Sunday, June 28, 2026
Home विविध माई नि मेरिये...सिड्डू खाणा जरूर

माई नि मेरिये…सिड्डू खाणा जरूर

माई नि मेरिये…सिड्डू खाणा जरूर

@Manu Panwar


 

सिड्डू हिमाचल प्रदेश के सबसे लोकप्रिय पकवानों में से है। इनमें से भी अगर कुल्लुवी सिड्डू हो तो अहा ! फिर तो कहना ही क्या !!! कुल्लुवी सिड्डू को हिमाचली सिड्डू में इलीट अर्थात् अभिजात्य का दर्जा हासिल है। इसकी वजह है इसे बनाने का तरीका और इसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री। ये बात हमें तब पता चली जब हम पहुंचे कुल्लू में अपने परिचित सूद परिवार के घर। मंडी के बाद अपना अगला ठिकाना कुल्लू ही था।

जिन्हें पता न हो, उन्हें बता दूं कि हिमाचल प्रदेश में सूद जो हैं, वो बिजनेस कम्यूनिटी है। मल्लब व्यापार इनके खून में है। ये लोग मूल रूप से कांगड़ा जिले के परागपुर से हैं लेकिन पूरे हिमाचल में फैले हुए हैं और कांगड़ा से लेकर शिमला तक बिजनेस में खासा नाम और दाम दोनों कमा रहे हैं।

कुल्लू में हमारी मेजबान थीं हमारी परिचित श्वेता सूद। वैसे तो हिमाचली डिश सिड्डू का स्वाद अपने मित्र Nishant Dhiman के साथ एकाध बार किसी हिमाचली उत्सव में चख चुका था, लेकिन कुल्लवी सिड्डू पहली बार कुल्लू में श्वेता सूद के परिजनों के सौजन्य से प्राप्त हुआ।

कुल्लू के सिड्डू की बात ही निराली है। इसकी जो स्टफिंग होती है वो ड्राई फ्रूट्स और खसखस के मिश्रण से तैयार की जाती है। हमारे मेजबान सूद परिवार ने अखरोट, खसखस, बादाम की गिरी, मूंगफली की गिरी के मिश्रण के साथ हमारे लिए सिड्डू तैयार किया। सबसे खास बात ये है कि सिड्डू स्टीम्ड फूड है। मतलब इसे स्टीमर में रखकर स्टीम किया जाता है। मतलब भाप से पकाया जाता है।

कुल्लुवी सिड्डू का टेस्ट जितना बेमिसाल है, इसे पकाने में उतनी ही ज्यादा मेहनत, ज्यादा समय और ज्यादा धैर्य की जरूरत होती है। हां, लेकिन खाते वक्त धैर्य जवाब दे जाता है। ऐसा लगता है कि बस खाते जाओ, खाते जाओ। हम भी सूद परिवार के हाथों से बना इतना सिड्डू दाब गए कि कोई गिनती ही नहीं है।

असल में सिड्डू बहुत हल्का भोजन है। आपको इसे खाकर भारीपन महसूस नहीं होता। सिड्डू को खाने का तरीका भी बड़ा दिलचस्प है। घर में तैयार घी में जैसे ही आप सिड्डू को डुबोते हैं और फिर उसे अपनी जिह्वा पर धरते हैं तो उसका स्वाद खाने वाले के लिए ‘गूंगे का गुड़’ मुहावरे की तरह हो जाता है।

Seedu
Seedu

सिड्डू और घी का नाता मेड फॉर ईच अदर टाइप है। हिमाचल के प्रसिद्ध लोकगायक किशन सिंह सहगल ने तो इसे अपने एक लोकप्रिय सिरमौरी गीत में बिम्ब की तरह इस्तेमाल किया है, जिसकी पंक्तियां मुझे मित्र और बड़े भाई जैसे Mohan Sahil के सौजन्य से मिली हैं।

‘नाचना उछा छुबीये
बाँठने बोलो तेरे मुजरे आए

मुजरे दा बोलो पावणा ढोबो
ढोबो सिड़ो साथे घिओ।’

इसका हिंदी में तर्जुमा कुछ इस तरह से हुआ- “हम तुम्हारे नृत्य आयोजन में आए है। हमें उन्मुक्त होकर नाचना है। जैसे सिड्डू के साथ घी जंचता है, वैसे ही नृत्य आयोजन में मेहमान जँचता है।’

सिड्डू बेहद लोकप्रिय पकवान तो है ही, उदार और लोकतांत्रिक भी है। उसमें ‘अहं ब्रह्मास्मि’ वाला भाव नहीं है। वह खुद भी कई सामग्रियों के गठजोड़ से बना है और उसे अपने होने का अहसास कराने के लिए देसी घी से लेकर टमाटर और हरे धनिये की चटनी की जरूरत पड़ती है। इनके साथ मिलकर वो स्वाद का ऐसा तगड़ा गठबंधन तैयार करता है कि बस पूछिए मत !

