
देहरादून में अवैध खनन के कारोबार से सरकार को करोड़ों की चपत
– बिना लाइसेंस और अनुमति के चल रही हैं बिल्डिंग मटिरियल की दुकानें
– आरटीआई एक्टिविस्ट विकेश सिंह नेगी का बड़ा खुलासा, बड़े पैमाने पर हो रही राजस्व की चोरी
देहरादून में रेत-बजरी और रोड़ी की दुकानें बिना लाइसेंस और बिना अनुमति के ही चल रही हैं। देहरादून के बाहरी इलाकों में कुछ गिने-चुने लोगों ने ही बिल्डिंग मटिरियल सप्लाई के लिए खनन विभाग से अनुमति ली है। बाकी सब अवैध चल रहे हैं। यह खुलासा किया है आरटीआई एक्टिविस्ट और अधिवक्ता विकेश नेगी ने। श्री नेगी ने कहा कि उन्हे सूचना के अधिकार से मिली जानकारी के अनुसार देहरादून शहर में बिल्डिंग मटिरियल का कारोबार सर्वाधिक कम्पनीयां और लोग बिना लाइसेंस के चला रहे हैं। जिस कारण सरकार को राजस्व का भारी घाटा उठाना पड़ रहा है।
आरटीआई कार्यकर्ता व अधिवक्ता विकेश नेगी ने इस आशय की जानकारी जिला खनन अधिकारी देहरादून से बिल्डिंग मटिरियल सप्लायर की जानकारी मांगी है। इस जानकारी ने चौंकाने वाले तथ्य सामने लाये है। बताया गया कि देहरादून शहर में चल रही अधिकांश दुकानों के पास कोई अनुमति पत्र नहीं है। इसके बावजूद भी वे बिल्डिंग मैटिरियल को स्टोर कर रख रहे हैं। सिर्फ शिमला बाईपास के कुछ सप्लायरों ने अनुमति ली है शेष अधिकतर सप्लायर बिना अनुमति के ही अवैध ढंग से कारोबार कर रहे हैं। जबकि जिला खनन अधिकारी ने अवैध भंडारण को लेकर जिलाधिकारी से भी कुछ कारोबारियों को लेकर शिकायत की है मगर अब तक अवैध कारोबारीयों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है।
अधिवक्ता और आरटीआई कार्यकर्ता विकेश नेगी ने बताया कि उप खनिज नियमावली के तहत उपखनिजों का भंडारण धार्मिक स्थल, अस्पताल और शैक्षणिक स्थल से 300 मीटर की दूरी पर होना चाहिए। यह मानक पर्वतीय क्षेत्रों और शहरी क्षेत्रों के लिए कुछ अलग हैं। इसके बावजूद शहर में कई जगहों पर नियमों को ताक पर रख कर उपखनिज का भंडारण किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि उपखनिज का भंडारण के लिए जिला खनिज अधिकारी से अनुमति जरूरी है। यह अनुमति भी निश्चित अवधि के लिए दी जाती है। इस कारण राजस्व की चोरी हो रही है। श्री नेगी ने खनन विभाग और जिलाधिकारी से अपील की है कि अवैध कारोबारियों पर कार्रवाई की जाए, ताकि कर, जीएसटी और कर चोरी को रोका जा सके।







