बर्फ कैसे गिरे, कैसे टिके, तीन उत्पादन खतरनाक।
जाड़ों में बर्फ न गिरना, सूखा, अतिवृष्टि जैसी चरम मौसमी आफतों के लिए मुख्यरूप से तीन कारक जिम्मेदार बताए जा रहे हैं। हीटवेव प्रदूषण के मामले में भारत दुनिया में पांचवें स्थान पर पहुंच गया है।
हाल ही में प्रकाशित एक अध्ययन में वर्ष 2000 से 2023 के बीच दुनिया में कई ग्रीष्म लहरों का सीधा सम्बंध बड़ी जीवाश्म ईंधन कंपनियों से पाया गया है। शोध के अनुसार लगभग एक-चौथाई ग्रीष्म लहरें कोयला, तेल और गैस उत्पादन करने वाली बड़ी ऊर्जा कंपनियों के उत्सर्जन से पैदा होती हैं। प्रख्यात मौसम विज्ञानी यान क्विलकाइल का मानना है कि ये तीन बड़े कार्बन उत्सर्जक अनवरत ग्रीष्म लहरों को खतरनाक स्तर तक पहुंचा रहे हैं। इसके अलावा बीच-बीच में युद्धक विस्फोट स्थिति को और गंभीर बना रहे हैं।
यदि मानव-जनित ग्लोबल वार्मिंग न हुआ होता तो 2000 से 2023 के बीच दर्ज की गई 213 ग्रीष्म लहरों में से एक-चौथाई से ज्यादा घटनाएं होती ही नहीं। चौंकाने वाली बात यह भी है कि इन उद्योगों के उत्सर्जन ने 53 ग्रीष्म लहरों की संभावना को 10,000 गुना तक बढ़ा दिया।
जलवायु आपदाओं की जिम्मेदार सऊदी अरामको, गजप्रोम और भारत-चीन के बड़े कोयला व सीमेंट उत्पादक उद्योग हैं। इनसे संबंधित 180 कार्बन मेजर उद्योगों को अब तक के लगभग 57 प्रतिशत ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार पाया गया है। अन्य बड़े प्रदूषकों में सोवियत संघ के पुराने उद्योग, एक्सॉन मोबिल, शेवरॉन, ईरान की राष्ट्रीय तेल कंपनी, ब्रिटिश पेट्रोलियम और शेल शामिल हैं।
विज्ञानियों ने लोकल स्तर पर मौसम में खतरनाक बदलाव के लिए जंगलों का कटान और धरती का खदान माना है। विज्ञानियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकारें जलवायु परिवर्तन करने वाले कारकों पर शीघ्र लगाम नहीं लगाती हैं तो आने वाले छह सालों में विनाशक घटनाएं होंगी।
भारत में जल, वायु, ध्वनि के अलावा सरकारी जुबानी प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है।







