तिलवाड़ी सहसपुर में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का भव्य आयोजन, महिला समूहों ने लोकगीतों पर जमकर किया नृत्य।
By – Prem Pancholi
देहरादून जनपद के सहसपुर ब्लॉक अंतर्गत तिलवाड़ी स्थित काया लर्निंग सेंटर में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस बड़े ही उत्साह और गरिमामय के साथ मनाया गया। इस अवसर पर नारी शक्ति समूह से जुड़ी विभिन्न गांवों की महिलाओं ने बड़ी संख्या में भाग लेकर कार्यक्रम को यादगार बना दिया। पूरे आयोजन में महिलाओं की भागीदारी, लोक संस्कृति की झलक और सामाजिक सरोकारों का सुंदर संगम देखने को मिला।
कार्यक्रम का आयोजन नारी शक्ति समूह और काया लर्निंग सेंटर तिलवाड़ी के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इसमें भाववाला, भगवानपुर, नौगांव सहित आसपास के कई गांवों से महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्याएं पहुंचीं। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं ने कार्यक्रम में लोक संस्कृति की अनूठी छटा बिखेरी।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला पंचायत देहरादून की अध्यक्ष उपस्थित रहीं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस केवल एक उत्सव नहीं बल्कि महिलाओं के संघर्ष, अधिकार और उनकी उपलब्धियों को याद करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। शिक्षा, राजनीति, समाज सेवा और प्रशासन जैसे क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है, जो समाज के लिए सकारात्मक संकेत है। उन्होंने महिला समूहों के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि स्वयं सहायता समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहे हैं।
कार्यक्रम में ब्लॉक प्रमुख सहसपुर भी विशेष रूप से मौजूद रहे। उन्होंने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि समाज के विकास में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि महिलाएं सशक्त होंगी तो परिवार, गांव और पूरा समाज मजबूत होगा। उन्होंने महिला समूहों को सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर संस्कृति विभाग उत्तराखंड के कलाकारों ने भी शानदार प्रस्तुति देकर कार्यक्रम को और भी जीवंत बना दिया। लोक गायिका दुर्गा सागर के नेतृत्व में कलाकारों ने पहाड़ी लोकगीतों की ऐसी प्रस्तुति दी कि कार्यक्रम में मौजूद महिलाएं खुद को थिरकने से रोक नहीं सकीं। जबकि अंकित सेमवाल के नेतृत्व में राग पहाड़ समिति लखवाड़ और मुकेश घलवान के नेतृत्व में गढ़ संस्कृति संरक्षण संस्था उत्तरकाशी तथा लोक गायक राम कौशल जैसे मंझे हुए लोक कलाकारों ने भी अपनी लोक प्रस्तुतियों से भरे पंडाल में समां बांध दिया। विकास बड़ेडी के संगीत संयोजन में गढ़वाली, कुमाऊनी और जौनसारी लोकधुनों पर महिलाओं ने जमकर नृत्य किया और पूरे परिसर में उत्सव का माहौल बन गया।
कार्यक्रम में स्थानीय विद्यालयों के बच्चों ने भी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। बच्चों ने देशभक्ति गीतों, लोकनृत्य और महिला सशक्तिकरण से जुड़े नाटकों के माध्यम से दर्शकों का मन मोह लिया। बच्चों की प्रस्तुति को उपस्थित लोगों ने खूब सराहा और उनका उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम का सफल संचालन क्षेत्र पंचायत सदस्य सुरेशी पंवार ने किया। उन्होंने पूरे कार्यक्रम को सुव्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाते हुए मंच संचालन की जिम्मेदारी बखूबी निभाई। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों और क्षमताओं को पहचानने की जरूरत है। जब महिलाएं संगठित होकर आगे बढ़ती हैं तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन निश्चित रूप से आता है।
काया लर्निंग सेंटर के संतोष पासी ने हमे बताया कि केंद्र का उद्देश्य केवल शिक्षा देना ही नहीं बल्कि समाज में जागरूकता फैलाना भी है। उन्होंने बताया कि काया लर्निंग सेंटर लगातार महिलाओं और बच्चों के विकास के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करता रहा है। महिला दिवस का यह कार्यक्रम भी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
कार्यक्रम के दौरान नारी शक्ति समूह और काया लर्निंग सेंटर की ओर से विभिन्न गांवों से आए उत्कृष्ट महिला स्वयं सहायता समूहों को सम्मानित भी किया गया। इन समूहों को उनके सामाजिक कार्यों, आर्थिक गतिविधियों और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयासों के लिए सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करने वाली महिलाओं ने कहा कि यह सम्मान उनके लिए प्रेरणा का स्रोत है और वे भविष्य में भी समाज के लिए बेहतर कार्य करने का प्रयास करती रहेंगी।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने महिला दिवस के महत्व पर अपने विचार रखते हुए कहा कि आज की महिला हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही है, लेकिन अभी भी कई सामाजिक चुनौतियां मौजूद हैं। इन चुनौतियों का सामना करने के लिए महिलाओं को शिक्षा, आत्मविश्वास और संगठन की शक्ति को अपनाना होगा। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल महिलाओं का ही नहीं बल्कि पूरे समाज का मुद्दा है। जब महिलाएं मजबूत होंगी तभी समाज और राष्ट्र भी मजबूत होगा।
इस मौके पर वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता पुष्पलता रावत, चंद्रकांता, मंजु कुमाई, आशिता डोभाल, तथा क्षेत्र के कई जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं मौजूद रहीं। सभी ने मिलकर महिला दिवस को उत्सव के रूप में मनाया और महिला सशक्तिकरण के संकल्प को दोहराया।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों और अतिथियों का आभार व्यक्त किया गया। पूरे आयोजन ने यह संदेश दिया कि जब महिलाएं एकजुट होकर अपनी शक्ति को पहचानती हैं, तो वे समाज में बड़े बदलाव की आधारशिला रख सकती हैं। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का यह आयोजन महिलाओं के उत्साह, उनकी प्रतिभा और उनके सामूहिक संकल्प का प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया है।







