Sunday, June 28, 2026
Home देहरादून टमाटर में दैहिक विकार Physiological Disorders

टमाटर में दैहिक विकार Physiological Disorders

टमाटर में दैहिक विकार Physiological Disorders

@डा० राजेंद्र कुकसाल

1 ब्लासम ड्राप – फूलों का झड़ना –
अत्यधिक तापमान एवं सूखे की अवस्था में यह विकार उत्पन्न होता है, जिसके कारण टमाटर में परागण की समस्या उत्पन्न होती है एवं फूल सूख कर झडने लगते हैं।

प्रबंधन – गर्मियों के मौसम में नमी की कमी न होने दें। पौली हाउस में तापमान 30° सैन्टीग्रेड से ऊपर न जाने दें।

Tamatar
Tamatar

2 फलों का फटना –
टमाटर में फलों का फटना एक आम समस्या है, जिसके कारण किसानों को बाजार में उचित मूल्य नहीं मिल पाता। टमाटर के फलों में दो प्रकार की फटने की समस्या आती है एक फल के ऊपरी भाग में डंठल के चारों ओर तथा दूसरी टमाटर के ऊपरी भाग से नीचे की ओर प्रथम प्रकार के फटने की समस्या अधिक पाई जाती है।

प्रबंधन -इसकी रोकथाम के लिए खेत में लगातार नमी बनाये रखना आवश्यक है। इसके अतिरिक्त तीन बार 0.3 प्रतिशत बोरेक्स (3 ग्राम बोरेक्स प्रति लीटर पानी) का छिड़काव फल लगने के समय इसके 15 दिनों के बाद तथा जब फल पकने शुरू हो जाए तब किया जाना चाहिए।

3 सनस्केल्ड –
यह एक दैहिक विकार है जिसमें फलों पर पीले या सफेद छाले उभर आते हैं। इसकी रोकथाम के लिए तापमान को 24 ° सेन्टिग्रेड .से अधिक नहीं बढ़ने देना चाहिए। इस समस्या का मुख्य कारण फलों पर गर्मी के मौसम में सूर्य के अधिक प्रकाश पड़ने पर फलों की त्वचा का जल जाना है जिससे फलों में लाल रंग बनने की क्रिया समाप्त हो जाती है तथा फल पीले, सडे व छाले युक्त दिखाई पड़ते हैं।

physiological-disorders
physiological-disorders

प्रबंधन -इसकी रोकथाम के लिए फलों को सूर्य की पड़ने वाली सीधी किरणों से बचाना चाहिए। ऐसी किस्मों का प्रयोग किया जाना चाहिए जिनमें पौधों की वानस्पतिक वृद्धि/पत्तों की बढ़वार अच्छी हो तथा फलों को पत्तियों के नीचे छाया में रख कर अधिक तापमान के कारण होने वाले विकार से बाचाया जा सके।

4 कैटफेसिंग –
अधिक ठंड व कम तापमान के कारण कई बार फूलों में पर-परागण के कार्य में किसी प्रकार का अवरोध आ जाने के कारण फल की आकृति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। अधिक ठंड में फलों की आकृति में बदलाव आ जाता है जिसके कारण कई फल तो चोचदार बन जाते हैं जो देखने में ठीक नहीं लगते हैं।

प्रबंधन -कैटफेसिंग से बचने के लिए पौधों को ठंड से बचाना आवश्यक है। छोटे फलों के आकार वाली प्रजाति का उपयोग करें।मलचिंग के प्रयोग करने से कैटफ़ेस से बचा जा सकता है।

5 पफीनैस(खोखलापन) –
तापमान के उतार चढ़ाव एवं नाइट्रोजन की अत्यधिक मात्रा देने के कारण यह विकार उत्पन्न होता है। फलों के आकार में गिरावट आने से फल बहुत छोटे बन जाते हैं। ऐसे फल पिलपले व खोखले से दिखाई पडते हैं। फलों में पानी की मात्रा में भी कमी आ जाती है तथा फलों का भार कम हो जाता हैं। ऐसे फल उन पौधो पर लगते हैं जहां भूमि की तैयारी करते समय खेत के कोने ऊँचे रह जाते है तथा पौध रोपाई के पश्चात् ऐसे कोने व असमतल भूमि में पौधों की जड़ों को सीमित पानी मिलता है तथा पौधों की बढ़वार में भी कमी आती है। ऐसी अवस्था से पौधों को कम पानी मिलने के कारण फल का फैलाव नहीं हो पाता तथा फल खोखला सा बन जाता है व थोड़ा सा दबाने पर पिचक जाता है।

प्रबंधन -पफीनेस से बचने के लिए खेत की तैयारी करते समय सुहागा लगा कर भूमि को एक समान व समतल बना कर मेढो को बनाना चाहिए। नाइट्रोजन की उचित मात्रा का प्रयोग करें।

6 बलोज़म इड रोट-
टमाटर का ब्लॉसम-एंड रॉट एक शारीरिक रोग है, इस रोग में टमाटर के फल के फूल के सिरे पर एक बड़ा, भूरा से काला, सूखा, चमड़े जैसा क्षेत्र होता है। यह विकार उन स्थानों पर अधिक मिलता है जहां पर भूमि में कैल्शियम तत्त्व की कमी पाई जाती है। कभी-कभी नाइट्रोजन की अत्यधिक मात्रा होने के कारण भी यह विकार होता है।पौली हाउस में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है।

physiological-disorders
physiological-disorders

पौधे भूमि से पानी द्वारा पोषक तत्वों को अवशोषित करते हैं खेत में नमी न होने पर अधिक तापमान या अन्य कारणो से पौधे आवश्यकता अनुसार कैल्सियम ग्रहण नहीं कर पाते जिससे फलो में ब्लौसम एण्ड रौट दिखाई देता है।

