प्रख्यात सिने अभिनेता निर्मल पांडे के जन्मदिन 10 अगस्त, 2025 को नैनीताल के रंगकर्मियों ने मशहूर संस्था ‘प्रयोगांक’ के मंच पर हरिशंकर परसाई की कालजयी कहानी ‘इस्पैक्टर मातादीन चाँद पर’ का बेहद कलात्मक नाट्य-रूपांतरण किया. नैनीताल की बारिश-भीगी शाम बेहद खुशनुमा रही, खासकर इसलिए भी कि यह नाटक नैनीताल के हाल में निर्मित जगदीश लाल साह प्रेक्षागृह में प्रस्तुत किया गया.
परसाईजी की इस बेहद चर्चित कहानी का मुझसे जुड़ा किस्सा बहुत मजेदार है. 1994 में मैंने हिंदी की सम्पूर्ण कहानियों का दो खण्डों में ‘माइलस्टोन्स’ नाम से अंग्रेज़ी में एक संग्रह तैयार किया जिसके पहले खंड की दसवीं कहानी परसाईजी की है. कहानी के अनुवाद और प्रकाशन की अनुमति के लिए उन्हें लिखा तो थोड़ा विलम्ब से उनका पत्र मिला कि वो बीमार हैं और कहानियों की सूची पर वो इस वक़्त अपनी राय तो नहीं भेज सकते, लेकिन उन्होंने सहर्ष अपनी स्वीकृति भेज दी.
हिंदी कहानी के अमर हो चुके चरित्र इंस्पैक्टर मातादीन पूरे ब्रह्माण्ड का चक्कर लगाने के बाद हिंदी-संस्कृति की जो छाप चाँद पर फैलाकर अपना वर्चस्व स्थापित करते हैं, वह नई सभ्यता के सामने भारत का वह चरित्र है, जो सिर्फ इसी देश में देखने को मिलता है. एक मजेदार राजनीतिक व्यंग्य के रूप में उकेरी गई इस कहानी का नाटक के रूप में देखना सचमुच बेहद ऊर्जावान और परेशान करने वाला था. महान रचना की यही खासियत होती है कि वह स्थान, काल और परिवेश की सीमाओं को लाँघकर सदा प्रासंगिक और अपने सन्देश के प्रति लचीली बनी रहती है; उसका सम्बन्ध केवल मानवीय सरोकारों और सुख-दुखों के प्रति रहता है जिसका उम्र या वक़्त के गुजरने से कोई खास फर्क नहीं पड़ता. ये रचनाएँ हर पीढ़ी को समान भाव और प्रभाव के साथ अपनी ओर आकर्षित करती हैं और उन्हें अपने जलते सवालों के प्रभावशाली जवाब भी देती हैं. यही कारण है के वे शाश्वत और क्लासिक रचनाएँ होती हैं.
बहुत मंजे हुए निर्देशन के साथ मदन मेहरा ने कहानी के व्यंग्य और पीड़ा को अपने चरित्रों के माध्यम से कहलवाया. मूल कथा से कोई छेड़छाड़ किये बगैर कुछ सामयिक सन्दर्भ जोड़े हैं और नाटक हमारे दौर की प्रभावशाली त्रासदी के रूप में उभर आया है. जो अंश काटे या नए शामिल किये गए हैं, उनसे नाटकीय गति और सौन्दर्यबोध का कलात्मक विस्तार ही हुआ है.
सारे पात्र एकदम मंजे हुए और प्रोफेशनल लगते हैं, अपनी पीड़ा और सरोकारों को रचनात्मक संवेदना के साथ पूरे प्रभाव के साथ एकाकार करते हुए एकदम प्रौढ़ अभिनय की भंगिमा के साथ दर्शकों तक पहुँचाते है.
नैनीताल के अधिकांश कलाप्रेमी और सर्जक इस मौके पर उपस्थित थे।
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