारोह। फिल्म परिषद का कार्यालय शीघ्र। सी.ई.ओ. बंशीधर तिवारी का उफतारा ने जताया आभार। दूरदर्शन और संस्कृति विभाग को...