Saturday, October 24, 2026
Home lifestyle किताब कौतिक : हर साल होना चाहिए यह पुस्तक मेला प्रो० जोशी

किताब कौतिक : हर साल होना चाहिए यह पुस्तक मेला प्रो० जोशी

By – Prem Pancholi/ Manoj panday

 

– 16वें ‘देहरादून किताब कौतिक’ का भव्य शुभारंभ: दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में सजी पुस्तकों की महफिल*

– क्रिएटिव उत्तराखंड के तत्वावधान में 23 से 25 अक्टूबर 2026 तक दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में सजा किताब मेला

– प्रो. बी.के. जोशी, पद्मश्री बसंती बिष्ट और पर्यावरणविद् पद्मश्री कल्याण सिंह रावत ने दीप प्रज्वलित कर किया मेले का उद्घाटन

– किताबों में असीम आकर्षण होता है। किताबें हमारी जानकारी का दायरा बढ़ाती हैं और आज समाज में उनकी जो पहचान है, वह भी किताबों के माध्यम से ही संभव हुई है: पद्मश्री बसंती बिष्ट 

– किताब कौतिक का उद्देश्य केवल 80 हजार पुस्तकें देहरादून लाना नहीं, बल्कि युवाओं के मन में जिज्ञासा, रचनात्मकता और पढ़ने की आदत का बीज बोना है: हेम पंत

 

शुक्रवार को पहाड़ों की संस्कृति, साहित्य और युवाओं में पठन-पाठन की आदत को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से संस्था क्रिएटिव उत्तराखंड के तत्वावधान में 23 से 25 अक्टूबर 2026 तक दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में 16वें देहरादून किताब कौतिक पुस्तक मेले का भव्य शुभारंभ हो गया है। इस वर्ष मेले की मुख्य थीम आओ, दोस्ती करें किताबों से रखी गई है।

 

मेले में देश भर के 75 प्रकाशकों की लगभग 80,000 पुस्तकें पाठकों के लिए उपलब्ध हैं। साहित्यिक परिचर्चाएं, करियर काउंसलिंग, विज्ञान कोना, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी गतिविधियां, नेचर वॉक और साहसिक खेल। आमंत्रित कलाकारों की सांस्कृतिक संध्याएं, हस्तशिल्प स्टॉल, पपेट निर्माण, भाषा एवं संस्कृति तथा वॉल पेंटिंग कार्यशालाएं। 14 से 18 अक्टूबर तक आयोजित पांच दिवसीय ‘बालप्रहरी बाल लेखन कार्यशाला’ में स्कूली बच्चों द्वारा तैयार की गई हस्तलिखित पुस्तकों का विशेष स्टॉल भी प्रदर्शित किया गया है।

 

किताब कौतिक का विधिवत उद्घाटन दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के संस्थापक प्रो. बी.के. जोशी, प्रख्यात लोक गायिका पद्मश्री बसंती बिष्ट और पर्यावरणविद् पद्मश्री कल्याण सिंह रावत ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।

 

किताब कौतिक अभियान के संयोजक हेम पंत ने कहा कि किताब कौतिक का उद्देश्य केवल 80 हजार पुस्तकें देहरादून लाना नहीं, बल्कि युवाओं के मन में जिज्ञासा, रचनात्मकता और पढ़ने की आदत का बीज बोना है।

 

प्रो. बी.के. जोशी ने कहा कि ‘किताब कौतिक’ एक बेहद सराहनीय विचार है और यदि आयोजक चाहें तो इसे हर वर्ष नियमित रूप से आयोजित किया जाना चाहिए।

 

पद्मश्री कल्याण सिंह रावत ने कहा कि “किताबें जिंदगी को सुव्यवस्थित करती हैं और इनसे सकारात्मक ज्ञान बढ़ता है।”* उन्होंने हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते प्राकृतिक खतरों पर चिंता व्यक्त करते हुए इनसे बचाव के प्रति सचेत किया।

 

पद्मश्री बसंती बिष्ट ने कहा कि किताबों में असीम आकर्षण होता है। किताबें हमारी जानकारी का दायरा बढ़ाती हैं और आज समाज में उनकी जो पहचान है, वह भी किताबों के माध्यम से ही संभव हुई है।

 

प्रथम सत्र में देहरादून के इतिहास, विरासत और भविष्य पर चर्चा की गई। इतिहासकार अजय शर्मा ने देहरादून के प्राचीन इतिहास, गंगा-यमुना के मध्य के 50 किमी दायरे की ऐतिहासिक कहानियों, अशोक के शिलालेख और बाड़वाला के इतिहास पर प्रकाश डाला। भारत ज्ञान विज्ञान समिति के अध्यक्ष विजय भट्ट ने 1804 के नेपाल आक्रमण, 1803 के भूकंप और 1815 में ब्रिटिश शासन के अधीन आने तक के घटनाक्रमों की विस्तृत चर्चा की। योगेश भट्ट ने राज्य गठन के बाद देहरादून में हुए तीव्र शहरीकरण, पूर्वी और पश्चिमी नहरों के बदलाव तथा पिछले 25 वर्षों में आए अकल्पनीय परिवर्तनों का उल्लेख किया। संचालन की मुख्य भूमिका राहुल कोटियाल ने निभाई।

 

