Sunday, June 28, 2026
Home पौड़ी गढ़वाल इतिहास के पन्नों से - महात्मा रामरत्न थपलियाल एक गुमनाम संत और...

इतिहास के पन्नों से – महात्मा रामरत्न थपलियाल एक गुमनाम संत और वैज्ञानिक।

महात्मा रामरत्न थपलियाल – एक गुमनाम संत और वैज्ञानिक।

By – Dr. Arun Kuksal

महात्मा रामरत्न थपलियाल जी की लिखित सन् 1930 में प्रकाशित पुस्तक ‘विश्वदर्शन’ को पढ़कर दो बातें एक साथ मेरे मन-मस्तिष्क में कौंधी, कि हम कितना कम जानते हैं अपने आस-पास के परिवेश को, और अपनों को।

दूसरी बात कि हमारे स्थानीय समाज में अपने घर-परिवार-इलाके के व्यक्तित्वों की विद्वता एवं उनके प्रयासों-कार्यों को यथोचित सहयोग-सम्मान देने की मनोवृत्ति क्यों नहीं विकसित हो पाई है?

‘विश्वदर्शन’ किताब दार्शनिक जगत की बहुचर्चित रचना है। विश्चस्तर पर यह पुस्तक जानी जाती है। ‘ श्री अरविंद, ‘महात्मा गांधी’, ‘महामना मदन मोहन मालवीय’, ‘रवीन्द्रनाथ टैगोर’, ‘पुरुषोत्तम दास टंडन’ आदि ने इस किताब पर महत्वपूर्ण प्रशंसनीय टिप्पणियाँ दी हैं।

उत्तराखण्ड के पौड़ी (गढ़वाल) जनपद के कल्जीखाल विकासखण्ड के ‘चिलोली’ गांव में सन् 1901 में जन्मे, बड़े हुए और आजीवन अपने गाँव में रहे महात्मा रामरत्न थपलियाल दिव्य पुरुष थे।

बचपन से ही संत प्रवृत्ति, घुमक्कड़ी, वैज्ञानिकता और आध्यात्मिकता का भाव लिए हुए उनका संपूर्ण जीवन सृजनात्मक लेखन और समाजसेवा में बीता।

‘मुक्ति’, ‘उन्नति’, ‘विश्व दर्शन’, ‘संसार सुराज्य विधान’ और ‘प्रकाशमृत’ उनकी लिखी प्रमुख पुस्तकें हैं।

‘विश्व दर्शन’ पुस्तक से उन्हें विश्व ख्याति मिली है।

‘विश्व दर्शन’ पुस्तक में मानवीय जीवन-दर्शन के बहुआयामों को वैज्ञानिक कसौटी पर परखकर रामरत्न थपलियाल जी ने जीवन के गूढ रहस्यों को बताया है।

ब्रह्ममांड़ की उत्पत्ति, रहस्य, प्रकृति, पारिस्थितिकी, ग्रह, पिण्ड, नक्षत्र, उनके आपसी सबंध, एक-दूसरे पर प्रभाव, जीव-निर्जीव पर प्रभाव, मानव जीवन और उसकी आवश्यकता, स्त्री-पुरुष यौन सबंधों में सावधानी, वनस्पतियों के सह-संबध, मानव और वनस्पतियों पर ग्रह-नक्षत्रों का प्रभाव और उपाय, कला-विज्ञान, साहित्य, नीति और धर्म का उद्देश्य, जीव और उसका कल्याण आदि विषयों पर गहन चर्चा पुस्तक में है।

किताब की लोकप्रियता और उस पर बढ़ती बहस को देखते हुए तत्कालीन अग्रेंज शासकों ने इस किताब पर प्रतिबन्ध भी लगाया था।

पौड़ी (गढ़वाल) के कल्जीखाल ब्लाक के ‘चिलोली’ गाँव में सन् 1901को जन्में और 24 सितम्बर, 1952 को दुनिया को अलविदा कहने वाले ‘महात्मा रामरत्न थपलियाल’ मात्र 51 वर्ष की आयु तक जीवित रहे।

