अनाथ शंकर और राधिका को मिले मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना – डा० विद्वान।
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अनुसूचित जाति आयोग भारत सरकार की पूर्व सदस्य और भाजपा नेत्री डॉ० स्वराज विद्वान ने जिलाधिकारी टिहरी के मार्फत मुख्यमंत्री श्री धामी को पत्र लिखकर अवगत करवाया है कि थत्युड ब्लॉक के श्रीकोट गांव निवासी अनाथ शंकर एवं कु. राधिका को मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना का लाभ मिले।
बता दें कि राधिका एवं शंकर स्व० प्यारे लाल के अनाथ बच्चे है। जिनकी उम्र अभी क्रमशः 7 से 8 वर्ष है। डा० विद्वान ने बताया कि शंकर और राधिका के माता पिता चार वर्ष पहले इस दुनिया को छोड़ चले है। तब से अब यह बच्चे अनाथ हो चुके है। हाल फिलहाल यह बच्चे अपने नाना के घर उत्तरकाशी के टंडोल गांव में रह रहे है। मगर यह अनाथ बच्चे सिर्फ पल रहे है, पर शिक्षा जैसी व्यवस्था इनके लिए दिवास्वप्न है।
डा० विद्वान ने टिहरी जिले के प्रोबेशन अधिकारी संजय गौरव को भी पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र में जिक्र किया है कि क्षेत्र भ्रमण के दौरान उन्हें शंकर पुत्र स्व. प्यारे लाल एवं कु. राधिका पुत्री स्व प्यारे लाल दो अनाथ बच्चों से वे मिली। उन्हें देखकर वे बहुत आहत है।
दरअसल शंकर एवं कु० राधिका ग्राम श्रीकोट वि०ख० थत्युड जिला टिहरी गढवाल के एक गरीब, निर्धन व अनु. जाती परिवार से हैं। जिनके पिता प्यारे लाल एवं माता गीता देवी की मृत्यु 3-4 साल पहले हो चुकी है। माता पिता के मृत्यु के पश्चात घर में इन बच्चों की देखभाल करने वाला अब कोई भी नहीं है।
बता दें कि यह दोनो बच्चे 3-4 साल से अपने नाना उत्तम दास ग्राम टंडोल पट्टी दशगी वि०ख० चिन्यालीसौड, उत्तरकाशी में रह रहे हैं।
इन बच्चों के नाना उत्तम दास भी एक गरीब निर्धन अनु. जाती का व्यक्ति हैं। जो गांव में ढोल बजाकर अपने बच्चों के साथ साथ इन बच्चों का भी पालन पोषण कर रहे है। शंकर पुत्र स्व. प्यारे लाल जिनकी उम्र लगभग 8 साल है वे अपने नाना जी के साथ ढोल बजाकर अपना और अपनी 9 वर्षीय बहन राधिका का जीवन यापन करता है। हालांकि यह दोनो बच्चे कक्षा 3 व 4 में पढाई भी कर रहे है।
डा० विद्वान ने जिला प्रोबेशन अधिकारी से लिखित अनुरोध किया है कि वि०ख० थत्युड में एक टीम गठित कर श्रीकोट गांव के इन दोनों अनाथ बच्चों के जाती प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, राशनकार्ड, मूल निवास प्रमाण पत्र सहित परिवार की रजिस्ट्रेशन की नकल एवं मृतक माता पिता के मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर इन दोनों बच्चों को उत्तराखण्ड सरकार द्वारा वर्ष 2020 के बाद 21 वर्ष से कम उम्र वाले अनाथ बच्चों को प्रतिमाह 4000 रु की दी जाने वाली “मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना” के अर्न्तगत लाभ दिलवाया जाए।
साथ साथ इसके दोनों अनु. जाती के गरीब, निर्धन व अनाथ बच्चों को किसी अच्छे विद्यालय में पढाई की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।








