Friday, March 6, 2026
Home टिहरी गढ़वाल एक तपस्विनी की खानाबदोश जीवन यात्रा, आखिर थम गई .

एक तपस्विनी की खानाबदोश जीवन यात्रा, आखिर थम गई .

एक तपस्विनी की खानाबदोश जीवन यात्रा, आखिर थम गई .

By – Mahipal Negi

टिहरी के दो प्रतिष्ठित बहुगुणा और नौटियाल परिवार। अम्बादत्त बहुगुणा और नारायणदत्त नौटियाल, रियासत काल में  अधिकारियों के रूप में नियुक्त थे। लेकिन दोनों के घर में विद्रोही संतानों ने जन्म लिया।

सुंदरलाल बहुगुणा और विमला नौटियाल। इन दोनों के पिता रियासत काल में बड़े अधिकारी रहे। सुंदरलाल बहुगुणा आजादी की लड़ाई में जेल गए और विमला नौटियाल सरला बहन की शिष्य बन लक्ष्मी आश्रम कौसानी पहुंच गई।

विमला नौटियाल के दो भाई बुद्धि सागर और विद्यासागर भी राजा की जेल में रह चुके थे और प्रखर साम्यवादी हुए। सुंदरलाल बहुगुणा लाहौर से पढ़कर लौटे और टिहरी में कांग्रेस के बड़े नेता के रूप में उभरने लगे।

1950 का दशक। 1955 – 56 की बात होगी। सुंदरलाल और विमला जी के रिश्ते की बात चली तो विमला जी ने शर्त लगा दी कि राजनीति छोड़नी होगी और दूरस्थ गांव में जन सेवा का संकल्प लेना होगा। तब विमला जी की उम्र 22 – 23 साल और सुंदरलाल जी की 27 – 28 साल की रही होगी।

फिर से समझिए दोनों प्रतिष्ठित परिवारों और रियासत काल में राज अधिकारियों के बच्चे थे। गंगोत्री राजमार्ग पर दोनों के गांव मरोड़ा और मालदेवल थे। निकट ही टिहरी शहर था। मतलब कि रिश्ता होते ही राजनीति छोड़ टिहरी से दूर गांवों में जाकर जनसेवा शुरू करनी थी। दोनों ने संकल्प लिया, पिट्ठू बांधा और टिहरी से 40 किलोमीटर दूर पैदल चलकर सिलियारा गांव में एक छोटा सा आश्रम बनाया। तब टिहरी से पैदल आना जाना ही होता था। सड़क वहां 1960 के दशक में गई।

यह दोनों के सहजीवन की शुरुआत थी। दोनों युवा थे । राज अधिकारियों के बच्चे थे। राष्ट्रीय राजमार्ग पर गांव था, लेकिन सब छोड़कर पैदल गांव – गांव और जंगल जंगल घूमने लगे। बालिका शिक्षा, ग्राम स्वराज,चिपको, शराब बंदी, टिहरी बांध का आंदोलन। कभी स्थाई रूप से एक जगह बसे ही नहीं।

इनकी खानाबदोश जिंदगी देख बच्चों को पढ़ाने का जिम्मा तो किसी और ने ही लिया था, जिस बात को बहुत लोग नहीं जानते। जीवन के उत्तरार्ध में टिहरी बांध के आंदोलन में गंगा के तट पर जो घाट जैसा ही था, 15 साल और गुजार दिए। सुंदरलाल को सुंदरलाल बहुगुणा बनाने का काम जिस युवा तपस्विनी विमला ने किया, आज प्रातः ही उन्होंने अंतिम सांस ली।

मेरे लिए यह हमेशा ही विस्मित करने वाला रहा कि कैसे दो प्रतिष्ठित खाते – पीते रियासत भर में पहचान वाले परिवारों के दो बच्चों ने कठिन खानाबदोश जीवन चुना और आजीवन उसके प्रति संकल्पबद्ध रहे। आलोचनाएं असहमतियां जरूर बहुतों की रही।

Vimla bahuguna
Vimla bahuguna

मेरे लिए यह भी अचम्भे की बात है कि कैसे 22 – 23 और 27 – 28 साल के नौजवान अपने हवेली जैसे घरों को छोड़कर जब एक बार बाहर निकले तो कभी भी स्थाई घरों में वापस नहीं  जा पाए। जिन्होंने सिलियारा आश्रम और टिहरी के गंगा हिमालय कुटी में उनकी झोपड़ी देखी होगी, वे ठीक-ठाक आकलन कर सकते हैं। सुंदरलाल जी और विमला जी दोनों का मूल्यांकन हमेशा साथ-साथ ही किया जा सकता है।

RELATED ARTICLES

विकास के नए आयाम स्थापित करती ग्राम पंचायत भगवन्तपुर की ग्राम प्रधान

विकास के नए आयाम स्थापित करती ग्राम पंचायत भगवन्तपुर की ग्राम प्रधान   By - Harishankar saini   कभी गड्ढों, कीचड़ और टूटे किनारों से जूझती सलान गाँव...

