विसाले यार से दूना हुआ इश्क
मर्ज बढ़ता गया ज्यों ज्यों दवा की।
By – Gajendra Rawat
2003 में रिलीज़ हुई ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’ एक व्यंग्यात्मक कॉमेडी-ड्रामा है, जो राजकुमार हिरानी द्वारा निर्देशित है। यह फिल्म मुंबई के एक दिलदार गुंडे मुरली प्रसाद शर्मा उर्फ मुन्ना भाई के जीवन पर आधारित है, जो अपने माता-पिता को खुश करने के लिए डॉक्टर होने का दिखावा करता है।
मुन्ना भाई अपने गाँव से आने वाले माता-पिता (सुनील दत्त और रोहिणी हट्टंगड़ी) को यह यकीन दिलाता है कि वह एक बड़ा डॉक्टर है। जब वे उससे मिलने आते हैं, तो वह एक अस्पताल का नाटक करता है।
सच्चाई का खुलासा: डॉक्टर अस्थाना (बोमन ईरानी), जो उसके पिता का एक पुराना जानकार है, उसके झूठ का पर्दाफाश कर देता है, जिससे मुन्ना के माता-पिता शर्मिंदा होकर वापस लौट जाते हैं।
बदला लेने का प्रण: अपने पिता का अपमान देखकर मुन्ना बदला लेने की कसम खाता है। वह मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेकर डिग्री हासिल करने का फैसला करता है, ताकि वह खुद को और अपने परिवार को साबित कर सके।
कॉलेज में दाखिला: मुन्ना अपने वफादार दोस्त सर्किट (अरशद वारसी) की मदद से मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पाने में कामयाब हो जाता है। हालाँकि, यह वही कॉलेज है जहाँ डॉक्टर अस्थाना डीन है।
“जादू की झप्पी”: मुन्ना चिकित्सा के पारंपरिक तरीकों से हटकर “जादू की झप्पी” (प्यार से गले लगाना) और सहानुभूति के माध्यम से मरीजों का इलाज करना शुरू कर देता है। उसके इस मानवीय दृष्टिकोण से अस्पताल में एक सकारात्मक बदलाव आता है, और वह छात्रों और कर्मचारियों का सम्मान जीत लेता है। इस दौरान, मुन्ना को डॉ. सुमन अस्थाना (ग्रेसी सिंह) से प्यार हो जाता है, जो डॉक्टर अस्थाना की बेटी है।
यह फिल्म एक बड़ी व्यावसायिक सफलता थी और इसे कई पुरस्कार मिले, जिनमें सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय फिल्म के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी शामिल है।
उम्मीद है इस वाली फ़िल्म के हीरो को भी पुरस्कार मिलेगा फिल्म सुपरहिट होगी नहीं तो हिट तो जरूर होगी भगवान करे “हिट विकेट” ना हो जाए।
@लेखक राजनीतिक विश्लेषक हैं।







