Friday, March 6, 2026
Home पौड़ी गढ़वाल इतिहास के पन्नों से - महात्मा रामरत्न थपलियाल एक गुमनाम संत और...

इतिहास के पन्नों से – महात्मा रामरत्न थपलियाल एक गुमनाम संत और वैज्ञानिक।

महात्मा रामरत्न थपलियाल – एक गुमनाम संत और वैज्ञानिक।

By – Dr. Arun Kuksal

महात्मा रामरत्न थपलियाल जी की लिखित सन् 1930 में प्रकाशित पुस्तक ‘विश्वदर्शन’ को पढ़कर दो बातें एक साथ मेरे मन-मस्तिष्क में कौंधी, कि हम कितना कम जानते हैं अपने आस-पास के परिवेश को, और अपनों को।

दूसरी बात कि हमारे स्थानीय समाज में अपने घर-परिवार-इलाके के व्यक्तित्वों की विद्वता एवं उनके प्रयासों-कार्यों को यथोचित सहयोग-सम्मान देने की मनोवृत्ति क्यों नहीं विकसित हो पाई है?

‘विश्वदर्शन’ किताब दार्शनिक जगत की बहुचर्चित रचना है। विश्चस्तर पर यह पुस्तक जानी जाती है। ‘ श्री अरविंद, ‘महात्मा गांधी’, ‘महामना मदन मोहन मालवीय’, ‘रवीन्द्रनाथ टैगोर’, ‘पुरुषोत्तम दास टंडन’ आदि ने इस किताब पर महत्वपूर्ण प्रशंसनीय टिप्पणियाँ दी हैं।

उत्तराखण्ड के पौड़ी (गढ़वाल) जनपद के कल्जीखाल विकासखण्ड के ‘चिलोली’ गांव में सन् 1901 में जन्मे, बड़े हुए और आजीवन अपने गाँव में रहे महात्मा रामरत्न थपलियाल दिव्य पुरुष थे।

बचपन से ही संत प्रवृत्ति, घुमक्कड़ी, वैज्ञानिकता और आध्यात्मिकता का भाव लिए हुए उनका संपूर्ण जीवन सृजनात्मक लेखन और समाजसेवा में बीता।

‘मुक्ति’, ‘उन्नति’, ‘विश्व दर्शन’, ‘संसार सुराज्य विधान’ और ‘प्रकाशमृत’ उनकी लिखी प्रमुख पुस्तकें हैं।

‘विश्व दर्शन’ पुस्तक से उन्हें विश्व ख्याति मिली है।

‘विश्व दर्शन’ पुस्तक में मानवीय जीवन-दर्शन के बहुआयामों को वैज्ञानिक कसौटी पर परखकर रामरत्न थपलियाल जी ने जीवन के गूढ रहस्यों को बताया है।

ब्रह्ममांड़ की उत्पत्ति, रहस्य, प्रकृति, पारिस्थितिकी, ग्रह, पिण्ड, नक्षत्र, उनके आपसी सबंध, एक-दूसरे पर प्रभाव, जीव-निर्जीव पर प्रभाव, मानव जीवन और उसकी आवश्यकता, स्त्री-पुरुष यौन सबंधों में सावधानी, वनस्पतियों के सह-संबध, मानव और वनस्पतियों पर ग्रह-नक्षत्रों का प्रभाव और उपाय, कला-विज्ञान, साहित्य, नीति और धर्म का उद्देश्य, जीव और उसका कल्याण आदि विषयों पर गहन चर्चा पुस्तक में है।

किताब की लोकप्रियता और उस पर बढ़ती बहस को देखते हुए तत्कालीन अग्रेंज शासकों ने इस किताब पर प्रतिबन्ध भी लगाया था।

पौड़ी (गढ़वाल) के कल्जीखाल ब्लाक के ‘चिलोली’ गाँव में सन् 1901को जन्में और 24 सितम्बर, 1952 को दुनिया को अलविदा कहने वाले ‘महात्मा रामरत्न थपलियाल’ मात्र 51 वर्ष की आयु तक जीवित रहे।