जनगणना की पूरी तैयारी, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होगी जनगणना

जनगणना-2027 की डिजिटल तैयारियां शुरू, देहरादून में 25-27 फरवरी तक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू चार्ज अधिकारियों से लेकर सेन्सस क्लर्क तक, सभी ले रहे डिजिटल...

गलगोटिया कांड : जहां कुंए में पहले से ही भाँग डाल दी गई हो?.

- गलगोटिया को क्यों गरिया रहे हो? …उसकी क्या गलती है - वो बेचारे तो डंका बजा रहे थे।   By - Prabhat Dabral  सवाल ये नहीं...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

धराली आपदा : वैज्ञानिकों ने किया खुलासा, एक बड़े ग्लेशियर के टुकड़े के टूटने से हुई तबाही।

न बादल फटा, न ग्लेशियल झील… वैज्ञानिक अध्ययन में खुलासा: श्रीकांता ग्लेशियर से बर्फ का बड़ा हिस्सा गिरने से हुआ था धराली हादसा। ....................... 5 अगस्त...

2017 तक स्टार्टअप की संख्या थी शून्य। वर्ष 2025 में बढ़कर हुई 1750

- 2024-25 में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) ₹ 3,81,889 करोड़ का रहा - 2021-22 के मुकाबले जीएसडीपी में आया डेढ़ गुना से ज्यादा...

एक साधारण व्यक्ति में असाधारण व्यक्तित्व की जीवन्त जीवन जीने की शब्द-यात्रा है – BARLOWGANJ AND BEYOND

- साधारण व्यक्ति का असाधारण व्यक्तित्व : प्रो. बी. के. जोशी। - प्रो. बी. के. जोशी जी के जीवनीय आत्म-संस्मरणों पर केन्द्रित पुस्तक 'BARLOWGANJ...

विकास के नए आयाम स्थापित करती ग्राम पंचायत भगवन्तपुर की ग्राम प्रधान

विकास के नए आयाम स्थापित करती ग्राम पंचायत भगवन्तपुर की ग्राम प्रधान   By - Harishankar saini   कभी गड्ढों, कीचड़ और टूटे किनारों से जूझती सलान गाँव...

होली विशेषांक : खोलो किवाड़ चलो मठ भीतर।

- खोलो किवाड़ चलो मठ भीतर। - दून पुस्तकालय में संगीताजंलि की शानदार होली प्रस्तुति दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के एम्फीथियेटर में आज संगीतांजली शास्त्रीय...

बर्लोगंज एंड बियोंड पुस्तक का लोकार्पण

पुस्तक : बर्लोगंज एंड बियोंड   By - Dr. Yogesh dhasmana   देश के प्रसिद्ध शिक्षाविद प्रो बी के जोशी के संस्मरणों पर आधारित पुस्तक बर्लोगंज एंड बियोंड...

विज्ञान दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चन्देली में।

विज्ञान दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चन्देली में। By - Neeraj Uttarakhandi पुरोला विकासखंड के अंतर्गत राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चन्देली में राष्ट्रीय...

स्पैक्स संस्था ने होली के प्राकृतिक रंगों पर दून पुस्तकालय में बच्चों को दी जानकारी।

स्पैक्स संस्था ने होली के प्राकृतिक रंगों पर दून पुस्तकालय में बच्चों को दी जानकारी। .......... दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में ‘स्पेक्स’ संस्था के सहयोग...

जनगणना की पूरी तैयारी, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होगी जनगणना

जनगणना-2027 की डिजिटल तैयारियां शुरू, देहरादून में 25-27 फरवरी तक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू चार्ज अधिकारियों से लेकर सेन्सस क्लर्क तक, सभी ले रहे डिजिटल...

एक स्वस्थ परंपरा है स्कूल ऑफ थॉट्स – प्रो० पंवार

स्कूल ऑफ थॉट्स, श्रीनगर (गढ़वाल), भारतीय-हिमालयी ज्ञान परंपरा,  मुख्य वक्ता- प्रो. मोहन पंवार। भारतीय : हिमालय ज्ञान परंपरा पर अपनी बात शुरू करते हुए मुख्य...