Saturday, September 12, 2026
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केदारनाथ विधानसभा उप चुनाव में जो जीत रहा है, पढ़े उनके बारे में

सभी जीत रहे है तो हर कौन रहा है।

Congrres
Congress

यह तो सभी को मालूम है कि हर चुनाव को हर कोई पार्टी जीतना चाहती है। केदारनाथ विधानसभा के उप चुनाव में भी यही होने जा रहा है। आज हम यहां बताने जा रहे हैं कि केदारनाथ विधान सभा का उप चुनाव कौन सी पार्टी और कौन व्यक्ति जीत रहा है। अंत तक आप हमारे साथ बने रहिए। यहां हम बहुत ही रहस्यमय पत्ते खोलने जा रहे हैं।

जी हां! राजनीतिक दलों को लगता है कि केदारधाम को लेकर ही केदारनाथ विधानसभा का चुनाव जीता जा सकता है। इसलिए कांग्रेस ने एक पदयात्रा कर डाली। दूसरी तरफ भाजपा ने सत्ता का चाबुक चलाकर लोक लुभावने वायदों की बौछार कर दी। तीसरी पार्टी यानि उत्तराखंड क्रांति दल यहां सिर्फ जागरूकता का कार्य करेगी जैसा कि उनके प्रवक्ता कई मौकों पर कह चुके है। तो स्पष्ट है कि मुकाबला भाजपा और कांग्रेस में होने वाला है। मुकाबला भी बहुत रोचक होने वाला है। शब्दो के धनुष बाण यहां तैयार हो चुके है और एक दूसरे को गिराने के लिए भाषणों की तोपे तानी जा रही है।

BJP
BJP

यहां अब आगे देखिए होता क्या क्या है। केदारनाथ विधानसभा के लिए जब युवा मुख्यमंत्री धामी ने सभी घोषणाएं कर दी, ठीक एक घंटे बाद केदारनाथ विधानसभा की उप चुनाव की तिथि भी नियत कर दी और चुनाव आचार संहिता भी लागू कर दी। यही तो सत्ता की लोलुपता है। जो साफ साफ दिखाई दे रही है। इसी बात को सत्ताधारी पार्टी भाजपा से जुड़े लोग कितना भुना सकते है साथ ही प्रतिपक्ष की कांग्रेस पार्टी मुख्यमंत्री की घोषणा को कितना झुठला सकती है, जिसका परिणाम आगामी 23 नवम्बर को आने वाला है।

वैसे सभी राजनीतिक पार्टियां केदारनाथ विधानसभा उप चुनाव के लिए पहले से तैयारी कर रही थी, पर जैसे चुनाव की तिथि तय हुई है वैसे सभी राजनीतिक दलों ने कमर कस दी है। भाजपा में उम्मीदवारो की लम्बी लिस्ट है। जिनमें प्रमुख नाम दिवंगत विधायक शैलारानी रावत की बेटी ऐश्वर्या रावत, पूर्व में निर्दलीय चुनाव लड़ चुके कुलदीप रावत और केदारनाथ पुर्ननिर्माण का मुख्य चेहरा रहे कर्नल अजय कोठियाल भाजपा से संभावित उम्मीदवार बताये जा रहे हैं। जबकि पूर्व कैबिनेट मंत्री डा० हरक सिंह रावत, पूर्व विधायक मनोज रावत कांग्रेस के प्रबल दाबेदार बताये जा रहे हैं। यही नहीं उत्तराखण्ड क्रान्ती दल से आशुतोष भण्डारी 20 नवम्बर को होने वाले केदारनाथ विधानसभा के उप चुनाव के मैदान में होंगे। यह सभी उम्मीदवार अपनी जीत पक्का बता रहे हैं। हालांकि अभी भाजपा और कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारो के नाम सार्वजनिक नहीं किये है। पर सम्भावित उम्मीदवारो में से ही कोई एक उम्मीवार चुनाव मैदान में रहेगा ही।

UKD
UKD

चुनाव की तिथि जैसे तय हुई है सभी सम्भावित उम्मीदवार अपनी अपनी गणित बिठाने में लग गये है। राष्ट्रीय पार्टीयों के संभावित उम्मीदवार केदारनाथधाम के विकास को लेकर गांव गांव जा रहे है। क्षेत्रीय पार्टी उत्तराखण्ड क्रांती दल का उम्मीदवार केदारनाथ विधानसभा की जनता से मूलनिवास और भू-कानून को लेकर सजग दिखाई दे रहा है। यहां जब हमने केदारनाथ विधानसभा के कुछ लोगों से टेलिफोनिक बात की है तो मुद्दा कुछ और ही निकला है। स्थानीय लोगो का कहना है कि केदारनाथ धाम की समस्या और केदारनाथ विधान सभा की समस्या बिल्कुल अलग अलग है। केदारनाथ धाम के विकास को केदारनाथ विधानसभा के विकास के साथ नहीं जोड़ा जा सकता है।