बचपन से ही अदभुत प्रतिभा के घनी इस महान व्यक्ति ने अभावों में कठिनता से शिक्षा पायी। कई साल घुम्मकडी में बिताये। मानसरोवर और सतोपंथ तक पहुँचे इस तपस्वी ने जीवन के सत्य का परीक्षण कर उसे अपने गाँव ‘चिलोली’ रहकर लिपिबद्व किया था।

गाँव और नजदीकी स्थल ‘कांसखेत’ में ही स्व:रोजगार के अभिनव प्रयोग भी किये। देश की स्वाधीनता के लिए सन् 1920 के असहयोग आंदोलन में उन्होंने भाग लिया था ‌

रामरत्न लेखन और समाजसेवा के कामों में समर्पित रहते लेकिन नादान गाँव-इलाके कुछ लोगों ने उन्हें मदद करने और उनसे प्रेरणा-सीखने के बजाय उनका मजाक उडाया, उन्हें परेशान किया, उन्हें मारा-पीटा और आखिर में उन्हें पागल तक घोषित कर दिया था।

उनकी कई रचनाओं को जाहिल लोगों ने नष्ट भी किया। परन्तु भारी गरीबी और अपमानजनक स्थिति में भी इस महान व्यक्ति ने धैर्य नहीं खोया। वे अपना कार्य करते रहे और दुसरे लोग उन्हें सताते रहे।

यहाँ तक कि जब सन् 1930 में ‘विश्वदर्शन’ पुस्तक प्रकाशित हुयी और देश-विदेश में चर्चा में आयी तब भी स्थानीय लोगों ने उन्हें उचित सम्मान और सहयोग नहीं दिया।

आज भी यह पुस्तक आध्यात्मिक और दार्शनिक जगत में अक्सर चर्चा में रहती है। नतीजन, इस पुस्तक के अनेक संस्करण प्रकाशित हुए हैं। परन्तु विडम्बना है कि हम अभी तक भी इस महान पूर्वज को यथोचित सम्मान नहीं दे पायें हैं।

नयी पीढ़ी तो उन्हें जानती तक नहीं होगी।

हमें यह पुख्ता तौर पर समझना ही होगा कि जो समाज अपने इतिहास और अपने पूर्वजों के योगदान को नहीं जानता अथवा जानकर भी अनजान बनकर सम्मान नहीं करता वो समाज नये माहौल में मजबूती से खडा नहीं हो पाता है।‌

वह समाज हीनता के बोध से ग्रसित होकर हर समय भ्रमित ही रहता है। क्योंकि उसके पास अपनी कोई गौरवशाली विरासत नहीं होती, जिससे कि उसमें आत्म-विश्वास का संचार हो।

महात्मा रामरत्न थपलियाल (चिलोली गाँव) का जीवनीय सच तबके स्थानीय समाज की नादानियां को ही बयाँ करता है, जिससे आज भी हम उभरे नहीं हैं।

@लेखक – वरिष्ठ स्तंभकार है।

अरुण कुकसाल, पत्ता – चामी गांव, (असवालस्यूं) पोस्ट- सीरौं- 246163, पौड़ी (गढ़वाल), उत्तराखण्ड

RELATED ARTICLES

अतीत का प्रतिशोध नहीं लिया जा सकता, उसे केवल समझा जा सकता है : IAS शशि रंजन कुमार

By - Prem Pancholi ।। अतीत हमारी स्मृतियों में, खंडहरों में, और उन तरीकों में जीवित रहता है जिनसे वह आज भी हमारे अस्तित्व को...

इतिहास के पन्नो से : अपना दायां अंगूठा दिखाना चाहिए और हम दिखायेंगे भी – दादा दौलतराम खुगशाल

By - dr. Arun Kuksal   दादा दौलतराम खुगशाल (मार्च, 1891- 3 फरवरी, 1960) टिहरी रियासत के विरुद्ध जन-संघर्षों का अग्रणी व्यक्तित्व- ‘‘आज तक राजा ने हमको पढ़ने-लिखने...

