Friday, March 6, 2026
Home lifestyle जलस्रोतों का सिमटना दून घाटी के लिए चुनौती

जलस्रोतों का सिमटना दून घाटी के लिए चुनौती

जलस्रोतों का सिमटना दून घाटी के लिए चुनौती

……………………

दून पुस्तकालय में खबरपात कार्यक्रम में विकास और देहरादून के सिमरटते जल संसाधनों ’ पर चर्चा

……………………..

तीव्र विकास प्रक्रिया ने देहरादून के पर्यावरण को किस कदर नुकसान पहुंचाया है इस बात पर गहन चर्चा दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र में खबरपात कार्यक्रम में हुई। मानव गतिविधियों व तीव्र विकास प्रक्रिया से उपजे कारणों से ज्यादा नुकसान यहां के जलस्रोतों का हुआ है। दून की धरती का भूमिगत जलस्तर लगातार गिरता जा रहा है और यह भविष्य के लिए एक बड़ा खतरा है। ‘विकास के भेंट चढ़े देहरादून के जलाशय’ विषय पर चर्चा पर मुख्य प्रस्तुति जन विज्ञान के विजय भट्ट ने दी। वे पिछले कई सालों से देहरादून के स्थानीय पर्यावरण व पारिस्थितिकी पर जमीनी काम कर रहे हैं। इस कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार सामाजिक कार्यकर्ता त्रिलोचन भट्ट ने किया।

अपने पीपीटी प्रजेंटेशन में विजय भट्ट ने कहा कि देहरादून किसी जमाने में नहरों, जल स्रोतों और जलकुण्डों,छोटी जल धाराओं का शहर था। चारों तरफ जंगल होने से यहां की आबोहवा स्वास्थ्यप्रद होती थी। गर्मियों में शीतल हवा चलती थी, देशभर के लोग स्वास्थ्य लाभ के लिए गर्मियों में देहरादून आते थे। लेकिन हाल के सालों में आर्थिक लाभ की लालसा व तीव्र विकास ने सब कुछ खत्म जैसा कर दिया है। इस विकास ने देहरादून के जलस्रोतों को एक तरह से लील लिया है। इसका असर भूमिगत जल पर पड़ रहा है और देहरादून जल संकट की समस्या की ओर बढ़ रहा है।

ऐतिहासिक तथ्यों का जिक्र करते हुए विजय भट्ट ने कहा कि नजीबुद्दौला के शासनकाल में दून घाटी में बड़े पैमाने पर कुएं खोदे गये थे और आम के पेड़ लगाये गये थे। अंग्रेजों के दौर में भी कुएं खोदे गये और नहरें बनाई गई। अंग्रेज अधिकारी मिस्टर सोर द्वार बनाया गया एक कुआं कचहरी परिसर में आज भी मौजूद है। उन्होंने कहा कि देहरादून में जहां जोहड़ (जलकुण्ड ) थे वहां अब या तो बड़ी-बड़ी भवन हैं या पार्क बनाये जा रहे हैं। जहां नहरें थी वहां सड़कों का जाल बिछ गया हैं. एलीवेटेड रोड व अन्य निर्माणों से प्राकृतिक जंगलों का विनाश हो रहा है। जो कुछ जल संसाधन अब भी बचे हुए हैं, वे भी जंगलों के विनाश से खत्म होेने की कगार पर हैं।

उन्होंने याद दिलाया कि दून में कई जगहों के नाम के साथ पानी जुड़ा हुआ है। मसलन नालापानी, भोपाल पानी, झड़ीपानी, खट्टा पानी आदि। यह इस बात का प्रतीक है कि दून एक तरह से पानी की बहुलता वाला शहर था और यही पानी इसकी आबोहवा और भूमिगत जलस्तर को सतत रूप से बनाये रखती थी। पर चिंता इस बात की है कि आज यहसब खत्म हो रहा है।

संचालन करते हुए त्रिलोचन भट्ट ने कहा कि सरकारी नीतियां बनाते समय पर्यावरणीय पक्ष को गहनता से देखना बहुत जरूरी बात है। पर्यावरण की अनदेखी होना हम सबके लिए चिन्ताजनक बात है। दून का तापमान साल दर साल बढ़ रहा है। तापमान 43 डिग्री तक पहुंच जाता है। जंगलों की रक्षा के लिए लोग सड़कों पर उतरती है पर आमतौर पर इस तरह के आंदोलनों के अनदेखी की जाती है। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने देहरादून के पर्यावरण को लेकर कई सवाल भी पूछे।

इस अवसर पर पर्यावरण विद डॉ. रवि चोपड़ा, हरिओम, देवेन्द्र कांडपाल,चन्द्रशेखर तिवारी, डॉ. डी. के. पाण्डे, आलोक सरीन, कमलेश के. खन्तवाल, हिमांशु अरोड़ा, डॉ. वी. के डोभाल, सुंदर विष्ट आदि मौजूद थे।

RELATED ARTICLES

धराली आपदा : वैज्ञानिकों ने किया खुलासा, एक बड़े ग्लेशियर के टुकड़े के टूटने से हुई तबाही।

न बादल फटा, न ग्लेशियल झील… वैज्ञानिक अध्ययन में खुलासा: श्रीकांता ग्लेशियर से बर्फ का बड़ा हिस्सा गिरने से हुआ था धराली हादसा। ....................... 5 अगस्त...

