गैरसैण सत्र मौज काटते VIP की हेलीकाप्टर यात्रा।
By – Gajendra Rawat
– मित्र विपक्ष का सदन मे खर्राटे मारकर सोना।
– सतपाल महाराज का 90 डिग्री पर झुकना।
– स्टिंगबाज की दलबदल की फ़ाइल दबाये रखना।

अनुपूरक बजट पास करने के लिए गैरसैण मे बुलाया गया बरसात कालीन सत्र का उसी अंदाज में सत्रावसान हुआ जैसे पहले से ही होता आ रहा है. प्रचंड बहुमत की सरकार ने न सिर्फ अनुपूरक बजट पेश किया बल्कि पास भी करवाया. यह सत्र इस बात के लिए याद किया जा रहा है की दिल्ली की जनता द्वारा विधानसभा चुनाव मे दुत्कारे गये उत्तराखंड भाजपा प्रभारी दुष्यंत गौतम और उत्तराखंड सरकार को जेब में रखने वाले संघटन महामंत्री अजय कुमार को हेलीकॉप्टर से गैरसैण की पहाड़ियों मे घुमाया गया और फिर दूसरे हेलीकॉप्टर से देहरादून भेजा गया। दोनों लोग वीडियो बना बनाकर खुद वायरल कर उत्तराखंड को चिढ़ा भी रहे हैं. यह वही दुष्यंत गौतम है जो कुछ दिन पहले हेलीकॉप्टर दुर्घटना पर बहुत ही अमर्यादित और गैर जिम्मेदार बयान देकर चर्चा में थे।इन दोनों लोगों का उत्तराखंड में यही योगदान है कि यह दोनों लोग उस पार्टी के हैं जिसे उत्तराखंड के लोग मोदी के मेरा भाई बैनो दीदी भुली वाले भाषणों से लेकर योगी के एनकाउंटर के भाषण सुनकर लगातार वोट दे रहे हैं देते ही जा रहे हैँ.
इस विधानसभा सत्र में मित्र विपक्ष के सदन में खर्राटे लेने के वीडियो आना बता रहा है कि इन लोगों की 2027 की तैयारी किस चरम तक जा पहुंची है. कोई इन्हें पूछने वाला नहीं कि तुमने वहां रजाई गद्दे क्यों लगाए क्या हासिल किया और रजाई गद्दे लेकर अब वापस क्यों आ गए. सवा तीन साल से दल बदल की दबी हुई फाइल पर सत्ता पक्ष के साथ मित्र विपक्ष ने भी और बड़े-बड़े पत्थर रख दिए हैं ताकि उनके सत्कर्मो के स्टिंग बाहर ना सके। हो सकता है कि सदन के भीतर रजाई गद्दे मे कोई नई रिकॉर्डिंग तैयार कर दी हो। आखिर में महा मानव सतपाल महाराज का सामान्य लोगों के सामने 90 डिग्री पर झुकना बता रहा है कि प्रचंड बहुमत के सामने अच्छे-अच्छे नतमस्तक हैं.बहरहाल 5300 करोड़ के अनुपूरक बजट को पास कर सरकार अपनी पीठ थपथपा रही है और मित्र विपक्ष भी इंतजार कर रहे हैं कि उनके हिस्से में कितना कितना आएगा .
जिस प्रदेश में सत्ताधारी दल के प्रभारी और विवादित संगठन महामंत्री हेलीकॉप्टरों की मौज काट रहे हो और मित्र विपक्ष के प्रभारी वीडियो कॉल से संगठन चला रहे हो उस प्रदेश का तो बाबा केदार ही मालिक है . पता नहीं कब तक इस प्रकार के फ्रेंडली मैच देखने को मिलेंगे
लेखक राजनीतिक विश्लेषक, वरिष्ठ पत्रकार है