बचपन से ही अदभुत प्रतिभा के घनी इस महान व्यक्ति ने अभावों में कठिनता से शिक्षा पायी। कई साल घुम्मकडी में बिताये। मानसरोवर और सतोपंथ तक पहुँचे इस तपस्वी ने जीवन के सत्य का परीक्षण कर उसे अपने गाँव ‘चिलोली’ रहकर लिपिबद्व किया था।

गाँव और नजदीकी स्थल ‘कांसखेत’ में ही स्व:रोजगार के अभिनव प्रयोग भी किये। देश की स्वाधीनता के लिए सन् 1920 के असहयोग आंदोलन में उन्होंने भाग लिया था ‌

रामरत्न लेखन और समाजसेवा के कामों में समर्पित रहते लेकिन नादान गाँव-इलाके कुछ लोगों ने उन्हें मदद करने और उनसे प्रेरणा-सीखने के बजाय उनका मजाक उडाया, उन्हें परेशान किया, उन्हें मारा-पीटा और आखिर में उन्हें पागल तक घोषित कर दिया था।

उनकी कई रचनाओं को जाहिल लोगों ने नष्ट भी किया। परन्तु भारी गरीबी और अपमानजनक स्थिति में भी इस महान व्यक्ति ने धैर्य नहीं खोया। वे अपना कार्य करते रहे और दुसरे लोग उन्हें सताते रहे।

यहाँ तक कि जब सन् 1930 में ‘विश्वदर्शन’ पुस्तक प्रकाशित हुयी और देश-विदेश में चर्चा में आयी तब भी स्थानीय लोगों ने उन्हें उचित सम्मान और सहयोग नहीं दिया।

आज भी यह पुस्तक आध्यात्मिक और दार्शनिक जगत में अक्सर चर्चा में रहती है। नतीजन, इस पुस्तक के अनेक संस्करण प्रकाशित हुए हैं। परन्तु विडम्बना है कि हम अभी तक भी इस महान पूर्वज को यथोचित सम्मान नहीं दे पायें हैं।

नयी पीढ़ी तो उन्हें जानती तक नहीं होगी।

हमें यह पुख्ता तौर पर समझना ही होगा कि जो समाज अपने इतिहास और अपने पूर्वजों के योगदान को नहीं जानता अथवा जानकर भी अनजान बनकर सम्मान नहीं करता वो समाज नये माहौल में मजबूती से खडा नहीं हो पाता है।‌

वह समाज हीनता के बोध से ग्रसित होकर हर समय भ्रमित ही रहता है। क्योंकि उसके पास अपनी कोई गौरवशाली विरासत नहीं होती, जिससे कि उसमें आत्म-विश्वास का संचार हो।

महात्मा रामरत्न थपलियाल (चिलोली गाँव) का जीवनीय सच तबके स्थानीय समाज की नादानियां को ही बयाँ करता है, जिससे आज भी हम उभरे नहीं हैं।

@लेखक – वरिष्ठ स्तंभकार है।

अरुण कुकसाल, पत्ता – चामी गांव, (असवालस्यूं) पोस्ट- सीरौं- 246163, पौड़ी (गढ़वाल), उत्तराखण्ड

RELATED ARTICLES

एक साधारण व्यक्ति में असाधारण व्यक्तित्व की जीवन्त जीवन जीने की शब्द-यात्रा है – BARLOWGANJ AND BEYOND

- साधारण व्यक्ति का असाधारण व्यक्तित्व : प्रो. बी. के. जोशी। - प्रो. बी. के. जोशी जी के जीवनीय आत्म-संस्मरणों पर केन्द्रित पुस्तक 'BARLOWGANJ...

एक स्वस्थ परंपरा है स्कूल ऑफ थॉट्स – प्रो० पंवार

स्कूल ऑफ थॉट्स, श्रीनगर (गढ़वाल), भारतीय-हिमालयी ज्ञान परंपरा,  मुख्य वक्ता- प्रो. मोहन पंवार। भारतीय : हिमालय ज्ञान परंपरा पर अपनी बात शुरू करते हुए मुख्य...

