Sunday, June 28, 2026
Home lifestyle नाटक मंचन : इंस्पेक्टर मातादीन नैनीताल में।

नाटक मंचन : इंस्पेक्टर मातादीन नैनीताल में।

इंस्पेक्टर मातादीन नैनीताल में

Dr. Batrohi

प्रख्यात सिने अभिनेता निर्मल पांडे के जन्मदिन 10 अगस्त, 2025 को नैनीताल के रंगकर्मियों ने मशहूर संस्था ‘प्रयोगांक’ के मंच पर हरिशंकर परसाई की कालजयी कहानी ‘इस्पैक्टर मातादीन चाँद पर’ का बेहद कलात्मक नाट्य-रूपांतरण किया. नैनीताल की बारिश-भीगी शाम बेहद खुशनुमा रही, खासकर इसलिए भी कि यह नाटक नैनीताल के हाल में निर्मित जगदीश लाल साह प्रेक्षागृह में प्रस्तुत किया गया.
परसाईजी की इस बेहद चर्चित कहानी का मुझसे जुड़ा किस्सा बहुत मजेदार है. 1994 में मैंने हिंदी की सम्पूर्ण कहानियों का दो खण्डों में ‘माइलस्टोन्स’ नाम से अंग्रेज़ी में एक संग्रह तैयार किया जिसके पहले खंड की दसवीं कहानी परसाईजी की है. कहानी के अनुवाद और प्रकाशन की अनुमति के लिए उन्हें लिखा तो थोड़ा विलम्ब से उनका पत्र मिला कि वो बीमार हैं और कहानियों की सूची पर वो इस वक़्त अपनी राय तो नहीं भेज सकते, लेकिन उन्होंने सहर्ष अपनी स्वीकृति भेज दी.

हिंदी कहानी के अमर हो चुके चरित्र इंस्पैक्टर मातादीन पूरे ब्रह्माण्ड का चक्कर लगाने के बाद हिंदी-संस्कृति की जो छाप चाँद पर फैलाकर अपना वर्चस्व स्थापित करते हैं, वह नई सभ्यता के सामने भारत का वह चरित्र है, जो सिर्फ इसी देश में देखने को मिलता है. एक मजेदार राजनीतिक व्यंग्य के रूप में उकेरी गई इस कहानी का नाटक के रूप में देखना सचमुच बेहद ऊर्जावान और परेशान करने वाला था. महान रचना की यही खासियत होती है कि वह स्थान, काल और परिवेश की सीमाओं को लाँघकर सदा प्रासंगिक और अपने सन्देश के प्रति लचीली बनी रहती है; उसका सम्बन्ध केवल मानवीय सरोकारों और सुख-दुखों के प्रति रहता है जिसका उम्र या वक़्त के गुजरने से कोई खास फर्क नहीं पड़ता. ये रचनाएँ हर पीढ़ी को समान भाव और प्रभाव के साथ अपनी ओर आकर्षित करती हैं और उन्हें अपने जलते सवालों के प्रभावशाली जवाब भी देती हैं. यही कारण है के वे शाश्वत और क्लासिक रचनाएँ होती हैं.

बहुत मंजे हुए निर्देशन के साथ मदन मेहरा ने कहानी के व्यंग्य और पीड़ा को अपने चरित्रों के माध्यम से कहलवाया. मूल कथा से कोई छेड़छाड़ किये बगैर कुछ सामयिक सन्दर्भ जोड़े हैं और नाटक हमारे दौर की प्रभावशाली त्रासदी के रूप में उभर आया है. जो अंश काटे या नए शामिल किये गए हैं, उनसे नाटकीय गति और सौन्दर्यबोध का कलात्मक विस्तार ही हुआ है.

सारे पात्र एकदम मंजे हुए और प्रोफेशनल लगते हैं, अपनी पीड़ा और सरोकारों को रचनात्मक संवेदना के साथ पूरे प्रभाव के साथ एकाकार करते हुए एकदम प्रौढ़ अभिनय की भंगिमा के साथ दर्शकों तक पहुँचाते है.
नैनीताल के अधिकांश कलाप्रेमी और सर्जक इस मौके पर उपस्थित थे।

RELATED ARTICLES

एथलीट संदीप गुसाई बना उत्तरकाशी विधिक सेवा प्राधिकरण एंबेसडर

जनसामान्य में नशा उन्मूलन, विधिक जागरूकता, सामाजिक उत्थान एवं खेलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, उत्तरकाशी द्वारा संदीप गुंसाई...

