राष्ट्रीय कृषि योजनाओं पर भाकृअनुप-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान की हितधारकों के साथ एक दिवसीय सेमिनार संपन्न।
By – Prem Pancholi
भाकृअनुप-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान (ICAR–Indian Institute of Soil and Water Conservation, ICAR–IISWC), देहरादून ने किसानों के हित में प्रधानमंत्री की विशेष योजना को लेकर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया है। इस दौरान किसान हितधारकों को संस्थान ने सम्मानित किया है और किसानों के अनुभव भी बांटे गए है।
इस अवसर पर दिल्ली स्थित राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर (NASC) से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर में आयोजित इस तरह की सभी सेमिनार को ऑनलाइन के मार्फत सीधा संबोधित किया है। उन्होंने देशभर के किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी सरकार किसानों के हित में देश के 100 जिलों में विशेष किसान योजना संचालित करने जा रही है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि “पीएम धन धान्य कृषि योजना (PMDDKY)” का शुभारंभ आज से ही कर दिया है। कार्यक्रम का यह सीधा प्रसारण संस्थान के मुख्यालय देहरादून के साथ-साथ देशभर में स्थित इसके सभी अनुसंधान केन्द्रों में भी किया गया। जबकि कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने वक्तव्य में राष्ट्रीय दलहन मिशन, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना जैसी प्रमुख योजनाओं की उपलब्धियों का उल्लेख किया है।
इधर देहरादून स्थित ICAR–IISWC परिसर में कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने कहा कि 11 सालों में किसानों के बजट में बहुत बड़ा बदलाव आया है। अपने देश का कृषि बजट अब 11 गुना अधिक बढ़ गया है। श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की सोच ही है कि किसान ऋण योजना को किसान सम्मान निधि में बदलना बहुत बड़ी उपलब्धि है।
उन्होंने प्रधानमंत्री की पहलों को किसान सशक्तिकरण, सहकारी क्षेत्र को मजबूत बनाने और आत्मनिर्भर कृषि के लिए परिवर्तनकारी बताया। उन्होंने कहा कि पारंपरिक कृषि ज्ञान और आधुनिक विज्ञान को एकीकृत करके, किसान न केवल उत्पादक बन रहे हैं, बल्कि संसाधन प्रदाता भी बन रहे हैं, जिससे स्थानीय और राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो रहे हैं।
किसानों को संबोधित करते हुए, संस्थान के निदेशक डॉ. एम. मधु ने संगठित कृषि और विपणन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि किसानों को संसाधनों का कुशलतापूर्वक उपयोग करने और अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी), किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और महिला समूहों के माध्यम से संगठित होना चाहिए।
पादप विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. जे.एम.एस. तोमर ने मुख्य अतिथि और प्रतिभागियों का स्वागत किया और ‘प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना’ एवं ‘दलहन आत्मनिर्भरता मिशन’ की विस्तृत जानकारी दी। जबकि जल विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभागाध्यक्ष डॉ. आर.के. सिंह ने समापन भाषण दिया। किसानों के साथ बातचीत करते हुए, प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एम. मुरुगनंदम ने यह सुनिश्चित करने के महत्व पर बल दिया कि किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाए ताकि वे उनका समुचित लाभ उठा सकें। इस दौरान डॉ. जे.एम.एस. तोमर, डॉ. आर.के. सिंह, डॉ. चरण सिंह, डॉ. अंबरीश तिवारी, डॉ. राजेश कौशल, डॉ. विभा सिंघल, डॉ. एम. शंकर (प्रधान वैज्ञानिक), गिरीश भट्ट (सीएओ, एसजी), राकेश कुमार, मंगल सिंह चौहान, अमित चौहान, अनिल चौहान, सुरेश कुमार, प्रवीण तोमर, एच एस भाटिया (तकनीकी अधिकारी), लवल (प्र.अ.), संजय पंत (एएओ) आदि प्रगतिशील किसानों तथा कृषि व मृदा वैज्ञानिकों ने किसानों को संबोधित किया है।
भाकृअनुप-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, देहरादून ने प्रगतिशील किसानों और मीडिया प्रतिनिधियों के साथ एक संवाद का भी आयोजन किया, जिसमें कृषि स्थिरता, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और आजीविका सशक्तिकरण पर नई शुरू की गई योजनाओं के प्रभाव पर चर्चा की गई। प्रगतिशील किसानों और प्रेस प्रतिनिधियों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। संस्थान ने किसानों के लिए उपयोगी अपनी अनुसंधान सुविधाओं और तकनीकों का भी प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में 98 महिला किसानों सहित कुल 426 प्रगतिशील किसान प्रतिभागियों ने भाग लिया।
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