– AISA – All India Students’ Association का मानना है कि जब वंचित लोग बराबरी की बात करते हैं, तो जातिवादी ताकतें खुद को पीड़ित बताने लगती हैं।
– हालिया मामला दिल्ली विश्वविद्यालय में हिंसा और रुचि तिवारी की भूमिका का है।

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दिल्ली विश्वविद्यालय में UGC सोशल इक्विटी रेगुलेशन्स लागू करने की मांग को लेकर जो प्रदर्शन हुआ है उसे कुछ राजनीतिक दल और राजनीतिक दलों के नजदीकी मीडियाकर्मी हमला” बताकर पेश कर रहे हैं। यह बात कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता इंद्रेश मैखुरी ने एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से कही है।
उन्होंने जानकारी दी कि रुचि तिवारी नाम की एक महिला, जो खुद को पत्रकार बताती हैं, प्रदर्शन के दौरान माहौल खराब करने की कोशिश कर रही थीं। अब वे खुद को पीड़िता बता रही हैं। दूसरी ओर, AISA की कार्यकर्ता अंजलि और नेहा को लगातार बलात्कार और जान से मारने की धमकियाँ मिल रही हैं।
श्री मैखुरी ने स्पष्ट कहा कि जब-जब दलित, आदिवासी, पिछड़े और वंचित समुदाय अपने सम्मान और बराबरी की बात करते हैं, तब-तब जातिवादी ताकतें उल्टा खुद को पीड़ित बताने लगती हैं। मंडल आंदोलन के समय भी यही हुआ था, की बराबरी की मांग करने वालों के खिलाफ नफरत फैलाई गई थी।

दरअसल हुआ क्या –
1. 12 फरवरी को AISA द्वारा आयोजित समता उत्सव के दौरान आर्ट्स फैकल्टी में इतिहासकार एस. इरफान हबीब पर ABVP के गुंडों ने हमला किया। प्रो. हबीब RSS का इतिहास लेखन जाति व्यवस्था को स्वीकार नहीं करती, संबंधी विषय पर बोल रहे थे। तभी सभा के दौरान पत्थर फेंके गए और पानी से भरी डस्टबिन सार्वजनिक बैठक में फेंकी गई। इसके बावजूद आयोजकों और वक्ता ने शांति बनाए रखी और कार्यक्रम जारी रखा। हमलावरों की पहचान कर ली गई है और उनके वीडियो AISA द्वारा सार्वजनिक किए गए, जिन्हें व्यापक रूप से देखा और निंदा की गई।
2. UGC नियमावली पर लगी रोक के कारण SC/ST/OBC समुदायों के छात्रों और शिक्षकों में व्यापक आक्रोश है। 13 फरवरी को अखिल भारतीय वंचित अधिकार दिवस के तहत देशभर के 100 से अधिक परिसरों में UGC नियमावली लागू करने की मांग उठी। इसी क्रम में आर्ट्स फैकल्टी में विभिन्न संगठनों और आंदोलनों के छात्रों ने एक शांतिपूर्ण और संगठित सार्वजनिक सभा आयोजित की।
3. सभा के दौरान कुछ असामाजिक तत्वों ने उकसाने और अराजकता फैलाने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने उन्हें पुलिस के हवाले कर दिया।
4. स्वयं को पत्रकार बताने वाली रुचि तिवारी, जो UGC नियमावली के समर्थन में हो रहे प्रदर्शनों में लगातार उकसावे की भूमिका निभाती रही हैं, अपने साथ कई लोगों को लेकर वहां पहुँचीं। उन्होंने दलित पत्रकार नवीन को निशाना बनाया और उनके साथ दुर्व्यवहार किया। नवीन के अनुसार, AISA की कार्यकर्ता अंजलि और नेहा ने हस्तक्षेप करते हुए रुचि तिवारी को पुलिस के हवाले करने की कोशिश की।
5. इस घटना के दो वीडियो सामने आए हैं। एक वीडियो में रुचि तिवारी नवीन पर हमला करती और अंजलि को मुक्का मारती दिख रही हैं, जिससे अंजलि गिर जाती हैं। दूसरे वीडियो में अंजलि और नेहा रुचि तिवारी को पकड़कर पुलिस के पास ले जाने की कोशिश कर रही हैं। दूसरा वीडियो जातिवादी तंत्र द्वारा बिना आवाज़ के प्रसारित किया जा रहा है, क्योंकि आवाज़ के साथ स्पष्ट सुना जा सकता है— “मार के भागी है ये, इसको पुलिस के पास लेकर जाना है।”
6. तमाम व्यवधानों के बावजूद सार्वजनिक सभा शाम 5 बजे शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त हुई।
7. शाम 6:30 बजे अंजलि और अन्य AISA कार्यकर्ता मॉरिस नगर थाने में रुचि तिवारी और उनके साथियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने पहुँचे। वहां पहले से ही एक भीड़ मौजूद थी, जिसने अंजलि को पहचान कर थाने के अंदर उनका पीछा किया। पुलिस ने AISA कार्यकर्ताओं को एक छोटे कमरे में ले जाकर बंद किया, जबकि लगभग 50 लोगों की भीड़ ने गालियाँ दीं और बलात्कार व हत्या की धमकियाँ दीं। लगभग 4 घंटे तक चार AISA कार्यकर्ता थाने के अंदर घिरे रहे।
8. दिल्ली विश्वविद्यालय के सामान्य छात्र और AISA कार्यकर्ताओं एवं अन्य लोग भी मॉरिस नगर थाने के बाहर एकत्र हुए। पुलिस 200 से अधिक जातिवादी गुंडों की भीड़ को नियंत्रित करने में असफल रही। कई वीडियो में स्पष्ट दिखता है कि भीड़ “गोली मारो सालों को” और “ब्राह्मणवाद ज़िंदाबाद” जैसे नारे पुलिस की मौजूदगी में लगा रही थी। घंटों तक धमकियाँ और डराने का सिलसिला जारी रहा।
9. रात लगभग 12 बजे पुलिस ने भीड़ को हटाया और AISA कार्यकर्ताओं की शिकायत दर्ज की गई। कार्यकर्ताओं को रिहा किया गया और अंजलि का चिकित्सीय परीक्षण (मेडिको-लीगल सर्टिफिकेट) कराया गया।

इंद्रेश मैखुरी का आरोप है कि दक्षिणपंथी सोशल मीडिया और मुख्यधारा की मीडिया द्वारा लगातार छात्राओं के खिलाफ झूठी नाराटिव चला रही है, इसके कारण उन छात्राओं को लगातार मारपीट भरी धमकी दी जा रही है। साथ ही, आंदोलन को भी बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। लेकिन हम यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि समानता की मांग को जातिवादी और स्त्री-विरोधी भीड़ से नहीं दबाया जा सकता!
उन्होंने कहा कि AISA न्यायप्रिय लोगों से अपील करता है कि इस नफरत भरी नाराटिव का प्रतिरोध करें और विश्वविद्यालयों में वंचित समुदायों की गरिमा और समानता की मांग का समर्थन करें!

नोट – यह संपूर्ण जानकारी और वक्तव्य जननेता इंद्रेश मैखुरी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर भी प्रसारित की है।