2017 तक स्टार्टअप की संख्या थी शून्य। वर्ष 2025 में बढ़कर हुई 1750

- 2024-25 में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) ₹ 3,81,889 करोड़ का रहा - 2021-22 के मुकाबले जीएसडीपी में आया डेढ़ गुना से ज्यादा...

एक साधारण व्यक्ति में असाधारण व्यक्तित्व की जीवन्त जीवन जीने की शब्द-यात्रा है – BARLOWGANJ AND BEYOND

- साधारण व्यक्ति का असाधारण व्यक्तित्व : प्रो. बी. के. जोशी। - प्रो. बी. के. जोशी जी के जीवनीय आत्म-संस्मरणों पर केन्द्रित पुस्तक 'BARLOWGANJ...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

धराली आपदा : वैज्ञानिकों ने किया खुलासा, एक बड़े ग्लेशियर के टुकड़े के टूटने से हुई तबाही।

न बादल फटा, न ग्लेशियल झील… वैज्ञानिक अध्ययन में खुलासा: श्रीकांता ग्लेशियर से बर्फ का बड़ा हिस्सा गिरने से हुआ था धराली हादसा। ....................... 5 अगस्त...

2017 तक स्टार्टअप की संख्या थी शून्य। वर्ष 2025 में बढ़कर हुई 1750

- 2024-25 में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) ₹ 3,81,889 करोड़ का रहा - 2021-22 के मुकाबले जीएसडीपी में आया डेढ़ गुना से ज्यादा...

एक साधारण व्यक्ति में असाधारण व्यक्तित्व की जीवन्त जीवन जीने की शब्द-यात्रा है – BARLOWGANJ AND BEYOND

- साधारण व्यक्ति का असाधारण व्यक्तित्व : प्रो. बी. के. जोशी। - प्रो. बी. के. जोशी जी के जीवनीय आत्म-संस्मरणों पर केन्द्रित पुस्तक 'BARLOWGANJ...

विकास के नए आयाम स्थापित करती ग्राम पंचायत भगवन्तपुर की ग्राम प्रधान

विकास के नए आयाम स्थापित करती ग्राम पंचायत भगवन्तपुर की ग्राम प्रधान   By - Harishankar saini   कभी गड्ढों, कीचड़ और टूटे किनारों से जूझती सलान गाँव...

होली विशेषांक : खोलो किवाड़ चलो मठ भीतर।

- खोलो किवाड़ चलो मठ भीतर। - दून पुस्तकालय में संगीताजंलि की शानदार होली प्रस्तुति दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के एम्फीथियेटर में आज संगीतांजली शास्त्रीय...

बर्लोगंज एंड बियोंड पुस्तक का लोकार्पण

पुस्तक : बर्लोगंज एंड बियोंड   By - Dr. Yogesh dhasmana   देश के प्रसिद्ध शिक्षाविद प्रो बी के जोशी के संस्मरणों पर आधारित पुस्तक बर्लोगंज एंड बियोंड...

विज्ञान दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चन्देली में।

विज्ञान दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चन्देली में। By - Neeraj Uttarakhandi पुरोला विकासखंड के अंतर्गत राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चन्देली में राष्ट्रीय...

स्पैक्स संस्था ने होली के प्राकृतिक रंगों पर दून पुस्तकालय में बच्चों को दी जानकारी।

स्पैक्स संस्था ने होली के प्राकृतिक रंगों पर दून पुस्तकालय में बच्चों को दी जानकारी। .......... दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में ‘स्पेक्स’ संस्था के सहयोग...

जनगणना की पूरी तैयारी, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होगी जनगणना

जनगणना-2027 की डिजिटल तैयारियां शुरू, देहरादून में 25-27 फरवरी तक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू चार्ज अधिकारियों से लेकर सेन्सस क्लर्क तक, सभी ले रहे डिजिटल...

एक स्वस्थ परंपरा है स्कूल ऑफ थॉट्स – प्रो० पंवार

स्कूल ऑफ थॉट्स, श्रीनगर (गढ़वाल), भारतीय-हिमालयी ज्ञान परंपरा,  मुख्य वक्ता- प्रो. मोहन पंवार। भारतीय : हिमालय ज्ञान परंपरा पर अपनी बात शुरू करते हुए मुख्य...