Sunday, June 28, 2026
Home अल्मोड़ा महान हिमालय और हिमालयी सौंदर्य का दीदार

महान हिमालय और हिमालयी सौंदर्य का दीदार

महान हिमालय और हिमालयी सौंदर्य का दीदार

@Chandrashekhar Tiwari

लघु हिमालय के उत्तर दिशा में महान हिमालय का भू-भाग स्थित है। इसका विस्तार मुख्य केन्द्रीय भ्रंश से लेकर उत्तर में भारत-तिब्बत सीमा से पूर्व तक मौजूद है। इस भू-भाग में अनेक हिमाच्छादित पर्वत शिखर व हिमनद घाटियाँ पायी जाती हैं। लगभग 50 किमी. की चौड़ाई में फैले इस भाग का औसत उच्चावचन 4800 मी. से 6000 मी. के मध्य मिलता है। यहाँ की आन्तरिक चट्टानों में ग्रेनाइट, नीस, सिस्ट आदि की प्रधानता है। इसके बाद कायान्तरित व अवसादी शैल मिलते हैं।

Himalaya
Himalaya

अवसादी चट्टानों की तह में कई किस्म के जलीय जीवाश्म भी पाये जाते हैं। भूगोलवेत्ता महान हिमालय को हिमाद्रि, वृहत हिमालय अथवा महा हिमालय आदि नामों से भी जानते हैं। विश्व के कठिनतम हिम शिखरों में कई शिखर इसी भू-भाग में स्थित हैं। भारत की दो सर्वोच्च पर्वत चोटियाँ नंदादेवी (7817 मी.) तथा कामेट (7756 मी.) इसी भाग में स्थित हैं। इस भाग में हिम शिखरों की कईश्रेणियाँ हैं जिनमें अनेक हिमनद मिलते हैं। हिमनदों द्वारा इस भू-क्षेत्र में विविध तरह की स्थलाकृतियों का निर्माण किया गया है जिनमें U आकार की छोटी-छोटी हिम घाटियाँ प्रमुख हैं। यहाँ की अन्य प्रमुख पर्वत चोटियों में माणा (7273मी.), चौखम्भा (7138मी.), सतोपंथ (7075मी.), त्रिशूल (7045मी.), पंचाचूली (6905मी.), तथा बंदरपूंछ (6315 मी.) उल्लेखनीय हैं।

हिम शिखरों का दुर्गम परिवेश व उसकी नैसर्गिक सुन्दरता पर्वतरोहियों, पथारोहियों व साहसिक पर्यटकों को हमेशा अपनी ओर आकर्षित करती है। हिम शिखरों से उद्गमित भागीरथी, अलकनंदा, धौली गंगा, जाड़ गंगा, पिंडर, गोरी, दारमा व कुटीयांगती नदियों ने इस भू-भाग में अनेक गहरी व संकीर्ण घाटियाँ बना दी हैं। इस भाग में तीव्र ढालदार भूमि की अधिकता व कठोरतम जलवायु कृषि कार्यों के लिए उपयुक्त दशाएँ उत्पन्न नहीं करती। फलतः यहाँ के निवासी पशुचारण, कुटीर विनिर्माण, व्यापार जैसे पारम्परिक उद्यमों में संलग्न रहते हैं।

इस प्रदेश में कड़ाके की ठण्ड पड़ती है। यहाँ का औसतन वार्षिक तापमान हिमांक 0 डिग्री सेल्सियस से निम्न रहता है। न्यूनतम तापमान जनवरी में – 12 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे चला जाता है। अधिकतम तापमान जून में 4 डिग्री सेल्सियस के करीब आ जाता है। कठोर शीत जलवायु के कारण प्रायः यहाँ वनस्पति का अभाव दिखायी देता है. हिमालय के निम्न भाग जो 4000 मी. की ऊँचाई तक स्थित हैं उनमें मखमली घास की घाटियाँ पायी जाती हैं। इन्हें यहाँ बुग्याल अथवा पयार कहा जाता है। ग्रीष्म काल में बर्फ पिघलने के बाद यहाँ की जमीन में अनेक किस्म की घास, पुष्प प्रजातियाँ व बहुमूल्य औषधीय वनस्पतियां उग आती हैं। फूलों की घाटी, वैदिनी बुग्याल, पंवाली कांठा, दयारा बुग्याल व हर की दून नामिक बुग्याल व छिपलाकेदार जैसे प्रमुख बुग्यालों का इस दृष्टि से विशेष स्थान है। पशुचारक ग्रीष्म ऋतु के दौरान इन बुग्यालों व इसकी निचली घाटियों में पशुचारण के लिए जाते हैं।

लेखक वरिष्ठ स्तंभकार और दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र रिसर्च एसोसिएट है

RELATED ARTICLES

इतिहास के पन्नो से : अपना दायां अंगूठा दिखाना चाहिए और हम दिखायेंगे भी – दादा दौलतराम खुगशाल

By - dr. Arun Kuksal   दादा दौलतराम खुगशाल (मार्च, 1891- 3 फरवरी, 1960) टिहरी रियासत के विरुद्ध जन-संघर्षों का अग्रणी व्यक्तित्व- ‘‘आज तक राजा ने हमको पढ़ने-लिखने...