पूर्व पर्वतीय विकासमंत्री बर्फिया लाल जुवांठा के साथ के संस्मरण को बता रहे है प्रसिद्ध विचारक, लेखक गोविंद प्रसाद बहुगुणा।

Jewel of Mountains of Snow "बर्फिया लाल" एक संस्मरण- गोविंद प्रसाद बहुगुणा । यह टाइटल जब मैने उन्हें दिया था तब अपने मित्र स्व० बर्फिया...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

धराली आपदा : वैज्ञानिकों ने किया खुलासा, एक बड़े ग्लेशियर के टुकड़े के टूटने से हुई तबाही।

न बादल फटा, न ग्लेशियल झील… वैज्ञानिक अध्ययन में खुलासा: श्रीकांता ग्लेशियर से बर्फ का बड़ा हिस्सा गिरने से हुआ था धराली हादसा। ....................... 5 अगस्त...

2017 तक स्टार्टअप की संख्या थी शून्य। वर्ष 2025 में बढ़कर हुई 1750

- 2024-25 में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) ₹ 3,81,889 करोड़ का रहा - 2021-22 के मुकाबले जीएसडीपी में आया डेढ़ गुना से ज्यादा...

एक साधारण व्यक्ति में असाधारण व्यक्तित्व की जीवन्त जीवन जीने की शब्द-यात्रा है – BARLOWGANJ AND BEYOND

- साधारण व्यक्ति का असाधारण व्यक्तित्व : प्रो. बी. के. जोशी। - प्रो. बी. के. जोशी जी के जीवनीय आत्म-संस्मरणों पर केन्द्रित पुस्तक 'BARLOWGANJ...

विकास के नए आयाम स्थापित करती ग्राम पंचायत भगवन्तपुर की ग्राम प्रधान

विकास के नए आयाम स्थापित करती ग्राम पंचायत भगवन्तपुर की ग्राम प्रधान   By - Harishankar saini   कभी गड्ढों, कीचड़ और टूटे किनारों से जूझती सलान गाँव...

होली विशेषांक : खोलो किवाड़ चलो मठ भीतर।

- खोलो किवाड़ चलो मठ भीतर। - दून पुस्तकालय में संगीताजंलि की शानदार होली प्रस्तुति दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के एम्फीथियेटर में आज संगीतांजली शास्त्रीय...

बर्लोगंज एंड बियोंड पुस्तक का लोकार्पण

पुस्तक : बर्लोगंज एंड बियोंड   By - Dr. Yogesh dhasmana   देश के प्रसिद्ध शिक्षाविद प्रो बी के जोशी के संस्मरणों पर आधारित पुस्तक बर्लोगंज एंड बियोंड...

विज्ञान दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चन्देली में।

विज्ञान दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चन्देली में। By - Neeraj Uttarakhandi पुरोला विकासखंड के अंतर्गत राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चन्देली में राष्ट्रीय...

स्पैक्स संस्था ने होली के प्राकृतिक रंगों पर दून पुस्तकालय में बच्चों को दी जानकारी।

स्पैक्स संस्था ने होली के प्राकृतिक रंगों पर दून पुस्तकालय में बच्चों को दी जानकारी। .......... दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में ‘स्पेक्स’ संस्था के सहयोग...

जनगणना की पूरी तैयारी, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होगी जनगणना

जनगणना-2027 की डिजिटल तैयारियां शुरू, देहरादून में 25-27 फरवरी तक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू चार्ज अधिकारियों से लेकर सेन्सस क्लर्क तक, सभी ले रहे डिजिटल...

एक स्वस्थ परंपरा है स्कूल ऑफ थॉट्स – प्रो० पंवार

स्कूल ऑफ थॉट्स, श्रीनगर (गढ़वाल), भारतीय-हिमालयी ज्ञान परंपरा,  मुख्य वक्ता- प्रो. मोहन पंवार। भारतीय : हिमालय ज्ञान परंपरा पर अपनी बात शुरू करते हुए मुख्य...