Friday, September 11, 2026
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हिमालय से साक्षात्कार करती चित्र प्रदर्शनी, हिमालय की 170 साल पुरानी फोटो है यहां

हिमालय से साक्षात्कार करती चित्र प्रदर्शनी का शुभारम्भ दून पुस्तकालय में।

 

इनफार्मेशन डेस्क, दून लाइब्रेरी

दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में जर्मन के श्लागिंटवाईट बन्धुओं की निर्मित 170 साल पुराने चित्रों की प्रदर्शनी का शुभारम्भ हुआ। पहाड़ संस्था के प्रो. शेखर पाठक, की खास पहल से हिमालय के यह चित्र जर्मनी के म्यूनिख संग्रहालय से निकल कर आम लोगों के बीच अवलोकन के लिए पहुंचे हैं। इसमें इसे म्यूनिख संग्रहालय सहित श्लांगिटवाइट के पांरिवारिक सदस्यों के साथ-साथ प्रो. हरमन क्रुत्जमैन , मैडम स्टेफनी क्लेइट, स्टीफन रिट्टर आदि का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

आम जन के लिए प्रदर्शित हिमालय के चित्रों की प्रदर्शनी की इस श्रंखला की शुरूआत दिल्ली के इंडिया इन्टरनेशनल सैण्टर से होते हुए आज देहरादून के दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र में आयी है तथा इसके बाद यह नैनीताल के सीआरएसटी काॅलेज में प्रदर्शित होने जा रही है। महत्वपूर्ण बात यह है कि दून पुस्तकालय में लगी इस प्रदर्शनी के चित्रों में आम लोगों को जम्मू कश्मीर से लेकर बदरीनाथ,केदार नाथ ,मिलम,सुन्दरढूंगा, नैनीताल और पूरब में दार्जिलिंग तक के तत्कालीन इतिहास की कई शानदार झलकियां देखने को मिल सकेंगी जिनसे आम लोग सीधे साक्षात्कार कर सकेंगे । तीन जर्मन बन्धुओं की इस यात्रा कथा में शामिल इन चित्रों के जरिये लोग लगभग पौने दौ सौ साल पुराने हिमालय के विविध स्थानीय भू-दृश्यों, नदियों, पर्वत,पहाड़ों,पुल,रास्तों व मंदिरों को देख सकेगें । सही मायने में चित्र हर दर्शकों के मन में कौतूहल पैदा करने को उद्यत दिखाई पड़ते हैं।

आज के इस कार्यक्रम में प्रो. शेखर पाठक और प्रो. हरमन क्रुत्जमैन इन संदर्भों के विविध आयामों पर अपना वक्तव्य प्रदान किया। प्रो. पाठक ने कहा कि भारत में इस प्रदर्शनी का विचार सितंबर 2015 में तब आया जब वे म्यूनिख में एक संगोष्ठी के दौरान आए थे। इसमें श्लांगिटवाइट के अभियानों पर प्रकाश डाला गया था। इस संगोष्ठी में उनके द्वारा एकत्रित कलाकृतियों, मुखौटों, नृवंशविज्ञान संबंधी वस्तुओं, मानचित्रों, मापों और अभिलेखों की एक बड़ी प्रदर्शनी भी शामिल थी। इसका मुख्य विषय श्लांगिटवाइट चित्रों को उनके अभियानों के संदर्भ में प्रदर्शित करना था। ये चित्र श्लांगिटवाइट परिवार के वारिसों द्वारा म्यूनिख के अल्पाइन संग्रहालय को दान किए गए थे।

कार्यक्रम में दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के संस्थापक प्रो.बी.के जोशी ने कार्यक्रम में अतिथि वक्ताओं और उपस्थित लोगों का स्वागत किया और कहा कि यह प्रदर्शनी इतिहासकारों, भूगोलवेताओं और समाज विज्ञानियों तथा शोधकर्ताओं व अध्येताओं के अलावा आम दर्शकों के लिए कई मायनों में विशेष साबित होगी. श्री एन. रविशंकर ने भी अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि साहित्य, कला, संस्कृति, समाज इतिहास व पर्यावरण जैसे विविध विषयों पर बौद्धिक विमर्श की निरंतर श्रंखला में आज का भी यह कार्यक्रम हम सबके लिए यह निश्चित ही नई जानकारी देने वाला और ज्ञानवर्धक साबित रहेगा। कार्यक्रम में सर्वे ऑफ इण्डिया के एडिशनल सर्वैयर संदीप श्रीवास्त ने भी अपने विचार व्यक्त किये.

प्रदर्शनी

यह प्रदर्शनी आम लोगों के लिए 1-8 मई, 2026 तक दून पुस्तकालय के तृतीय तल में प्रातः 11ः00 बजे से सायं 6ः30 बजे तक निशुल्क तौर पर खुली रहेगी।

आज के इस कार्यक्रम के पूर्व में केन्द्र के कार्यक्रम अधिकारी चन्द्रशेखर तिवारी ने प्रदर्शनी के चित्रों पर संक्षिप्त प्रकाश डाला. कार्यक्रम का सफल संचालन सामाजिक व सांस्कृतिक अध्येता डॉ. लोकेश ओहरी ने किया। प्रदर्शनी के शुभारंभ में लोक कलाकार रामचरण जुयाल ने मोंछंग बजाकर लोगों को आनंदित किया.

इस अवसर पर पूर्व सचिव उत्तराखण्ड, नृप सिंह नपलच्याल, सुरेन्द्र सिंह पांगती, डॉ.पंकज नैथानी, डॉ. डी.के. पाण्डे, डॉ. लालता प्रसाद, सुंदर सिंह बिष्ट, चन्दन सिंह डांगी, जयदीप रावत, उमेश सिंह, अर्पणा वर्धन, नवीन नौटियाल, डॉ. मालविका चौहान, डॉ.बी.पी. मैठाणी, डॉ. कुसुम नौटियाल, डॉ.संजय चोपड़ा,,निकोलस हॉफलैण्ड, डा. योगेश धस्माना, चन्द्रशेखर तिवारी, रजनीश त्रिवेदी, नवीन नैथानी, राजेश, सकलानी, बसन्ती पाठक, प्रतीक पंवार, योगेन्द्र नेगी, जे.पी. मैठाणी,विनोद सकलानी साहित कई, सामाजिक कार्यकर्ता, चिंतक,इतिहास विद, संस्कृतिविद, लेखक,साहित्यकार साहित कई प्रबुद्घ जन शामिल रहे.

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