कहानी : दादी की चिट्ठी

आजकल छुट्टियों में गाँव जा रहे हो? मेरी इस कहानी को पढ़कर जाना - डॉ० ममता कुंवर By - Dr. Mamata Kunwar आज दादी सुबह से...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

एथलीट संदीप गुसाई बना उत्तरकाशी विधिक सेवा प्राधिकरण एंबेसडर

जनसामान्य में नशा उन्मूलन, विधिक जागरूकता, सामाजिक उत्थान एवं खेलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, उत्तरकाशी द्वारा संदीप गुंसाई...

अतीत का प्रतिशोध नहीं लिया जा सकता, उसे केवल समझा जा सकता है : IAS शशि रंजन कुमार

By - Prem Pancholi ।। अतीत हमारी स्मृतियों में, खंडहरों में, और उन तरीकों में जीवित रहता है जिनसे वह आज भी हमारे अस्तित्व को...

सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स को उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद से लेनी पड़ेगी अनुमति

चारधाम यात्रा की गरिमा, सुरक्षा और शुचिता बनाए रखने हेतु सोशल मीडिया कंटेंट निर्माण के संबंध में शासन से दिशा निर्देश जारी हुए हैं।...

देहरादून : धामी कैबिनेट की बैठक संपन्न, खास विषयों पर त्वरित निर्णय

।। राज्य कैबिनेट ने कुल 12 प्रस्तावों को दी मंजूरी ।। उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा संशोधन नियमावली-2026 को मंजूरी दी, जिसके तहत संस्कृत विद्यालयों की मान्यता,...

इतिहास के पन्नो से : अपना दायां अंगूठा दिखाना चाहिए और हम दिखायेंगे भी – दादा दौलतराम खुगशाल

By - dr. Arun Kuksal   दादा दौलतराम खुगशाल (मार्च, 1891- 3 फरवरी, 1960) टिहरी रियासत के विरुद्ध जन-संघर्षों का अग्रणी व्यक्तित्व- ‘‘आज तक राजा ने हमको पढ़ने-लिखने...

जिलाधिकारी के शख्त निर्देश, कहा आपदा के दौरान सभी विभाग बनायें समन्वय

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जनपद देहरादून में आगामी मानसून एवं संभावित आपदा परिस्थितियों के दृष्टिगत आपदा प्रबंधन संबंधी...

जब वरिष्ठ पत्रकार चारू तिवारी ने वैज्ञानिक डी० डी० पंत को देखा

सुप्रसिद्ध भौतिकशास्त्री और हिमालय के चिंतक प्रो. डीडी पंत की पुण्यतिथि (11 जून, 2008) पर विशेष हमारे हिस्से के प्रो. डीडी पंत - चारु तिवारी By...

केतन लाल की निर्मम हत्या की चहुंओर चर्चा, समाज पर बड़ा कलंक।

By - Prem Pancholi   सोशल मीडिया पर जिस तरह से प्रतापनगर के ओण पट्टी के देवल गांव निवासी अनुसूचित जाति के किशोर केतन लाल की...

आपदाओं के प्रभाव को न्यूनतम करने के लिए सरकारी वर्जिश

वैज्ञानिक योजना, कुशल प्रशासन और समयबद्ध निर्णय प्रक्रिया के जरिए आपदाओं के प्रभाव को न्यूनतम करने का प्रयास किया जा रहा है।” उन्होंने कहा कि...

पर्यावरण दिवस : पद्मश्री प्रेमचंद शर्मा ने किया कृषि अनुसंधान संस्थान में वृक्षारोपण

विश्व पर्यावरण दिवस पर IATR देहरादून में पौधारोपण एवं गोष्ठी का आयोजन। पद्मश्री प्रेम चंद शर्मा ने छात्रों को मोरिंगा और पंच पल्लव के...