अतीत का प्रतिशोध नहीं लिया जा सकता, उसे केवल समझा जा सकता है : IAS शशि रंजन कुमार

By - Prem Pancholi ।। अतीत हमारी स्मृतियों में, खंडहरों में, और उन तरीकों में जीवित रहता है जिनसे वह आज भी हमारे अस्तित्व को...

सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स को उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद से लेनी पड़ेगी अनुमति

चारधाम यात्रा की गरिमा, सुरक्षा और शुचिता बनाए रखने हेतु सोशल मीडिया कंटेंट निर्माण के संबंध में शासन से दिशा निर्देश जारी हुए हैं।...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

एथलीट संदीप गुसाई बना उत्तरकाशी विधिक सेवा प्राधिकरण एंबेसडर

जनसामान्य में नशा उन्मूलन, विधिक जागरूकता, सामाजिक उत्थान एवं खेलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, उत्तरकाशी द्वारा संदीप गुंसाई...

अतीत का प्रतिशोध नहीं लिया जा सकता, उसे केवल समझा जा सकता है : IAS शशि रंजन कुमार

By - Prem Pancholi ।। अतीत हमारी स्मृतियों में, खंडहरों में, और उन तरीकों में जीवित रहता है जिनसे वह आज भी हमारे अस्तित्व को...

सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स को उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद से लेनी पड़ेगी अनुमति

चारधाम यात्रा की गरिमा, सुरक्षा और शुचिता बनाए रखने हेतु सोशल मीडिया कंटेंट निर्माण के संबंध में शासन से दिशा निर्देश जारी हुए हैं।...

देहरादून : धामी कैबिनेट की बैठक संपन्न, खास विषयों पर त्वरित निर्णय

।। राज्य कैबिनेट ने कुल 12 प्रस्तावों को दी मंजूरी ।। उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा संशोधन नियमावली-2026 को मंजूरी दी, जिसके तहत संस्कृत विद्यालयों की मान्यता,...

इतिहास के पन्नो से : अपना दायां अंगूठा दिखाना चाहिए और हम दिखायेंगे भी – दादा दौलतराम खुगशाल

By - dr. Arun Kuksal   दादा दौलतराम खुगशाल (मार्च, 1891- 3 फरवरी, 1960) टिहरी रियासत के विरुद्ध जन-संघर्षों का अग्रणी व्यक्तित्व- ‘‘आज तक राजा ने हमको पढ़ने-लिखने...

जिलाधिकारी के शख्त निर्देश, कहा आपदा के दौरान सभी विभाग बनायें समन्वय

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जनपद देहरादून में आगामी मानसून एवं संभावित आपदा परिस्थितियों के दृष्टिगत आपदा प्रबंधन संबंधी...

जब वरिष्ठ पत्रकार चारू तिवारी ने वैज्ञानिक डी० डी० पंत को देखा

सुप्रसिद्ध भौतिकशास्त्री और हिमालय के चिंतक प्रो. डीडी पंत की पुण्यतिथि (11 जून, 2008) पर विशेष हमारे हिस्से के प्रो. डीडी पंत - चारु तिवारी By...

केतन लाल की निर्मम हत्या की चहुंओर चर्चा, समाज पर बड़ा कलंक।

By - Prem Pancholi   सोशल मीडिया पर जिस तरह से प्रतापनगर के ओण पट्टी के देवल गांव निवासी अनुसूचित जाति के किशोर केतन लाल की...

आपदाओं के प्रभाव को न्यूनतम करने के लिए सरकारी वर्जिश

वैज्ञानिक योजना, कुशल प्रशासन और समयबद्ध निर्णय प्रक्रिया के जरिए आपदाओं के प्रभाव को न्यूनतम करने का प्रयास किया जा रहा है।” उन्होंने कहा कि...

पर्यावरण दिवस : पद्मश्री प्रेमचंद शर्मा ने किया कृषि अनुसंधान संस्थान में वृक्षारोपण

विश्व पर्यावरण दिवस पर IATR देहरादून में पौधारोपण एवं गोष्ठी का आयोजन। पद्मश्री प्रेम चंद शर्मा ने छात्रों को मोरिंगा और पंच पल्लव के...