प्रबंधन -कैल्शियम युक्त उर्वरकों का उपयोग करें।भूमि में हमेशा नमी बनाये रखें इसके लिए समय समय पर सिंचाई करते रहें साथ ही मल्चिंग करें।

RELATED ARTICLES

अतीत का प्रतिशोध नहीं लिया जा सकता, उसे केवल समझा जा सकता है : IAS शशि रंजन कुमार

By - Prem Pancholi ।। अतीत हमारी स्मृतियों में, खंडहरों में, और उन तरीकों में जीवित रहता है जिनसे वह आज भी हमारे अस्तित्व को...

देहरादून : धामी कैबिनेट की बैठक संपन्न, खास विषयों पर त्वरित निर्णय

।। राज्य कैबिनेट ने कुल 12 प्रस्तावों को दी मंजूरी ।। उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा संशोधन नियमावली-2026 को मंजूरी दी, जिसके तहत संस्कृत विद्यालयों की मान्यता,...

इतिहास के पन्नो से : अपना दायां अंगूठा दिखाना चाहिए और हम दिखायेंगे भी – दादा दौलतराम खुगशाल

By - dr. Arun Kuksal   दादा दौलतराम खुगशाल (मार्च, 1891- 3 फरवरी, 1960) टिहरी रियासत के विरुद्ध जन-संघर्षों का अग्रणी व्यक्तित्व- ‘‘आज तक राजा ने हमको पढ़ने-लिखने...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

एथलीट संदीप गुसाई बना उत्तरकाशी विधिक सेवा प्राधिकरण एंबेसडर

जनसामान्य में नशा उन्मूलन, विधिक जागरूकता, सामाजिक उत्थान एवं खेलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, उत्तरकाशी द्वारा संदीप गुंसाई...

अतीत का प्रतिशोध नहीं लिया जा सकता, उसे केवल समझा जा सकता है : IAS शशि रंजन कुमार

By - Prem Pancholi ।। अतीत हमारी स्मृतियों में, खंडहरों में, और उन तरीकों में जीवित रहता है जिनसे वह आज भी हमारे अस्तित्व को...

सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स को उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद से लेनी पड़ेगी अनुमति

चारधाम यात्रा की गरिमा, सुरक्षा और शुचिता बनाए रखने हेतु सोशल मीडिया कंटेंट निर्माण के संबंध में शासन से दिशा निर्देश जारी हुए हैं।...

देहरादून : धामी कैबिनेट की बैठक संपन्न, खास विषयों पर त्वरित निर्णय

।। राज्य कैबिनेट ने कुल 12 प्रस्तावों को दी मंजूरी ।। उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा संशोधन नियमावली-2026 को मंजूरी दी, जिसके तहत संस्कृत विद्यालयों की मान्यता,...

इतिहास के पन्नो से : अपना दायां अंगूठा दिखाना चाहिए और हम दिखायेंगे भी – दादा दौलतराम खुगशाल

By - dr. Arun Kuksal   दादा दौलतराम खुगशाल (मार्च, 1891- 3 फरवरी, 1960) टिहरी रियासत के विरुद्ध जन-संघर्षों का अग्रणी व्यक्तित्व- ‘‘आज तक राजा ने हमको पढ़ने-लिखने...

जिलाधिकारी के शख्त निर्देश, कहा आपदा के दौरान सभी विभाग बनायें समन्वय

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जनपद देहरादून में आगामी मानसून एवं संभावित आपदा परिस्थितियों के दृष्टिगत आपदा प्रबंधन संबंधी...

जब वरिष्ठ पत्रकार चारू तिवारी ने वैज्ञानिक डी० डी० पंत को देखा

सुप्रसिद्ध भौतिकशास्त्री और हिमालय के चिंतक प्रो. डीडी पंत की पुण्यतिथि (11 जून, 2008) पर विशेष हमारे हिस्से के प्रो. डीडी पंत - चारु तिवारी By...

केतन लाल की निर्मम हत्या की चहुंओर चर्चा, समाज पर बड़ा कलंक।

By - Prem Pancholi   सोशल मीडिया पर जिस तरह से प्रतापनगर के ओण पट्टी के देवल गांव निवासी अनुसूचित जाति के किशोर केतन लाल की...

आपदाओं के प्रभाव को न्यूनतम करने के लिए सरकारी वर्जिश

वैज्ञानिक योजना, कुशल प्रशासन और समयबद्ध निर्णय प्रक्रिया के जरिए आपदाओं के प्रभाव को न्यूनतम करने का प्रयास किया जा रहा है।” उन्होंने कहा कि...

पर्यावरण दिवस : पद्मश्री प्रेमचंद शर्मा ने किया कृषि अनुसंधान संस्थान में वृक्षारोपण

विश्व पर्यावरण दिवस पर IATR देहरादून में पौधारोपण एवं गोष्ठी का आयोजन। पद्मश्री प्रेम चंद शर्मा ने छात्रों को मोरिंगा और पंच पल्लव के...