Friday, March 6, 2026
Home देहरादून हिंदू उत्सव में नवरात्रों की अहम भूमिका 

हिंदू उत्सव में नवरात्रों की अहम भूमिका 

हिंदू उत्सव में नवरात्रों की अहम भूमिका @

@ हिन्दू मान्यता वाले सभी लोग आज से नवरात्री के पाठ आरम्भ करने जा रहे है। साल 2024 की शारदीय नवरात्री का शुभ मूहूर्त 3 अक्टूबर से आरम्भ हो चुका है। आज हम इस धार्मिक पर्व के बारे में बात करने जा रहे है। इस पर्व पर कई लोगों के मत अलग अलग हो सकते है। पर सन्देश लगभग एक जैसा ही है। विज्ञान भी इंसान को कभी कभी व्रत रखने को कहता है जिसे हम सांईस की भाषा में फास्ट कहते है। यदि हम हिन्दू धार्मिक मान्यताओं की तरफ आते हैं तो यहां कई त्यौहार ऐसे है जिन्हे मनाने के लिए व्रत यानि फास्ट रखा जाता है। सांइस की नजर से देखो या धार्मिक मान्यताओं की नजर से देखो सभी का सन्देश जीने के लिए है। और सुख शान्ती के लिए है।

आइये इस रिपोर्ट में आपको शारदीय नवरात्रों की ओर ले चलते हैं। यहां कुछ ऐसे मसलो पर बातचीत आगे बढाते है जो हमारे जीवनचर्या में भी काम आ सकते है। पहला सवाल बनता है कि हम नवरात्रों को क्यों मनाते है। इसके पीछे का राज क्या है। हिन्दू धर्म ग्रन्थो के अनुसार इस वर्ष हस्त नक्षत्र और इंद्र योग के संयोग में शारदीय नवरात्र 3 अक्टूबर दिन गुरुवार से शुरू हो रहे हैं। इस बार नवरात्र 3 से लेकर 11 अक्टूबर तक है और 12 अक्टूबर को दशहरा मनाया जाएगा। आदि शक्ति नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की नौ दिन तक अलग-अलग पूजा होती है। इस दौरान भक्त अपनी सामर्थ्य के अनुसार व्रत रखकर देवी की पूजा करते हैं। शास्त्रों में बताया गया है कि 9 दिन पूरे परिवार के साथ विधि विधान से मां दुर्गा की पूजा अर्चना करने से धन धान्य की कमी नहीं होती और मां दुर्गा का परिवार पर आशीर्वाद बना रहता है।

धार्मिक मान्यताओं में ऐसा भी बताया गया है कि नौ दिनों तक मां दुर्गा के स्वरूप चंददेवी की पूजा करने के बाद राम ने रावण को हराया था। ऐसा माना जाता है कि तभी से नवरात्रि की शुरुआत हुई। भगवान राम पहले राजा और पहले मानव थे जिन्होंने नवरात्रि के 9 दिनों का व्रत रखा था। रेणुका ज्योतिष केंद्र के संस्थापक आचार्य शक्ति प्रसाद सेमवाल ने बताया कि अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 2 अक्टूबर की रात 12 बजकर 18 मिनट से शुरू होगी। इस तिथि का समापन 3 अक्टूबर को देर रात 2 बजकर 58 मिनट पर होगा। उदया तिथि अनुसार गुरुवार 3 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र की शुरुआत होगी। कलश स्थापना का मुहूर्त कन्या लग्न में सुबह 6 बजे से लेकर सुबह 7 बजकर 05 मिनट तक है। वहीं, अभिजीत में मुहूर्त सुबह 11 बजकर 31 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 19 मिनट तक है। उन्होने यह भी बताया कि बनारस के महावीर पंचांग के अनुसार इस बार चतुर्थी तिथि की वृद्धि होने से यह तिथि दो दिन 6 और 7 अक्टूबर को मनाई जाएगी। वहीं नवमी तिथि का क्षय होने पर महाअष्टमी और महानवमी का व्रत 11 अक्टूबर को रखा जाएगा।

इस तरह से नवरात्रि माँ के अलग अलग रूपों को निहारने और उत्सव मानाने का त्यौहार है। जैसे कोई शिशु अपनी माँ के गर्भ में 9 महीने रहता है, वैसे ही हिन्दू धर्म के अनुयायी परा प्रकृति में रहकर, ध्यान में मग्न होने का इन 9 दिन का महत्व समझते है। वहाँ से जब बाहर निकलते है तो सृजनात्मकता का प्रस्सपुरण जीवन में आने लगता है। हालाकि नवरात्र एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ होता है नौ रातों का समय। इन नौ रातों और दस दिनों के दौरान, शक्ति और देवी की पूजा की जाती है। इस समय शक्ति के नवरूपों की उपासना की जाती है। रात्रि शब्द सिद्धि का प्रतीक है। भारत के प्राचीन ऋषि-मुनियों ने रात्रि को दिन की अपेक्षा अधिक महत्व दिया है। इसलिए दीपावली, होलिका, शिवरात्रि और नवरात्र आदि उत्सवों को रात में ही मनाने की परंपरा है।

