Sunday, June 28, 2026
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देहरादून में लोकतंत्र बचा, बाकी में लुट गया।

By – Gajendra Rawat

– धामी ने मोदी से दिल्ली मे 29वीं भेंट का रास्ता खोल दिया है.

– प्रीतम सिंह और रंजीत रावत का परिवार जीत सकता है तो बाकी को क्या हो गया?

देहरादून के जिला पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की सीट जीतने के लिए कांग्रेस ने जो रणनीति बनाई वही काम भाजपा की तर्ज पर अगर पूरे प्रदेश में किया होता तो जो लोकतंत्र की हत्या की बात की जा रही है निश्चित रूप से उसका परिणाम देहरादून जैसा होता. देहरादून जीतने के लिए जिस प्रकार का माद्दा दिखाया गया वह पूरे प्रदेश में क्यों नहीं दिखा यह सवाल राहुल गांधी से लेकर शैलजा कुमारी से भी पूछा जाना चाहिए.
भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का कहना है कांग्रेस ने 12 मे से सिर्फ 4 जिलों मे प्रत्याशी उतारे. लगातार दो विधानसभा और तीन लोकसभा चुनाव मे जनता द्वारा बुरी तरह दुत्कारे जाने के बाद कांग्रेस के पास जब जिला पंचायत अध्यक्ष उपाध्यक्ष लड़ने के लिए लोग नहीं बचे तो 2027 के लिए कहां से लेकर आएंगे?
यह हालत तब है जबकि भारतीय जनता पार्टी कांग्रेसियों को भाजपा में शामिल करने को लेकर आज भी पुरजोर तरीके से लगी हुई है.
जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में 12 में से 10 सीटें भाजपा (1 होल्ड) तथा ब्लॉक प्रमुख चुनाव में 89 में से 60 सीटें झटककर भाजपा ने 2027 के सेमीफाइनल मे बढ़त ले ली है. जो कल नैनीताल मे हुआ वो हर पंचायत चुनाव मे सालों से चल रहा है कल हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया ये अच्छी बात है.
इस पंचायत चुनाव मे कांग्रेस पार्टी के मित्र विपक्ष होने का एक बड़ा सबूत तब सामने आया जब टिहरी जनपद में भुत्तसी सीट से सीता देवी को रिटर्निंग ऑफिसर से लेकर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के बाद जनता की अदालत से जीतकर आने के बाद भी सीता को उन्होंने जिला पंचायत अध्यक्ष का प्रत्याशी नहीं बनाया. सीता देवी देश के इतिहास में सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट में हमेशा गिनी जाएगी उनका सन्दर्भ कोर्ट मे दिया जायेगा. इसके बावजूद कांग्रेस ने सीता को घर बिठाकर साबित किया कि उसके पास अभी भी ना तो ठोस रणनीतिकार है और नहीं राजनीति के समझ रखने वाले नेता.
देश में वर्षों तक राज करने वाली पार्टी के पास यदि जिला पंचायत और ब्लॉक प्रमुखों में जितवाने के लिए चेहरे नहीं है तो निश्चित रूप से उन्हें डोईवाला का वह मॉडल भी अपनाना पड़ेगा जिसके तहत 2022 में 27 हजार वोट से विधायक का चुनाव हारने वाले गिन्नी चौधरी ने अब डोईवाला ब्लॉक प्रमुख बनकर साबित कर दिया कि विधायक का चुनाव लड़ने से पहले धरातल पर न सिर्फ कार्यकर्ता चाहिए बल्कि वोट बैंक भी चाहिए.
पंचायत के इन परिणाम से मुख्य मित्र विपक्षी दल क्या कोई सबक लेगा या फिर इसी राह पर 2027 को भी खोकर हार की हैट्रिक मारेगा
लोकतंत्र की मजबूती के लिए विपक्ष का मजबूत होना बेहद जरूरी है यह बात अभी भी मित्र विपक्ष को समझनी ही होगी.

(लेखक राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार)

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