डाक विभाग वालो होश में आओ, नहीं तो देहरादून में आंदोलन के लिए तैयार रहो
By – Praveen bhatt
यूं तो लड़ने के लिए बहुत सी बातें हैं। बहुत से मुद्दे हैं जो संभवतः इससे भी बड़े हैं लेकिन इस बात को भी ज्यादा समय तक नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है, यह शर्मनाक, अशोभनीय और निंदनीय है कि भारतीय डाक विभाग से जुड़े अधिकांश डेस्क कर्मचारी अपनी विभागीय योजनाओं से अनभिज्ञ और लापरवाह हैं।
आपको ज्ञात होगा कि पूर्व में भारतीय डाक विभाग द्वारा प्रिंटेड बुक नाम से एक संचालित की जाती थी। इस योजना के अंतर्गत प्रकाशकों व वितरकों को यह सुविधा मिली हुई थी अपेक्षाकृत कम दरों पर किताबें पाठकों अथवा दूरस्थ क्षेत्र में कार्यरत पुस्तक विक्रेताओं तक भेजी जा सकती थी लेकिन केन्द्र सरकार द्वारा इसी वर्ष मार्च 2025 में इस योजना को बंद कर दिया गया।
इस बंदी के बाद हुए व्यापक विरोध के बाद केन्द्र सरकार ने पुस्तकों को भेजने के लिए नई योजना ज्ञान पोस्ट लांच की। 28 अप्रैल 2025 को संचार मंत्रालय डाक विभाग द्वारा इस नई योजना से संबंधित भारत का राजपत्र जारी किया गया। राजपत्र संख्या सी. जी. डी. एल. अ. 28042025-262728 को डाकघर द्वितीय संशोधन विनियम 2025 नाम दिया गया है।
ज्ञान पोस्ट से संबंधित इस सरकारी गजट में कुल 11 बिन्दु जिनमें पुस्तकों की परिभाषा, प्रकार आदि आदि को विस्तार से बताया गया है।
अब मुख्य बात संचार विभाग द्वारा जारी गजट के अनुसार 300ग्राम तक की ज्ञान पोस्ट भेजने की दर रु20, 301 ग्राम से 500 ग्राम तक रु 25, 510 ग्राम से 1000 ग्राम तक रु35, 1001 ग्राम से 2000 ग्राम तक रु 50, 2 किलो से तीन किलो तक रु 65, तीन किलो से 4 किलो तक रु 80 तथा 4 किलो से 5 केिलो तक रु 100 की दरें तय की गई हैं।
नई दरें लागू होने के तीन महीने बाद भी देहरादून के मुख्य डाकघर में जो कि उत्तराखंड राज्य का सबसे बड़ा डाकघर भी है इस योजना के विषय में लगभग सन्नाटा है।
यदि आप पैकेट पर अंकित करके भी ले जाएं कि उक्त पैकेट को ज्ञान पोस्ट के माध्यम से भेजा जाना है तो काउंटर के उस पार बैठा/बैठी कर्मचारी आपसे साफ यह कह दे रहा है कि ज्ञान पोस्ट नहीं हो पाएगा। प्रतिप्रश्न करने पर आपसे साफ कह दिया जा रहा है कि ज्ञान पोस्ट अभी सो नहीं हो रहा है। जबकि हकीकत यह है कि देश के व उत्तराखंड के अनेक भागों में ज्ञान पोस्ट आराम से बुक हो रहे हैं। अब रही बात ज्ञान पोस्ट से किताबें बुक न हो पाने से होने वाले नुकसान की।
ज्ञान पोस्ट से बुक होने पर किताबें बुक होने पर यह 20-25 रु में आराम से चली जाएंगी। जबकि अभी यह पार्सल से 50-100रु, रजिस्ट्री में 42-65रु और बुक पोस्ट में 30-50ः में जा रही है। इस अतिरिक्त का भार सीधे-सीधे पाठकों पर पड़ रहा है। समय साक्ष्य प्रकाशन चूंकि देहरादून से सबसे अधिक बुक पोस्ट करता है। अतः अप्रैल के बाद से हमें ही सबसे अधिक नुकसान हुआ है। ज्ञान पोस्ट लागू होने के बावजूद डाक विभाग वाले दोगुने से अधिक की वसूली कर रहे हैं।







