Saturday, September 12, 2026
Home lifestyle स्मृति शेष : तेरी –मेरी टिहरी और उसकी कांग्रेस ।

स्मृति शेष : तेरी –मेरी टिहरी और उसकी कांग्रेस ।

तेरी –मेरी टिहरी और उसकी कांग्रेस।

By – Rakesh Mohan Thapliyal 

कई लोगों से पता चला कि, आज टिहरी का जन्म दिन है और नई टिहरी व्यापार मंडल के नए निर्वाचित अध्यक्ष भुला राजेश ड्यूंडी ने बताया कि ,आज कांग्रेस का स्थापना दिवस भी है और उन्होंने कांग्रेस को बधाई भी दी है ,वर्ना वैसे तो वो कांग्रेस की टांग खींचने का कोई मौका छोड़ते नहीं हैं । राजनीति के महाभारत में बीजेपी और कांग्रेस ये ही कौरव -पांडव हैं , तो ये खुद ही डिसाईड करलें कि, कौन क्या है । अन्याय के खिलाफ कौन लड़ रहा है । तुम कुश्ती लड़ों , हम कपड़े सँभालते हैं , क्योंकि कुर्सी तुम्हें ही मिलनी है और हमने तो सिर्फ प्रजातंत्र का बोझा ही बोकना है । मै अनाड़ी तू खिलाड़ी ।

तो पहले बात करते हैं अपनी टिहरी की , एक मित्र पुरानी टिहरी लिखने पर बड़ी नाक -भौ सिकोड़ते हैं और ऐतराज करते हैं कि, पुरानी टिहरी मत लिखा करो । खैर डाम बनने से जिले के बुबा का तो कुछ नहीं बिगड़ा पर शहर का बेड़ा गर्क हो गया,सत्यानाश हो गया ।

भाई अब जब सभी बसों पर ऋषिकेश से नई टिहरी ही लिखा है तो हम क्या करें ? टिहरी लिखेंगे तो कहीं कोई ड्राइवर , रात को झांझ में न जाने क्या सोचे और क्या समझे और कहीं बस झील में न घुसा दे और फिर बोले “ भुला मैंन सोचि की या ऑल वेदर रोड न हो माचु पाणी का पेट ह्वेक टीरी हो जाणी। मै झांझ म थौ भुला कोटि कालोनी का अगाड़ी मै पाणी पूणी कुछ नि दिखेणी। मै लगी कुरेडू लग्युं त मैन स्पीड कम करी अर घुसौ बस पाणी म ।

अभी हाईकोर्ट केआदेश से ,भूमि अध्याप्ति अधिकारी कार्यालय ने पुराणी टिहरी के वार्ड नंबर 3-4 आदि का मुआवजा शहर डूबने के 12-13 साल के बाद 5 रू. वर्ग गज के स्थान पर अब 30 रु. की दर से उसका पुन: भुगतान करने वाला है । अब यदि नए पुराने का चक्कर / स्पष्टीकरण न हो तो ऐसा न हो कि, नई टिहरी वाले भी मुआवजा लेने पहुँच जाएँ ?

मित्रों सुना है कि, टिहरी बसने की शुरुआत 1815 में हुई थी । कविवर श्री. गुमानी पंत ने टिहरी बसने की कहानी 3 पदों में बयान की थी , जिसे महाराजा श्री. सुदर्शन शाह ने बसाया था , जहाँ तब मूल रूप से धुनारों की बस्ती हुआ करती थी और उसका नाम शुरू में विशुद्ध संस्कृत में त्रिहरी रखा गया था जो बाद में बिगड़कर टिहरी / टेहरी और शार्टकट में और छोटा होकर टीरी हो गया । यदि त्रिहरी ही रहता तो फिर हम टिर्याळ कैसे कहाते ।

वकील साहब श्री. महावीर प्रसाद गैरोलाजी, दार्शनिक और साहित्यकार भी थे ,उन्होंने टिहरी का जन्मदिन मनाने की परंपरा शुरू की थी । हनुमानजी के मंदिर में रोट काटा जाता था और पूजा-पाठ भी होता था ।

देहरादून में भुला शिवानंद पांडे शहरी विस्थापित क्षेत्र में तो भुला सुबोध अपने घर में मनाते थे / हैं,क्योंकि इस बार पांडेजी तो मना नहीं पाए , बाकी सुबोध का शाम को पता चलेगा ? सुबोध ने अपने घर के आँगन में मिनिएचर टेहरी बनाई/ बसाई है,हूबहु= सेम टू सेम और अभी भी काम चल ही रहा है । सलमान खान का टाईगर जिंदा है तो भुला सुबोध की टिहरी जिन्दा है । भुला के जोश ,जूनून और जज्बे को सलाम ।