जब वरिष्ठ पत्रकार चारू तिवारी ने वैज्ञानिक डी० डी० पंत को देखा

सुप्रसिद्ध भौतिकशास्त्री और हिमालय के चिंतक प्रो. डीडी पंत की पुण्यतिथि (11 जून, 2008) पर विशेष हमारे हिस्से के प्रो. डीडी पंत - चारु तिवारी By...

स्मृति शेष : बलदेव सिंह आर्य -उत्तराखंड में शिल्पकार पहचान

बलदेव सिंह आर्य -उत्तराखंड में शिल्पकार पहचान   By - Vinod Arya   सामाजिक न्याय, शिल्पकार चेतना और समानता के महान अग्रदूत बलदेव सिंह आर्य जी (12 मई...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

एथलीट संदीप गुसाई बना उत्तरकाशी विधिक सेवा प्राधिकरण एंबेसडर

जनसामान्य में नशा उन्मूलन, विधिक जागरूकता, सामाजिक उत्थान एवं खेलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, उत्तरकाशी द्वारा संदीप गुंसाई...

अतीत का प्रतिशोध नहीं लिया जा सकता, उसे केवल समझा जा सकता है : IAS शशि रंजन कुमार

By - Prem Pancholi ।। अतीत हमारी स्मृतियों में, खंडहरों में, और उन तरीकों में जीवित रहता है जिनसे वह आज भी हमारे अस्तित्व को...

सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स को उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद से लेनी पड़ेगी अनुमति

चारधाम यात्रा की गरिमा, सुरक्षा और शुचिता बनाए रखने हेतु सोशल मीडिया कंटेंट निर्माण के संबंध में शासन से दिशा निर्देश जारी हुए हैं।...

देहरादून : धामी कैबिनेट की बैठक संपन्न, खास विषयों पर त्वरित निर्णय

।। राज्य कैबिनेट ने कुल 12 प्रस्तावों को दी मंजूरी ।। उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा संशोधन नियमावली-2026 को मंजूरी दी, जिसके तहत संस्कृत विद्यालयों की मान्यता,...

इतिहास के पन्नो से : अपना दायां अंगूठा दिखाना चाहिए और हम दिखायेंगे भी – दादा दौलतराम खुगशाल

By - dr. Arun Kuksal   दादा दौलतराम खुगशाल (मार्च, 1891- 3 फरवरी, 1960) टिहरी रियासत के विरुद्ध जन-संघर्षों का अग्रणी व्यक्तित्व- ‘‘आज तक राजा ने हमको पढ़ने-लिखने...

जिलाधिकारी के शख्त निर्देश, कहा आपदा के दौरान सभी विभाग बनायें समन्वय

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जनपद देहरादून में आगामी मानसून एवं संभावित आपदा परिस्थितियों के दृष्टिगत आपदा प्रबंधन संबंधी...

जब वरिष्ठ पत्रकार चारू तिवारी ने वैज्ञानिक डी० डी० पंत को देखा

सुप्रसिद्ध भौतिकशास्त्री और हिमालय के चिंतक प्रो. डीडी पंत की पुण्यतिथि (11 जून, 2008) पर विशेष हमारे हिस्से के प्रो. डीडी पंत - चारु तिवारी By...

केतन लाल की निर्मम हत्या की चहुंओर चर्चा, समाज पर बड़ा कलंक।

By - Prem Pancholi   सोशल मीडिया पर जिस तरह से प्रतापनगर के ओण पट्टी के देवल गांव निवासी अनुसूचित जाति के किशोर केतन लाल की...

आपदाओं के प्रभाव को न्यूनतम करने के लिए सरकारी वर्जिश

वैज्ञानिक योजना, कुशल प्रशासन और समयबद्ध निर्णय प्रक्रिया के जरिए आपदाओं के प्रभाव को न्यूनतम करने का प्रयास किया जा रहा है।” उन्होंने कहा कि...

पर्यावरण दिवस : पद्मश्री प्रेमचंद शर्मा ने किया कृषि अनुसंधान संस्थान में वृक्षारोपण

विश्व पर्यावरण दिवस पर IATR देहरादून में पौधारोपण एवं गोष्ठी का आयोजन। पद्मश्री प्रेम चंद शर्मा ने छात्रों को मोरिंगा और पंच पल्लव के...