दूसरे सत्र में देहरादून के साहित्यिक परिदृश्य पर चर्चा हुई। डॉ. इंद्रजीत सिंह ने एफआरआई से जुड़े वैज्ञानिक व साहित्यकार डॉ. पूर्ण सिंह, लीलाधर जगूड़ी और दिवंगत सुभाष पंत जैसे साहित्यकारों के योगदान को याद किया। राजेश सकलानी ने देहरादून के साहित्यिक इतिहास पर चर्चा करते हुए सरदार पूर्ण सिंह, एम.एन. राय, रशीद जहां, शमशेर बहादुर सिंह और हरिवंशराय बच्चन के दून प्रवास का जिक्र किया। मुकेश नौटियाल ने देहरादून की व्यवस्था और राजधानी बनने के बाद आए सांस्कृतिक बदलावों पर बात रखी तथा शहर में एक साहित्यिक संग्रहालय बनाए जाने की मांग की। संचालन की मुख्य भूमिका निक्की पुष्कर ने निभाई।

 

कार्यक्रम में सुरेंद्र दत्त सेमल्टी की पुस्तक “आओ गढ़वाली सीखें” पुस्तक का लोकार्पण किया गया जिसका समन्वय ज्योत्सना जोशी ने की। देवेश जोशी की पुस्तक “उत्तराखंड में रिवर्स माइग्रेशन” का लोकार्पण कर पुस्तक के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। उत्तराखंड की सैन्य विरासत सत्र में कर्नल सुनील कोटनाला ने सीमाओं पर तैनात उत्तराखंड के सैन्य अधिकारियों और सैनिकों के अदम्य साहस के प्रेरणादायक उदाहरण साझा किए जिसका समन्वय शीशपाल गुसाईं ने किया।

 

देहरादून किताब कौतिक के उद्घाटन दिवस पर विभिन्न स्कूल, कॉलेज के विद्यार्थी एवं संस्कृति, कला, साहित्य से जुड़े लोगों ने मेले में शिरकत की।

RELATED ARTICLES

16वें ‘देहरादून किताब कौतिक’ का दूसरा दिन : गूंजे लोकभाषाई सुर, लोकगीत और साहित्यिक चर्चाएं

By - Manoj Panday  ।। - क्रिएटिव उत्तराखंड के तत्वावधान में दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में आयोजित 16वें 'किताब कौतिक' का दूसरा दिन बेहद...

किताब कौतिक : 23 से 25 अक्टूबर 2026 तक दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में सजेगा।

By - Prem Pancholi   23 से 25 अक्टूबर 2026 तक दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में सजेगा देहरादून किताब कौतिक।   - आओ, दोस्ती करें किताबों से’...

अपनी क्षमताओं के अनुरूप किया है विकास – मुख्यमंत्री धामी

By - Prem Pancholi एच एन एन चैनल द्वारा आयोजित "उत्तराखंड उदय" कॉन्क्लेव में पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संवाद को कठोर सवालों से...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

16वें ‘देहरादून किताब कौतिक’ का दूसरा दिन : गूंजे लोकभाषाई सुर, लोकगीत और साहित्यिक चर्चाएं

By - Manoj Panday  ।। - क्रिएटिव उत्तराखंड के तत्वावधान में दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में आयोजित 16वें 'किताब कौतिक' का दूसरा दिन बेहद...

किताब कौतिक : हर साल होना चाहिए यह पुस्तक मेला प्रो० जोशी

By - Prem Pancholi/ Manoj panday   - 16वें ‘देहरादून किताब कौतिक’ का भव्य शुभारंभ: दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में सजी पुस्तकों की महफिल* - क्रिएटिव...

किताब कौतिक : 23 से 25 अक्टूबर 2026 तक दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में सजेगा।

By - Prem Pancholi   23 से 25 अक्टूबर 2026 तक दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में सजेगा देहरादून किताब कौतिक।   - आओ, दोस्ती करें किताबों से’...

अपनी क्षमताओं के अनुरूप किया है विकास – मुख्यमंत्री धामी

By - Prem Pancholi एच एन एन चैनल द्वारा आयोजित "उत्तराखंड उदय" कॉन्क्लेव में पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संवाद को कठोर सवालों से...

माला और गज़ला ने नचाया था नेहरू को।

माला और गज़ला ने नचाया था नेहरू को । By - Mahipa negi बात सन् 1956 की है, दिल्ली गणतंत्र दिवस की सांस्कृतिक झांकी के लिए...

मुख्य सचिव ने की राजीव नवोदय विद्यालयों की समीक्षा

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में राजीव गांधी नवोदय विद्यालयों को उत्कृष्टता केंद्र (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) के रूप में विकसित करने हेतु इनकी...

सरकार : छोटे उद्यमियों के निवेश पर सवाल उठाना उनके परिश्रम और रोजगार सृजन का अपमान

By - Prem Pancholi उत्तराखंड ग्लोबल इन्वेस्टर समिट-2023 को लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही खबरों और उठाए जा रहे सवालों पर सचिव उद्योग...

यह निबंध नहीं, निर्बंध विद्या है – डॉ० सविता मोहन

By - Prem Pancholi काव्यांश प्रकाशन द्वारा प्रकाशित मुकेश नौटियाल की पुस्तक "भौंकुछ" का दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के सभागार में साहित्य के सिद्धहस्त...

मुख्यमंत्री ने बर्नीगाड़ पहुंचकर महाविद्यालय भवन व मिनी स्टेडियम सहित लगभग 215 करोड़ से अधिक की योजनाओं का किया लोकार्पण एवं शिलान्यास।

मुख्यमंत्री ने बर्नीगाड़ को दी विकास की सौगात, महाविद्यालय भवन व मिनी स्टेडियम सहित कई घोषणाएं। बर्नीगाड़ में लगभग 215 करोड़ से अधिक की...

मुख्यमंत्री श्री धामी ने थपथपाई भू वैज्ञानिकों की पीठ

By - Prem Pancholi उत्तराखण्ड में ग्लेशियल झीलों से उत्पन्न संभावित ग्लेशियल लेक आउटब्रस्ट फ्लड (ग्लाॅफ) के खतरों की निगरानी एवं समय रहते चेतावनी जारी...