भुला हेमू घई और उनके जैसे कुछ अन्य युवा भी सोशियल मीडिया में पुरानी तस्वीरों के माध्यम से टिहरी और उसकी यादों को जिंदा रखने की कोशिश में जुटे रहते हैं , कुछ लोगों ने सोशियल मीडिया पर ऐसी कई साईटें भी बना रखी हैं जैसे कि, त्रिहरी-त्रिहरी, न्यू टेहरी आदि । तोभुला तुम सबके प्रयासों/ कोशिशों को भी सलाम और साधुवाद तो भुला अपनी जन्मभूमि और कर्मभूमि के जन्म-दिवस की समस्त टिहरी वासियों को बधाई और मुबारकबाद । तुम अब भी हमारे दिलों में बसती और राज करती हो, तुम्हारी यादअक्षुण है।

अब बात आई कांग्रेस के स्थापना दिवस की तो टिहरी में भी पहले श्री. मानवेन्द्र शाहजी,श्री. वीरेन्द्र दत्त सकलानीजी , श्री.प्रेमदत्त डोभालजी, श्री.खुशहाल सिंह रांगड़जी , श्री त्रेपन सिंह नेगीजी , श्री सच्चितानंद पैन्यूलीजी , श्री.प्रेमलाल वैद्यजी ,सरदार श्री. प्रेम सिंहजी , श्री.भूदेव लखेड़ाजी , श्रीमती सौभाग्यवती गैरोलाजी, श्रीमती रामेश्वरी सजवाणजी , श्री .भुरू मियां “ नेताजी”, श्री.लोकेन्द्र दत्त सकलानीजी,चचा श्री. पूरब सिंह नेगी जैसे कांग्रेसी थे । जो बाद में इंदिराजी के मोम की गुड़िया से रणचंडी बनने पर नई और पुरानी कांग्रेस में बंट गए ।

श्री.परिपूर्णानन्द पैन्यूलीजी टिहरी से सांसद बने तो श्री. लोकेन्द्र दत्त सकलानीजी व श्री गोविंद प्रसाद गैरोलाजी भी विधायक भी रहे और फिर श्री. बनमाली प्रसाद पैन्यूलीजी , श्री. गुलशन आनंद , श्री. कमल सिंह असवालजी, श्री. भवानी बिज्ल्वाण भाई , श्री. ज्योति भट्टजी , श्री. गजेंद्र असवालजी जैसे नए लोगों का जमाना आया । इनमे कई युवा कांग्रेस के माध्यम से आये । श्री. शूरवीर सजवाणजी अध्यापक से विधायक बने और टी.एच. डी.सी पर छा गए । वे अपने। गुरु और अपने क्षेत्रवासियों से ही भिड़ गए और 3 बार विधायक रहे।

टिहरी छोड़ने के काफी बाद याकूब सिद्दकी की भी खूब चर्चा सुनी ,उसने केन्द्रीय मंत्री श्री. जाफर शरीफजी को पता नहीं कहाँ से पकड़ा और उनके नाम से खूब डंका बजाया, अधिकारियों को हड़काया फिर किशोर भाई का टिहरी की राजनीति में अवतरण हुआ व सजवाण और उपाध्याय फिर एक म्यान में 2 तलवारें हो गई ।

टिहरी डूबने के बाद उधर मियां मंजूर बेग देहरादून में बैठकर अल्प संख्यक आयोग या समिति के पदाधिकारी हो गए तो इधर नई टिहरी में नई पीढ़ी के श्री. मुजफ्फर हसन, श्री. शफीक, श्री .नसीम और उनके साथी श्री. हरीश रावतजी के राज में नई टिहरी में कांग्रेस का परचम लहराने लगे साथ में श्री. आकाश कृशाली और श्री. महावीर भट्ट जैसे कुछ तेज तर्रार युवा भी जुड़ गए पर 2014 में दिल्ली का तख़्त और 2017 में उत्तराखंड का राज दोनों कांग्रेस के हाथ से फिसल गए ।

समय अपनी गति से चलता रहा और सत्ता बदलती रही । रावतजी किशोर को सबक सिखाने के चक्कर में खुद ही निपट गए । आखिर में न नौटंकी काम आई और न नुमायश ,चाहे जलेबी तली या रोटी पकाई । उन्होंने तिवारीजी के लिए जो बोया ,वही खुद भी काटा ।

वर्ष 2017 में राहुल बाबा ने यूपी में साईकल की सवारी की पर वह पंचर निकली पर गुजरात में मोदीजी के लिए तूफान खड़ा कर दिया और बीजेपी की सिट्टी-पिट्टी गुम करदी ,वो तो मणिशंकर न होते और मोदीजी खुद खून पसीना न बहाते तो गई थी भैंस पानी में ।

भले ही अब राजेश ड्यूंडी कुछ भी कहे पर आंकड़े गवाही देते हैं । चलो राहुलजी अध्यक्ष बन गए ,उनकी तमन्ना पूरी हो गई ,यही काफी है ।

तो भुला टिहरी को जन्म-दिन की और वहां की कांग्रेस को स्थापना दिवस की बधाई और कांग्रेस को बधाई देनेवाले श्री. राजेश ड्यूंडी को नई टिहरी के व्यापार मंडल का अध्यक्ष बनने पर बधाई ।

पता नहीं कितने नाम छूट गए, तथ्य गड्ड-मड्ड हो गए, उसके लिए क्षमायाचना है ।

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