यदि हम संभावित उम्मीदवारों की बात करें तो पूर्व कैबिनेट मंत्री डा॰ हरक सिंह रावत बयान दे चुके हैं कि वे 2012 में कैबिनेट मंत्री नहीं बनना चाह रहे थे, पर उनके समर्थको ने उन्हे कहा कि वे मंत्रालय संभालें। उन्होंने इशारा कर दिया कि वे चुनाव मैदान में रहेंगे क्योंकि डा॰ हरक सिंह रावत के समर्थक उनसे चुनाव लड़वाना चाहते है। दूसरा यह कि वे रूद्रप्रयाग जनपद के मूल निवासी भी है। इसी तरह देखा जाये तो पूर्व विधायक मनोज रावत भी इस चुनाव में अपनी किस्मत अजमाना चाहते हैं। और मनोज रावत वयोवृद्ध कांग्रेस नेता व पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के पंसदीदा भी है। यहां आप समझ लिजिए कि डा॰ हरक सिंह रावत और हरीश रावत में छत्तीस का आंकड़ा किसी से छुपा नहीं है।
इसी तरह भाजपा के संभावित उम्मीदवार दिवंगत विधायक शैलारानी रावत की बेटी एश्वर्या रावत सहानुभति की पात्र भी है। यही नहीं वह केदारनाथ विधानसभा में काफी सक्रीय बताई जा रही है। जबकि कुलदीप रावत केदारनाथ विधानसभा 2022 के चुनाव में मैदान में थे और अच्छे खासे मत प्राप्त किये हुए है। अब वे भाजपा का पल्लू पकड़े हुए है और वे भाजपा के बैनर पर चुनाव मैदान में रहेंगे। इसके अलावा केदारनाथ पुर्ननिर्माण का चर्चित चेहरा कर्नल अजय कोठियाल भी भाजपा से ताल ठोक चुके हैं। अजय कोठियाल भी अपने फैजी भईयों के परिवारो से नजदीकी बनाते हुए दिखाई दे रहे हैं। इधर उत्तराखण्ड क्रांती दल के एक मात्र उम्मीदवार आशुतोष भण्डारी के विरोध में उनकी पार्टी का कोई ऐसा चेहरा सामने नहीं है। यही नहीं इतने ही अन्य उम्मीदवार इस उप चुनाव में प्रबल दावेदारी कर चुके है और लोगों से नजदीकियां बनाते दिखाई भी दे रहे है। इस सम्पूर्ण चुनावी माहौल में केदारनाथ की पूर्व विधायक और वर्तमान में भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष आशा नौटियाल को नजरअंदाज करना बहुत बड़ी गलती हो सकती है। क्योंकि उनकी भी प्रबल दावेदारी इस उप चुनाव में होने की संभावना बताई जा रही है। अगर हम केदारनाथ विधानसभा के उप चुनाव को बहुत करीबी से देखें तो सभी उम्मीदवारों में से कोई कमतर नहीं दिखाई दे रहा है। मगर जीत एक की ही होगी, जो जगजाहीर है।

केदारनाथ उप चुनाव का यदि हम विश्लेषण करें तो इस दौरान जिस राजनीतिक पार्टी का अनुशासन ठीक रहेगा मतदान उसी के पक्ष में अधिक होने की संभावना बताई जा रही है। यदि उम्मीदवार अपनी अपनी पार्टी के अनुशासन को नहीं मानेंगे तो परिणाम चौंकाने वाले हो सकते है। वरना ऐसा भी अंदेशा लगाया जा रहा है कि इस उप चुनाव में बहुत खतरनाक ढंग से पार्टी के उम्मीदवारों के साथ भीतरघात होने वाला है। यही नहीं इसके अलावा पिछले विकास के कार्य भी इस चुनाव में सामने रहेंगे बजाय मौजूदा घोषणाओं के।

जब संभावित उम्मीदवार भारी भरकम, लाव लश्कर के साथ चुनावी अंदाज में केदारनाथ विधानसभा में अभियान चलाते दिखाई दे रहे हैं तो ऐसे उनकी आपसी गुटबाजी भी अभी से सामने आने लग गई है। एक बात और स्पष्ट सामने आ रही है कि इस चुनाव में केदारनाथ धाम का विकास और सम्पूर्ण केदारनाथ विधानसभा का विकास में काफी अन्तर दिखाई दे रहा है। जबकि पूर्व में चुनावी मैदान में दो दो हाथ कर चुके सामाजिक कार्यकता मोहित डिमरी भी इस उप चुनाव को कही कहीं प्रभावित कर सकते हैं।

कुलमिलाकर पार्टियों के दबदबा के वनस्पत उम्मीदवार की अधिक पहुंच रहेगी, ऐसा पिछले विधानसभा चुनावों से देखा जा रहा है कि केदारनाथ विधानसभा में पार्टीयां हमेशा दूसरे नंबर पर ही रही है, बल्कि उम्मीदवार की मतदाताओं तक पहुंच पहले नंबर पर रही है। हालांकि यह भी समय की गर्त में है। मगर मोटा माटी यही नजर आ रहा है।

केदारनाथ उप चुनाव में भ्रष्टाचार की बात को कौन सा उम्मीदवार कितने अच्छे ढंग से जनता के सामने रख पायेगा यह भी पार्टियों और उम्मीदवार पर निर्भर करता है। किन्तु इस उप चुनाव में भ्रष्टाचार कोई खास मुद्दा नहीं बनने वाला। क्योंकि यहां क्षेत्रीय विकास के मायने बहुत महत्वपूर्ण रहेंगे जैसा अब तक का रूझान सामने आ रहा है। बल्कि एक और फैक्टर इस दौरान के चुनाव में यहां बहुत अधिक काम करेगा। वह है सहानुभूति। यदि सहानुभूति वाला फैक्टर यहां सामने आ गया तो चुनाव के परिणाम 23 नवम्बर को अप्रत्याशित ही आयेंगे।

कुलमिलाकर केदारनाथ विधानसभा उप चुनाव में सहानुभूति, भीतरघात और पूर्व के विकास कार्यों के बलबूते पर मतदान होने वाला है। बस आप और हम चुनावी रंणभूमि के रंणबांकुरो की जीत का इन्तजार कर रहे है।

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