Sunday, September 13, 2026
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सर्वभाषा राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में “रवांल्टी” कविता की धूम

“सर्वभाषा राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में “रवांल्टी” कविता की धूम”

उड़ीसा के भुवनेश्वर में हुए तीन दिवसीय अखिल भारतीय साहित्य परिषद के राष्ट्रीय सर्वभाषा साहित्य सम्मेलन में उत्तराखंड की रवांल्टी लोक भाषा में रचित “मीठू बोल” नामक कविता का पाठ कवि भारती आनंद “अनंता” ने किया है।

Poem rawanli
Poem rawanli

बता दें कि इस दौरान भारत के विभिन्न प्रांतों क्रमशः उत्तराखंड, उड़ीसा, तमिलनाडू, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, गोवा, मध्यप्रदेश, केरल, असम, कर्नाटका,  गुजरात, उत्तरप्रदेश, हिमाचल आदि राज्यों से आए साहत्यकारो ने अपने अपने राज्य की आंचलिक भाषा में कविता पाठ किया। कविता पाठ को लेकर उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व उद्घोषिका व कवि भारती आनंद “अनंता” ने किया है। श्रीमती भारती ने गढ़वाल की रवांल्टी बोली पर आधारित स्वरचित कविता “मिठू बोल” का पाठ किया है। सौहार्द, प्रेम और परस्परता की सफल कहानी को बुनती यह कविता हर पाठक को प्रेरित करती नजर आई है। “मिठू बोल” शीर्षक की कविता का जब भारती ने पाठ किया तो एक बारगी साहित्य सम्मेलन में बैठे सैकड़ों लोगो के आंखों में आंसू आ गए, और अंत तक तालियो और आंखों के मर्म ने कविता को मानवियता की साक्षात मूर्ति बताया।

सम्मेलन में पहुंचे अलग अलग प्रांतों के साहित्यकारों ने भारती की सिर्फ हौसलाफजाई नहीं की बल्कि इस तरह की कविता आज की आवश्यकता बताई है।कन्नड़ साहित्य के बहुत ही प्रतिष्ठित लेखक प्रेम शेखर, उड़िया सांस्कृतिक पक्षों के बहुत ही जाना पहचाना नाम प्रवीण कुमार ने बताया कि श्रीमती भारती की यह रवांल्टी लोक भाषा की कविता अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी सुनी जानी चाहिए।

उल्लेखनीय यह है कि उत्तराखंड के रवांई क्षेत्र की यह पहली कविता है जो राष्ट्रीय मंच पर हुए आंचलिक भाषाओं के कवि सम्मेलन में प्रस्तुत की गई है। कवि भारती ने बताया कि उसे जो मंच मिला है वह भी रवांई क्षेत्र के शब्दों को जोड़ने से मिला है। वह खुशनसीब है कि उसका जन्म रवांई के मुंगरा गांव में हुआ है। कहा कि वह अपनी दुधबोली में खूब लिखने का निरंतर प्रयास करेगी। उन्होंने अपनी इस कविता को लेकर कहा कि यह एक संदेशात्मक कविता है। यह कविता मौजूदा समय में बदलते परिवेश को आत्मचिंतन कराती है।श्रीमती भारती ने कहा कि यह संभव भी उनके रवांल्टी होने में हुआ है।

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