हम खुशनसीब रहे कि सूद परिवार ने इतना समय खपाकर और बड़े स्नेह से ये सब तैयार किया। वरना तो सिड्डू बनाने की प्रक्रिया काफी टाइम टेकिंग है। बिना छिलके वाली उड़द की दाल को अच्छे से धोकर करीब दो घंटे तक भिगोये रखना। फिर आटा गूंथना। खमीर लगाना। अखरोट और ड्राई फ्रूट्स पीसना। जब आटा फूल जाए तब इसकी स्टफिंग करना। सिड्डू को स्टीम करना। ये सब एक लंबी प्रक्रिया का हिस्सा है।

तो अगर हिमाचल प्रदेश के लोक जीवन को देखना-जानना-समझना चाहते हों तो पहले सिड्डू से मिल लीजिए। मज़ा आ जाएगा।

लेखक : वरिष्ठ टेलीविजन पत्रकार है

RELATED ARTICLES

जब वरिष्ठ पत्रकार चारू तिवारी ने वैज्ञानिक डी० डी० पंत को देखा

सुप्रसिद्ध भौतिकशास्त्री और हिमालय के चिंतक प्रो. डीडी पंत की पुण्यतिथि (11 जून, 2008) पर विशेष हमारे हिस्से के प्रो. डीडी पंत - चारु तिवारी By...

केतन लाल की निर्मम हत्या की चहुंओर चर्चा, समाज पर बड़ा कलंक।

By - Prem Pancholi   सोशल मीडिया पर जिस तरह से प्रतापनगर के ओण पट्टी के देवल गांव निवासी अनुसूचित जाति के किशोर केतन लाल की...

विश्लेषण : आखिर ज़ेन-जी (Gen-Z) पैसा क्यों नहीं बचा रही?

फाइनेंशियल निहिलिज्म (Financial Nihilism): आखिर ज़ेन-जी (Gen-Z) पैसा क्यों नहीं बचा रही? Dr. Nitin Upadhyay ।। आजकल अक्सर सुनने को मिलता है—"आजकल के बच्चे सेविंग्स नहीं...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

एथलीट संदीप गुसाई बना उत्तरकाशी विधिक सेवा प्राधिकरण एंबेसडर

जनसामान्य में नशा उन्मूलन, विधिक जागरूकता, सामाजिक उत्थान एवं खेलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, उत्तरकाशी द्वारा संदीप गुंसाई...

अतीत का प्रतिशोध नहीं लिया जा सकता, उसे केवल समझा जा सकता है : IAS शशि रंजन कुमार

By - Prem Pancholi ।। अतीत हमारी स्मृतियों में, खंडहरों में, और उन तरीकों में जीवित रहता है जिनसे वह आज भी हमारे अस्तित्व को...

सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स को उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद से लेनी पड़ेगी अनुमति

चारधाम यात्रा की गरिमा, सुरक्षा और शुचिता बनाए रखने हेतु सोशल मीडिया कंटेंट निर्माण के संबंध में शासन से दिशा निर्देश जारी हुए हैं।...

देहरादून : धामी कैबिनेट की बैठक संपन्न, खास विषयों पर त्वरित निर्णय

।। राज्य कैबिनेट ने कुल 12 प्रस्तावों को दी मंजूरी ।। उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा संशोधन नियमावली-2026 को मंजूरी दी, जिसके तहत संस्कृत विद्यालयों की मान्यता,...

इतिहास के पन्नो से : अपना दायां अंगूठा दिखाना चाहिए और हम दिखायेंगे भी – दादा दौलतराम खुगशाल

By - dr. Arun Kuksal   दादा दौलतराम खुगशाल (मार्च, 1891- 3 फरवरी, 1960) टिहरी रियासत के विरुद्ध जन-संघर्षों का अग्रणी व्यक्तित्व- ‘‘आज तक राजा ने हमको पढ़ने-लिखने...

जिलाधिकारी के शख्त निर्देश, कहा आपदा के दौरान सभी विभाग बनायें समन्वय

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जनपद देहरादून में आगामी मानसून एवं संभावित आपदा परिस्थितियों के दृष्टिगत आपदा प्रबंधन संबंधी...

जब वरिष्ठ पत्रकार चारू तिवारी ने वैज्ञानिक डी० डी० पंत को देखा

सुप्रसिद्ध भौतिकशास्त्री और हिमालय के चिंतक प्रो. डीडी पंत की पुण्यतिथि (11 जून, 2008) पर विशेष हमारे हिस्से के प्रो. डीडी पंत - चारु तिवारी By...

केतन लाल की निर्मम हत्या की चहुंओर चर्चा, समाज पर बड़ा कलंक।

By - Prem Pancholi   सोशल मीडिया पर जिस तरह से प्रतापनगर के ओण पट्टी के देवल गांव निवासी अनुसूचित जाति के किशोर केतन लाल की...

आपदाओं के प्रभाव को न्यूनतम करने के लिए सरकारी वर्जिश

वैज्ञानिक योजना, कुशल प्रशासन और समयबद्ध निर्णय प्रक्रिया के जरिए आपदाओं के प्रभाव को न्यूनतम करने का प्रयास किया जा रहा है।” उन्होंने कहा कि...

पर्यावरण दिवस : पद्मश्री प्रेमचंद शर्मा ने किया कृषि अनुसंधान संस्थान में वृक्षारोपण

विश्व पर्यावरण दिवस पर IATR देहरादून में पौधारोपण एवं गोष्ठी का आयोजन। पद्मश्री प्रेम चंद शर्मा ने छात्रों को मोरिंगा और पंच पल्लव के...