यहां चैत्र माह में भी नवरात्रि का आयोजन होता है। इस दौरान की भी अपनी खास महत्ता है। माता दुर्गा के ये नवरात्र हिंदू पंचांग के अनुसार साल में चार बार मनाए जाते हैं। चैत्र नवरात्र, शारदीय नवरात्र, माघ गुप्त नवरात्र, और आषाढ़ गुप्त नवरात्र। इनमें सबसे प्रमुख नवरात्र चैत्र नवरात्र और शारदीय नवरात्र ही माने जाते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार वसंत ऋतु की शुरुआत में आने वाला एक विशेष पर्व है। यह पर्व देवी दुर्गा के नौ रूपों की उपासना के लिए समर्पित है। यह समय न केवल आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण होता है, बल्कि जीवन में नवीनीकरण और नई शुरुआत का प्रतीक भी माना जाता है। चैत्र नवरात्रि का मुख्य उद्देश्य देवी दुर्गा की शक्ति, साहस और भक्ति की पूजा करना बताया गया है। मान्यता है कि इस दौरान देवी दुर्गा पृथ्वी पर आती हैं और अपने भक्तों पर कृपा बरसाती हैं। यह समय आत्मा की शुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का होता है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में देवी के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है।

श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय 16 के श्लोक 23 में बताया गया है कि जो व्यक्ति शास्त्र की विधि को त्यागकर अपनी इच्छा से मनमाना आचरण, अर्थात पूजा और कर्मकांड करते हैं, वे न तो सुख प्राप्त करते हैं, न उनका कोई कार्य सिद्ध होता है, और न ही उन्हें परमगति प्राप्त होती है। इससे स्पष्ट होता है कि शास्त्र-विरुद्ध साधना से मोक्ष की प्राप्ति संभव नहीं है। श्लोक 24 में भी गीता ज्ञानदाता अर्जुन से कहते हैं कि कर्तव्य और अकर्तव्य के लिए शास्त्र ही प्रमाण है, और इसे जानकर शास्त्रविधि से नियत कर्म ही करना योग्य है। अर्थात गीता ज्ञानदाता स्वयं बता रहे हैं कि भक्ति-साधना करने के लिए शास्त्र ही प्रमाण है।
दरअसल हम यह भी जानते हैं कि नवरात्र मनाने का कोई प्रमाण नहीं है, फिर भी हम इसे करते हैं। इसलिए प्रमाण के तौर पर श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय 16 के श्लोक 23 व 24 का अनुसरण कर सकते है।

कुछ सद्ग्रंथों में यह भी उल्लेख है कि देवी अथवा माता जी को केवल व्रत रखकर, जल चढ़ाकर खुश नहीं किया जा सकता, बल्कि उनके वास्तविक मंत्र का जाप करके ही उन्हें प्रसन्न किया जा सकता है। क्या साल में 9 दिन उनकी पूजा करके उन्हे खुश कर सकते हैं? असल में उन्हे साल के 365 दिन उनकी साधना करके और उनके वास्तविक जाप से खुश कर सकते हैं, न कि व्रत रखकर या जल चढ़ाकर।

सनातन धर्म में प्रत्येक त्यौहार आध्यात्मिक, मानसिक और शारीरिक लाभ से जुड़ा है। तो, चलिए यहां हम समझने की कोशिश करेंगे कि नवरात्री है क्या। चैत्र नवरात्रि, चैत्र के शुक्ल पक्ष के दौरान मनाई जाती है। चैत्र नवरात्रि के साथ ही हिन्दू नव वर्ष की शुरुवात होती है। पौष और आषाढ़ के महीने की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है, क्योंकि उस नवरात्रि में तंत्र साधना की जाती है। पारिवारिक लोगों द्वारा केवल चैत्र और शारदीय नवरात्रि को ही मनाया जाता है। मराठी लोग चैत्र नवरात्रि को गुड़ी पड़वा, कश्मीरी हिंदू नवरे, आंध प्रदेश, तेलांगना और कर्नाटक इसे उगादी के नाम से मनाते हैं। नौ दिन चलने वाले इस त्योहार को रामनवमी भी कहते हैं। क्योंकि उसका समापन भगवान राम के जन्मदिन रामनवमी वाले दिन होता है।

शारदीय नवरात्र महानवरात्रि या मुख्य नवरात्रि भी कहा जाता है। अश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन यानि अक्टूबर या नवम्बर महीने में पूरे भारत में दुर्गा पूजा के रूप में मनाई जाती है। कथा के अनुसार, नौ दिनों की लंबी लड़ाई के बाद देवी दुर्गा ने राक्षस महिषासुर का वध किया, जिसके बाद से ये नवरात्र मनाई जाती है। शारदीय नवरात्रि से एक और कहानी जुड़ी हुई है जिसके अनुसार, भगवान राम ने रावण को युद्ध में पराजित करने के लिए देवी दुर्गा के सभी नौ रूपों की पूजा की थी। इसके बाद दसवें दिन भगवान राम ने रावण का वध किया। यानि शारदीय नवरात्रि के दसवें दिन को विजयदशमी के रूप में मनाया जाता है।

