Friday, March 6, 2026
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विद्यासागर नौटियाल सम्मान 2025 प्रभात ध्यानी को।

विद्यासागर नौटियाल सम्मान 2025 प्रभात ध्यानी को।

By – Prem Pancholi

सेव हिमालय मूवमेंट ट्रस्ट के तत्वाधान में प्रख्यात कथाकार विद्यासागर नौटियाल की स्मृति में एक सम्मान समारोह कार्यक्रम आयोजित किया गया है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पद्मश्री डा० प्रीतम भरतवाण ने कहा कि विद्यासागर नौटियाल को वे संध्या बंधनीय आदरणीय नौटियाल मानते है। इसलिए कि विद्यासागर नौटियाल हमेशा अंतिम व्यक्ति की आवाज थी। आज भी उनकी कलम की महत्ति जरूरत है। उनके नाम पर दिया जाने वाला यह सम्मान आगे भी समाज को निरंतर दिशा देने का कार्य करेगा। उन्होंने कहा कि विद्यासागर नौटियाल वर्तमान है। वर्तमान जो होता है वही जीवित होता है। वे अपने को सौभाग्यशाली मानते है कि इस कार्यक्रम के वे सहभागी बने। उन्होंने कहा कि विद्यासागर धरा पर जीव निर्जीव को साक्षात् देखने वाले व्यक्तित्व रहे है। उनके नाम से दिया जाने वाला यह सम्मान भविष्य की दिशा तय करेगा। इस दौरान प्रभात ध्यानी की भतीजी दीपिका घिल्डियाल ने प्रभात ध्यानी के संघर्षों की कहानी बयान की है। वरिष्ठ पत्रकार व आंदोलनकारी पीसी तिवारी ने कहा कि प्रभात ध्यानी भी विद्यासागर की परम्परा को आगे बढ़ाने वाले संघर्ष के साथी है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कार्यक्रम के अध्यक्ष वरिष्ठ जनकवि बल्ली सिंह चीमा ने कहा कि विद्यासागर नौटियाल की परम्परा रही है कि वह हमेशा समाज के लिए जीते रहे है। विद्यासागर ने अपने साहित्य में जातिवाद, छुआ छूत जैसे विडंबनाओं पर अपनी कलम चलाई है जो आगे चलकर अंतराष्ट्रीय आवाज बनी है। यही आवाज है, इसे आज भी जिंदा रखना होगा। इस अवसर पर विद्यासागर नौटियाल की बेटी श्रीमती अंतरिक्षा ने अपने पिता के कई संस्मरण सुनाए है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार राजीव नयन बहुगुणा ने कहा कि कथाकार विद्यासागर नौटियाल ने हमेशा अंधविश्वास को नकारा है। उनके साहित्य में हमेशा जीवंतता रही है, सांस्कृतिक पक्ष रहे है। श्री बहुगुणा ने कहा कि इसलिए इस सम्मान समारोह के मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ० प्रीतम भरतवाण है। उन्होंने कहा कि विद्यासागर नौटियाल ने अपने शब्दों से समाज में समरसता का कार्य किया है। इसी तरह श्री भरतवाण भी अपने स्वरों से कर रहे है।

