Sunday, September 13, 2026
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रामचरितमानस में भी राजनीतिक दृश्य कई हैं – इन्द्र ने सबसे अधिक षडयंत्र रचे है। कैसे? पढ़े यहां।

रामचरितमानस में भी राजनीतिक दृश्य कई हैं।

Govind P. Bahuguna

सब एक ही थैली के चट्टे बट्टे हैं। इन्द्र हों या देवेन्द्र What is in the name ?

देवता का मतलब जो शक्तिशाली है , जिसके हाथ में सत्ता है। देवताओं के राजा का नाम इन्द्र था। कोई उसको देवेन्द्र भी कहते थे, उसने अपने कार्य काल में कई काण्ड किये। बलात्कार से लेकर ब्रह्म हत्या तक। षडयंत्र करने में माहिर था, उसका समय हमेशा षड्यंत्रों की योजना बनाने में ही बीतता था ।

इन्द्र को किसी भले आदमी द्वारा किये जा रहे किसी भले काम की भनक लगनी चाहिए थी, वह उसके पीछे पड़ जाता था कि कहीं यह मुझे अलोकप्रिय सिद्ध कर मेरी गद्दी हथिया न ले। उसने वैदिक ऋचाओं में अपनी स्तुति को समाविष्ट करवा दिया

– *ऊं स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवा:

इन्द्र के मंत्रीमंडल में एक महिला थी जिसका नाम सरस्वती था। उसको इन्द्र ने अयोध्या राज्य की जासूसी करने और वहां का तख्ता पलट करने का काम सौंपा। सरस्वती ने राजा दशरथ की रानी कैकेई का ब्रेनवाश कर रातों रात राम के राज्याभिषेक के पक्ष में बनी हवा ही पलटवा दी।

कहानी सबको पता है। तुलसीदास जी ने इन्द्र की इस हरकत को इन चौपाइयों के जरिये बहुत प्रभावशाली ढंग से वर्णन किया है।

“इन्द्री द्वार झरोखे नाना। तहं तहं सुर बैठे करि थाना। आबत देखहिं बिषय बयारी। ते हठि देहि कपाट उघारी।।”

बाद में इन्द्र की इस ओछी हरकत में उसका साथ देने पर सरस्वती को बड़ा अफसोस हुआ और वह इ्न्द्र के इस कृत्य की भर्तस्ना करते हुए मन ही मन इन्द्र को कोसती है कि यह इन्द्र निम्नकोटि का शासक है जो किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा और प्रतिभा को पचा नहीं सकता। पंचवटी में जब भरत अपने सारे मंत्रीमंडल के साथ राम को मनाने जाते हैं तो इन्द्र को यह खटका हो जाता है कि कहीं राम इनके मनाने पर मान जायें और वापस अयोध्या आकर राजपाट न संभाल लें, तब उस समय भी इन्द्र सरस्वती को यहां भी अपना खेल खेलने के लिए कहता है। लेकिन सरस्वती ने इस बार साफ मना कर दिया।

“बार बार गहि चरन सँकोची। चली बिचारि बिबुध मति पोची॥ ऊँच निवासु नीचि करतूती। देखि न सकहिं पराइ बिभूती॥”

वनवास के समय इन्द्र के साहबजादे जयन्त ने सीता जी के साथ अश्लील हरकत की तब राम ने उसको दण्डित कर उसकी एक आंख फोड़ दी थी। इन्द्र को यह घटना भी याद थी इसलिए वह नहीं चाहता था कि राम का राज्याभिषेक हो जाय । वह चाहता ही था कि राम – रावण से भिड़ जाय, तो ये दोनों महाबली इसी तरह आपस में उलझे रहें और इन्द्र को कोई खतरा नहीं हो सकता, अपना रुतबा बना रह सकता है ।

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