
दरअसल इक्सवी सदी में आज के दिन को बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है। वैलेनटाइन डे। अर्थात आज के दिन यानि हर वर्ष 14 फरवरी का दिन प्यार का इजहार करने का दिन बताया गया है। अपने देश में कुछ संगठन इस दिन का विरोध करते है। मगर प्यार करने वालों को तो किसी भी सदी में किसी ने भी नही रोक पाया है। खैर!
कितना अजीब है यह प्रेम दिवस मनाने की प्रथा, जो आजकल चल पड़ी है। सिखा सरी अपना ली गयी है। जिसको युवा वर्ग वैलेनटाइन डे बोलते हैं। दरअसल यह तो मुख्यतः शहीद दिवस के रूप में रोम में एक संत वैलेंटाइन के नाम से मनाया जाता था। खैर तो क्या, यह माने कि यह वैलेनटाइन डे भी प्रेमी जोड़ों का एक दूसरे के लिए बलिदान होने का दिवस है? खैर! इससे हमारा कोई लेना देना नहीं। लेकिन आजकल के युवाओं का खुल्लम खुल्ला प्रेम देखकर बुर्जुगों को अपना पुराना ज़माना जरूर याद आता होगा। की कैसा समय था वह जब वे प्रेम तो करते थे पर एक पर्दे में। मगर आज मनुष्य ने प्रेम में भी उतरोतर वृद्धी की है। यहां मैं वरिष्ठ कवि सरोज उप्रेती की सद कविता प्रस्तुत कर रहा हूं आज के वैलेनटाइन डे पर।
तब का प्यार, तब प्यार की परिभाषा ही अलग थी
लड़के -लडकियों का प्यार मन ही मन होता
फिर दिल दिया जाता
किसी को देखा तो मन को भा गया
फिर सपनो में भी वो ख्यालो में भी
वो ही नज़र आता
तब दबी जुबान से प्यार शब्द का उच्चारण करना
बेशर्मी का प्रतीक था
बॉयज गर्ल्स कॉलेज में मीलों दूरियां थी
फिर भी प्यार करने वाले प्रेमी
रिसेज के वक्त कालेज के आस- पास मंडराते नजर आ जाते थे
जिस लडकी के दीवाने उसकी एक झलक पाने को
बेताब दिख गई तो उनके वारे न्यारे
ऐसा था तब का प्यार।
लडकियों पर पूरी बंदिस होने के बाबजूद
मिलने के कई बहाने थे
नई किताब लेने का बहाना
सहेली से कापी वापस लेने का बहाना
छोटे भाई को बोडीगार्ड बना कर साथ ले जाना
उसके हाथ में लोलीपोप थमाकर
दुकान के बाहर खड़ा कर देना
लोलिपोप के खत्म होने तक प्यार का इजहार भी कर देना
ऐसा था तब का प्यार।
शादियों में लडकियों पर घर वालों की पूरी निगरानी होती
पर प्यार तो प्यार परवान चढ़ ही जाता
लोगों की निगाहों से बचकर
आखों के इशारों में दिल से दिल मिलते
फिर होता प्यार हो जाता
एसा था तब का प्यार।
कभी किसी लडके का
बाल बाल सुखाती लडकी पर दिल आ जाना
ना झटको जुल्फ से पानी गाते हुए
गली से निकलना
लडकी का आखें मिलते ही शर्म से लाल हो जाना
फिर होता था सिलसिला गुलाबी रंग के लिफाफे में
इत्र तरबर चिठ्ठी का कालेज के लेटर बॉक्स तक पहुच जाना
लड़की का सहेली को साथ लेकर
प्रेमी से गुपचुप मिलने जाना
फिर प्यार का इजहार
ऐसा था तब का प्यार।

तब के प्यार में थोड़ा पाबन्दी थी, थोड़ा संस्कृति का पुट था। पर प्यार तो प्यार होता था जो सभी बेड़ियों को तोड़कर लांघ जाता था। जब से वैलेनटाइन डे आया तब से कुछ युगल जोड़े अपने प्यार को सार्वजतिक करने लग गये है। माना जाता है कि वैलेनटाइन एक पुलिंग और स्त्रीलिंग दोनो नाम है और एक उप नाम भी है। जो रोमन परिवार के नाम वैलेनटाइनस से लिया गया है। यानि लैटिन शब्द वैलेंस से लिया गया था। जिसका अर्थ है मजबूत और स्वस्थ।







