उत्तराखंड मे रचना बुटोला के बाद सुरेश गड़िया की गूँज !
By Gajendra Rawat
उत्तराखंड भारतीय जनता पार्टी की राजनीति में चौथे साल में भाजपा की भट्टी मे कुछ ऐसा पक रहा है जो न सिर्फ सुनाई दे रहा है बल्कि साफ़-साफ़ दिखने भी लगा है।
प्रचंड बहुमत से पौड़ी में जिला पंचायत अध्यक्ष बनने वाली रचना बुटोला के बारे में बताया जा रहा है कि वह अध्यक्ष बनने के बाद “क्वॉरेंटाइन ” में है,यह क्वॉरेंटाइन कोरोना वाला नहीं बल्कि राजनीतिक बताया जा रहा है.
पूरे प्रदेश में रचना बुटोला को छोड़कर जीतने वाले सभी जिला पंचायत के अध्यक्ष ढोलबाजों के साथ अपने नेताओं कार्यकर्ताओं के साथ जश्न में शामिल हुए पटाखे फोड़े गये होली खेली गईं. पौड़ी के एक खास खबरी का कहना है कि रचना बुटोला जीत का प्रमाण पत्र लेने भी नहीं गईं. विधायकों, सांसद,मंत्रियों के रहते किसी भरत सिंह रावत को भेजा गया.
इस घोर कलयुग में भरत के हाथों में यह जीत का प्रमाण पत्र कई कहानी लेकर आया है. जीत के बाद इस अंदाज मे क्वॉरेंटाइन होने की यह घटना सामान्य नहीं है बल्कि यह दर्शाती है कि जिस पौड़ी जनपद में सबसे ज्यादा मुख्यमंत्री दिए वहां कुछ ऐसा चल रहा है जो अभी सिर्फ कुछ ही लोगों को मालूम है.किसी को किसी से डर लग रहा है.रचना बुटोला कब कोरंटाइन से बाहर आएँगी इसका भाजपाइयों को इंतजार है. राजनीति का ये रचना बुटोला मॉडल आने वाले सालों मे 50% महिला आरक्षण के लिये असल चुनौती बनने वाला है.
रचना बुटोला की जीत किस किस के लिये सरदर्द बन गईं है ये तो महेन्द्र भट्ट ही बता सकते हैँ कि भट्टी की मे कौन लकड़ी डाल के आंच तेज कर रहा है.
भाजपा की अंदरुनी राजनीति का दूसरा प्रकरण
गैरसैण मे सामने आया है.गैरसैण मे हांडी मे चढ़ी पतीले मे खिचड़ी मे नमक तेल मिर्च मसाला डाल दिया गया है, लेकिन कोई बोल नहीं पा रहा है. गैरसैण विधानसभा सत्र के दौरान लगाए गए चौपाल कार्यक्रम में भाजपा के क्षेत्रीय विधायक अनिल नौटियाल की बजाय जब कपकोट के विधायक सुरेश गढ़िया ने प्रभारी मंत्री की बजाय जिला अधिकारी से लेकर तमाम अधिकारियों के बीच चौपाल लगाई dm को तमाम आदेश दिए तो स्पष्ट हो गया कि गड़िया के माध्यम से गैरसैण से भाजपा की ओर से बड़ा संदेश दिया जा चुका है.
जिस अंदाज में सुरेश गढ़िया ने यह वीडियो पोस्ट किया है वह यह बताने के लिए पर्याप्त है कि भाजपा का ये “गड़िया मॉडल” आने वाले दिनों मे अपना असर जरूर दिखायेगा.मंत्रिमंडल की पांच मे से एक सीट पर तो सुरेश गड़िया ने दावेदारी पुख्ता कर ली है.
रचना बुटोला सुरेश गढ़िया दोनों प्रकरण पर अपने को मीडिया करने वाले लोग मौन है या मीडिया मालिकों ने हमेशा की तरह उन्हें चुपचाप रहने का आदेश दे रखा है.
@लेखक राजनीतिक विश्लेषक, वरिष्ठ पत्रकार है







