Pipalkoti : पीपलकोटी की यादों के बहाने – जंगली बेर को याद किया। पढ़े पर्यावरण कार्यकर्ता और वरिष्ठ पत्रकार जे०पी० मैठाणी की यह रिपोर्ट
रूप चन्द जी देहरादून में साइकिल पर स्कूलों के बाहर जंगली बेर बेचते है , आजकल मालदेवता वाले जंगलों से बेर लाते हैं और 200 रुपये किलो बेच देते हैं ! आज मैं अभी आरव को स्कूल से लेने जा रहा था तो ONGC चौक के पास काली मंदिर पर उनको उत्सुकतावश उनको रोक लिया !
मैंने सोचाये बेर बहुत सालों से खाई नहीं – पहले के बचपन केरे यादों में पीपलकोटी के आस पास – जैसे – रांगल डीप , पिंगल पाट्टा , सामने होम कुंडी, ऊपर -ह्यांल कनाल, गड़ी धार में सडकों के किनारे भी बहुत बेर होती थी अब वहाँ होटल आदि बन गए हैं !
बेर के कांटे बहुत तेज, नुकीले और मुड़े हुए होते हैं तेजी से चुभते हैं लेकिन उनका दर्द बहुत देर तक नहीं रहता है जैसे -माल्टा, गिवें और म्येलु के कांटे दर्द करते हैं वैसे खतरनाक बेर के कांटे नहीं होते !
जंगली बेर को हम ब्योर कहते और थोड़ी कम पकी हुई पीली बेर जीभ में बहुत तीखी लगती . इंटरनेट पर मिली जानकारी के अनुसार – जंगली बेर ज़िज़िफस वंश का एक काँटेदार झाड़ी है , जिसके फल खाने योग्य होते हैं, जैतून के आकार के और बनावट व स्वाद में सेब जैसे। ज़िज़िफस की कई प्रजातियाँ हैं, और इनमें से, ज़िज़िफस जुजुबा, जिसे लाल खजूर या चीनी खजूर भी कहा जाता है, मूल रूप से चीन में पाया जाता है, और ज़िज़िफस मॉरिटानिया, जो भारत में पाया जाता है, पर सबसे अधिक अध्ययन किया गया है।
जंगली बेर के फल, बीज और पत्ती का उपयोग पारंपरिक चीनी और भारतीय चिकित्सा प्रणालियों में अनिद्रा , चिंता , जठरांत्र और अन्य बीमारियों के उपचार में वर्षों से किया जाता रहा है , हालांकि, अधिकांश उपयोगों का समर्थन करने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान का अभाव है।
जंगली बेर के फल में सूजनरोधी, एंटीऑक्सीडेंट, कैंसररोधी, जठरांत्र संबंधी सुरक्षा, शामक और तंत्रिका-सुरक्षात्मक गुण पाए जाते हैं। बेर के औषधीय गुण इसमें मौजूद विभिन्न पोषक तत्वों, जैसे विटामिन , फ्लेवोनोइड्स, अमीनो एसिड, कार्बनिक अम्ल और पॉलीसैकेराइड्स, से प्राप्त होते हैं। जंगली बेर रक्त शर्करा को भी कम करता है।, ट्राइग्लिसराइड्स, और कोलेस्ट्रॉल का स्तर.
जंगली बेर के फल को कच्चा खाया जाता है और इसका उपयोग जैम, प्रिज़र्व और अन्य उत्पाद बनाने में किया जाता है। फल, बीज के अर्क, और पत्तियों, छाल और तने के चूर्ण का पारंपरिक रूप से औषधीय प्रयोजनों के लिए उपयोग किया जाता रहा है।
ये आज बेर की बात हुई और रूप चन्द जी से भी मुलाकात- बेर खाते हुए पीपलकोटी की याद ताजा की गयी !
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