– हाकम सिंह रावत कहीं हकीमुद्दीन राव तो नहीं।
– क्या डेमोग्राफी मंत्रालय करेगा जांच?
By – Gajendra Rawat
उत्तराखंड में कल भौत गहन जांच पड़ताल और कई प्रकार की लैब टेस्टिंग के बाद जिहाद के ताजा वेरिएंट “नकल जिहाद” के सामने आने के बाद इस बात की आशंका व्यक्त की जा रही है कि उत्तरकाशी के जिस नकल माफिया को हाकम सिंह रावत के नाम से दूसरी बार गिरफ्तार किया गया है उसका असली नाम कहीं हकीमुद्दीन राव तो नहीं? वह वास्तव में उत्तरकाशी का रहने वाला है या फर्जी कागज बनाकर नकली आधार कार्ड बनाकर क्षेत्रीय भाषा और गाने – डांस सीखकर वहां रह रहा था. इस बात की जांच जरूर की जानी चाहिए कि इस व्यक्ति ने अपना नाम हाकम सिंह रावत क्यों लिखवाया? इसने नकल जिहाद उत्तराखंड में कहां से शुरू हुआ और अभी तक इस जिहाद के तहत यह कितने नेताओं और अधिकारियों को जिहाद के माध्यम से फायदा पहुंचा चुका है? आखिरकार सूबे के डीजीपी को यह कैसे अपने होटल में ले गया?
उत्तराखंड में ऑपरेशन कालनेमी में अभी तक ऐसे बहुत सारे फ्रॉड टाइप के लोगों को सरकार गिरफ्तार कर चुकी है जो नाम और भेष बदलकर भीख मांग रहे थे। जिस तेजी के साथ कल नकल जिहाद का मामला सामने आया है उसके बाद निश्चित रूप से हकीमुद्दीन राव की मतलब हाकम सिंह की देश की आजादी के बाद की हिस्ट्री सामने लाने की जरुरत है.
कहीं ऐसा तो नहीं कि जिस प्रकार पूरे उत्तराखंड में ठेकेदार,लेबर से लेकर मिस्त्री, प्लंबर, नाई, मोची, धोबी इलेक्ट्रीशियन, ड्राइवर, कंडक्टर, दूध सब्जी राशन, टेलर, पेंटर, टाइल वाला पत्थर वाला पंचर वाला हर काम मे दूसरे लोग एक्सपर्ट बनकर पैसा कमा रहे वो भी कोई स्वरोजगार या आत्मनिर्भर जिहाद ही हो.
उत्तराखंड मे जिस तेजी के साथ हजारों की संख्या में जमीन कब्जा कर मजारें बनाई गई हो सकता है कि इसी प्रकार के काम किए गए हो.
निश्चित रूप से जो लोग नकल जिहाद की जांच कर रहे हैं उनको इन बिंदुओं को जरूर ध्यान रखना चाहिए।
@लेखक वरिष्ठ पत्रकार है।








