Sunday, September 13, 2026
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पुष्पान्त विगलन रोग (Blossom End Rot) कैसे करें प्रबंधन।

पुष्पान्त विगलन रोग (Blossom End Rot) कैसे करें प्रबंधन।

By Dr Rajendra kuksal

ब्लासम एंड रॉट (Blossom end rot) एक शारीरिक विकार है जो टमाटर, शिमला मिर्च, मिर्च, बैंगन, मैरो (चप्पन कद्दू) तरबूज आदि सब्जियों में होता है और इसका मुख्य कारण कैल्शियम की कमी है। टमाटर एवं शिमला मिर्च की संकर किस्मों में यह विकार अधिक दिखाई देता है।

लक्षण-

पत्तियाँ – इस विकार से ग्रसित पौधों की पत्तियाँ झुलसी और विकृत दिखाई देती हैं। ये नीचे की ओर मुड़ जाती हैं, क्योंकि पत्तियों के किनारे पूरी तरह फैल नहीं पाते हैं। कभी-कभी नई कॉपलें और कोमल पत्तियाँ काली पड़ जाती हैं और बाद में मर जाती हैं।

फल-

ब्लॉसम एंड रॉट के शुरुआती लक्षण फलों के निचले हिस्सों (पुष्पाग्र) पर दिखाई देते हैं। ये छोटे, हल्के या गहरे हरे भूरे दाग के रूप में उत्पन्न होते हैं, ये घाव बाद में धंस जाता है जो बाद में भूरा या काला, कड़ा, चमड़े की तरह हो जाता है तथा पूरे पुष्पाग्र को घेर लेता है।

टमाटर में फल लगने से लेकर फलों के पकने तक इस विकार के लक्षण देखे जा सकते हैं। एक गुच्छे के पूरे फलों में एक साथ ही लक्षण दिखाई देते हैं।

शिमला मिर्च में, फलों के आकार में बढ़‌ने के दौरान इस विकार के लक्षण अधिक दिखाई देते है। प्रभावित फल ज्यादातर पकने से पहले ही अपना रंग बदल देते हैं। फलों के गीला होने पर, प्रभावित हिस्से में फफूंद एवं बैक्टीरिया (जीवाणु) विकसित हो जाते हैं।

कारक-

शुष्क मौसम के दौरान मिट्टी में कैल्शियम की कमी हो जाती है। मिट्टी से पौधों द्वारा अपर्याप्त मात्रा में कैल्शियम का अवशोषण हो जाता है। रोग नयी कॉपलों,पत्तियों तथा फलों में कैल्शियम के स्थानांतरित न हो पाने के कारण होता है। ब्लॉसम एंड रॉट ज्यादातर तब दिखाई देता है जब पौधे तेजी से बढ़ रहे होते हैं, इनमें कैल्शियम की आवश्यक मात्रा की पूर्ति नहीं हो पाती है। पौधों में कैल्शियम अचल तत्व है। मिट्टी में बहुत कम और बहुत ज्यादा नमी भी कैल्शियम की कमी को विकसित करते हैं। सूखा, मिट्टी में नमी की मात्रा का बहुत अधिक उतार-चढ़ाव, जल भराव, ठंडी मिट्टी कैल्शियम के अवशोषण को रोक सकती है।

कोशिका वृद्धि और कोशिका भित्ति की मजबूती के लिए कैल्शियम की आवश्यकता होती है। यदि तेजी से बढ़ने वाले फलों में इसकी कमी होती है, तो ऊतक टूट जाते हैं। इससे फलों में ब्लॉसम एंड रॉट के सूखे एवं धंसे हुए घाव बन जाते है।

प्रबन्धन/ उपचार

प्रतिरोधी किस्मों का चयन करें संवेदनशील किस्में उगाने से बचें।

मिट्टी में नमी बनाये रखें और पौधों को पानी देते रहें।

अच्छी वायु संचार और पर्याप्त कार्बनिक पदार्थ या ह्यूमस वाली मिट्टी का चयन करें

मृदा में नमी बनाये रखने के लिए मल्च का प्रयोग करें। मल्च से मृदा की नमी संरक्षित रहती है और ब्लॉसम एंड रॉट कम होने की संभावना भी बढ़ जाती है। जैविक अथवा प्लास्टिक मल्च का उपयोग करें।

खेत में जल निकासी का उचित प्रबंधन रखें।

निराई-गुड़ाई के दौरान पानी और पोषक तत्वों का अवशोषण करने वाली जड़ों को क्षतिग्रस्त होने से बचाना चाहिए।

उर्वरकों का आवश्यक मात्रा में उपयोग करना चाहिये। खेत में N P K उर्वरकों का प्रयोग संतुलित मात्रा में करें।

मिट्टी का पी.एच. मान लगभग 6.5 बनाये रखें यदि मिट्टी का पी.एच. मान कम (अम्लीय) है तो मिट्टी में चूना , लकड़ी की राख अस्थि चूर्ण (बोन मील) या अण्डों के छिलकों को मिलाएं

यदि पौधों में ब्लॉसम एंड रॉट के लक्षण दिखाई दें, तो उनकी जड़ों के आस-पास कैल्शियम नाइट्रेट या कैल्शियम क्लोराइड की 5 – 10 ग्राम प्रति ली. पानी में घोल बनाकर डालना चाहिए। खड़ी फसल में, कैल्शियम क्लोराइड 500 ग्राम 200 लीटर पानी में या कैल्शियम नाइट्रेट 4 – 6 ग्राम प्रति लीटर पानी में का घोल बनाकर छिड़काव करें।

– लेखक उद्यान विशेषज्ञ है

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