कुलमिलाकर भारत में हर उत्सव की एक खास कहानी, खास मकसद और खास प्रकार की परम्परा रही है। वह चाहे धार्मिक उत्सव हो या राजनीतिक, सामाजिक अथवा संास्कृतिक उत्सव। इन्ही उत्सवी परम्परा के अनुसार भारत को एक गुलदस्ता भी कहते है। अर्थात बहुविविधता में एकता।

RELATED ARTICLES

2017 तक स्टार्टअप की संख्या थी शून्य। वर्ष 2025 में बढ़कर हुई 1750

- 2024-25 में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) ₹ 3,81,889 करोड़ का रहा - 2021-22 के मुकाबले जीएसडीपी में आया डेढ़ गुना से ज्यादा...

एक साधारण व्यक्ति में असाधारण व्यक्तित्व की जीवन्त जीवन जीने की शब्द-यात्रा है – BARLOWGANJ AND BEYOND

- साधारण व्यक्ति का असाधारण व्यक्तित्व : प्रो. बी. के. जोशी। - प्रो. बी. के. जोशी जी के जीवनीय आत्म-संस्मरणों पर केन्द्रित पुस्तक 'BARLOWGANJ...

विकास के नए आयाम स्थापित करती ग्राम पंचायत भगवन्तपुर की ग्राम प्रधान

विकास के नए आयाम स्थापित करती ग्राम पंचायत भगवन्तपुर की ग्राम प्रधान   By - Harishankar saini   कभी गड्ढों, कीचड़ और टूटे किनारों से जूझती सलान गाँव...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

धराली आपदा : वैज्ञानिकों ने किया खुलासा, एक बड़े ग्लेशियर के टुकड़े के टूटने से हुई तबाही।

न बादल फटा, न ग्लेशियल झील… वैज्ञानिक अध्ययन में खुलासा: श्रीकांता ग्लेशियर से बर्फ का बड़ा हिस्सा गिरने से हुआ था धराली हादसा। ....................... 5 अगस्त...

2017 तक स्टार्टअप की संख्या थी शून्य। वर्ष 2025 में बढ़कर हुई 1750

- 2024-25 में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) ₹ 3,81,889 करोड़ का रहा - 2021-22 के मुकाबले जीएसडीपी में आया डेढ़ गुना से ज्यादा...

एक साधारण व्यक्ति में असाधारण व्यक्तित्व की जीवन्त जीवन जीने की शब्द-यात्रा है – BARLOWGANJ AND BEYOND

- साधारण व्यक्ति का असाधारण व्यक्तित्व : प्रो. बी. के. जोशी। - प्रो. बी. के. जोशी जी के जीवनीय आत्म-संस्मरणों पर केन्द्रित पुस्तक 'BARLOWGANJ...

विकास के नए आयाम स्थापित करती ग्राम पंचायत भगवन्तपुर की ग्राम प्रधान

विकास के नए आयाम स्थापित करती ग्राम पंचायत भगवन्तपुर की ग्राम प्रधान   By - Harishankar saini   कभी गड्ढों, कीचड़ और टूटे किनारों से जूझती सलान गाँव...

होली विशेषांक : खोलो किवाड़ चलो मठ भीतर।

- खोलो किवाड़ चलो मठ भीतर। - दून पुस्तकालय में संगीताजंलि की शानदार होली प्रस्तुति दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के एम्फीथियेटर में आज संगीतांजली शास्त्रीय...

बर्लोगंज एंड बियोंड पुस्तक का लोकार्पण

पुस्तक : बर्लोगंज एंड बियोंड   By - Dr. Yogesh dhasmana   देश के प्रसिद्ध शिक्षाविद प्रो बी के जोशी के संस्मरणों पर आधारित पुस्तक बर्लोगंज एंड बियोंड...

विज्ञान दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चन्देली में।

विज्ञान दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चन्देली में। By - Neeraj Uttarakhandi पुरोला विकासखंड के अंतर्गत राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चन्देली में राष्ट्रीय...

स्पैक्स संस्था ने होली के प्राकृतिक रंगों पर दून पुस्तकालय में बच्चों को दी जानकारी।

स्पैक्स संस्था ने होली के प्राकृतिक रंगों पर दून पुस्तकालय में बच्चों को दी जानकारी। .......... दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में ‘स्पेक्स’ संस्था के सहयोग...

जनगणना की पूरी तैयारी, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होगी जनगणना

जनगणना-2027 की डिजिटल तैयारियां शुरू, देहरादून में 25-27 फरवरी तक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू चार्ज अधिकारियों से लेकर सेन्सस क्लर्क तक, सभी ले रहे डिजिटल...

एक स्वस्थ परंपरा है स्कूल ऑफ थॉट्स – प्रो० पंवार

स्कूल ऑफ थॉट्स, श्रीनगर (गढ़वाल), भारतीय-हिमालयी ज्ञान परंपरा,  मुख्य वक्ता- प्रो. मोहन पंवार। भारतीय : हिमालय ज्ञान परंपरा पर अपनी बात शुरू करते हुए मुख्य...