कहा कि विद्यासागर नौटियाल ने अपने साहित्य में आंदोलन की अगवाई की है, तो समाज में नवेंशन पैदा करने की जिज्ञासा पैदा की है। राजीव नयन बहुगुणा ने कहा कि विद्यासागर नौटियाल ने 13 वर्ष की उम्र में भी संघर्षी जीवन आरंभ कर दिया था। यानी तत्कालीन राजा का विरोध करना। वे स्वाभिमानी साहित्यकार रहे है तो एक स्वाभिमानी राजनेता भी रहे है। विद्यासागर नौटियाल ने प्रजामण्डल में कार्य किया और वे किशोर अवस्था में ही वामपंथी विचार से जुड़ गए। बनारस विश्वविद्यालय में भी विद्यासागर ने छात्र नेता के रूप में एक विशेष छबि बनाई। तत्काल उनके भाषणों पर तत्काल की सरकार उन पर राजनीतिक षडयंत्र के तहत गुंडा एक्ट में मुकदमा दर्ज करती है। विद्यासागर नौटियाल का ही जज्बा रहा है कि जब तत्काल की कांग्रेस को समस्या आने लगी तो उन दिनों कांग्रेस सत्ता में थी, इसलिए उन पर चीन का एजेंट का भी झूठा आरोप लगाया गया। सामाजिक कार्यों को करते करते वे कई बार जेल गए। विद्यासागर नौटियाल ने कभी भी राजनीतिक और अपने साहित्य को व्यवसाय का रूप नहीं दिया। अपनी रोजी रोटी के लिए वे वकालत करते थे। यही वजह है कि उनका साहित्य हर समाज का साहित्य बना।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्य आंदोलनकारी अनिल स्वामी ने कहा कि विद्यासागर ने हमेशा साहित्य और राजनीति में सकारात्मक का कार्य किया है। श्री स्वामी ने कहा कि इसी तरह प्रभात ध्यानी ही है। श्री ध्यानी राज्य आंदोलन से पहले और अब भी समाज के अंतिम व्यक्ति की लड़ाई लड़ रहे है। फलस्वरूप इसके उन्हें विद्यासागर सम्मान 2025 से नवाजा गया है।
इस अवसर पर सम्मानित हुए पत्रकार व राज्य आंदोलनकारी प्रभात ध्यानी ने कहा कि वे गौरवान्वित महसूस कर रहे है। उन्हें जो सम्मान दिया गया है यह उनका सम्मान नहीं बल्कि उन सभी संघर्ष करने वाले साथियों का सम्मान है। उन्होंने कहा कि विद्यासागर नौटियाल ने राजशाही के विरोध आंदोलन किया तो वहीं छात्र जीवन में छात्र हितों से लेकर देश की खराब व्यवस्थाओं के खिलाफ आंदोलित रहे है। उन्होंने कहा कि वे विद्यासागर की विरासत को आगे बढ़ाएंगे। इसलिए की वह विद्यासागर के विरासत के ही एक छोटे से कार्यकर्ता है। श्री ध्यानी ने कहा कि राज्य की लड़ाई जिस आकांक्षाओं के साथ लड़ी थी उसके विपरीत हमारी व्यवस्थाएं जा रही है। कहा कि यह राज्य के लिए बहुत दुखद है।
राज्य आंदोलनकारी जयदीप सकलानी, वरिष्ठ पत्रकार चारु तिवारी, सतीश धौलाखंडी, त्रिलोचन भट्ट ने “बैठकों में हल टंगे है बल हमारे गांव में, बस पदानो के मजे है बल हमारे गांव में” गीत गाकर आज की व्यवस्थाओ पर तंज कसे।

मंच पर –

मुख्यातिथि पद्मश्री प्रीतम भरतवाण, श्रीमती अंतरिक्षा नौटियाल, प्रख्यात कवि व लेखक बल्ली सिंह चीमा।

सम्मान –

विद्यासागर सम्मान 2025 पत्रकार व राज्य आंदोलनकारी प्रभात ध्यानी को दिया गया।
……………………..

इस अवसर पर समीर रतूड़ी, श्रीमती अंतरिक्षा नौटियाल, पीसी तिवारी, डॉ० अरविंद दरमोड़ा, पत्रकार अरुण शर्मा, राकेश बिजलवान, गणेश काला, पूनम कैंतुरा, पर्यावरण कार्यकर्ता विनोद जुगरान, राज्य आंदोलकारी रविन्द्र जुगरान, कम्युनिस्ट समर भंडारी, शिक्षिका उमा भट्ट सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे है। जबकि कार्यक्रम का संचालन समीर रतूड़ी ने किया है।

प्रभात ध्यानी –

पत्रकारिता एवं राज्य आंदोलनकारी रहे है। साथ साथ पत्रकारों पर होने वाले मुकदमों को कानूनी सहयोग देते रहे है। वे लगातार राज्यहित में लड़ते रहते है और समाज के लिए जीना ही श्री ध्यानी की फितरत है।

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