Thursday, May 14, 2026
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युवा लेखिकाओं की कहानीयां “शाम-सवेरे” पाठकों के बीच

युवा लेखिकाओं की कहानीयां “शाम-सवेरे” पाठकों के बीच

उदयन केयर द्वारा संचालित उदयन शालिनी फ़ेलोशिप (USF), देहरादून चैप्टर के तत्वावधान में बाल एवं किशोर लेखिकाओं द्वारा लिखित कहानी-संग्रह “शाम-सवेरे” पुस्तक का लोकार्पण समारोह दून लाइब्रेरी एंड रिसर्च सेंटर, देहरादून में आयोजित हुआ। यह पुस्तक शालिनियों की भावनाओं, अनुभवों, संघर्षों और रचनात्मक सोच का सशक्त संकलन है, जिसमें 17 शालिनियों द्वारा लिखी गई लघु कहानियाँ शामिल हैं, जो आत्मनिर्भरता, साहस, मानवीय संवेदना, संबंधों, संघर्ष और आशा जैसे विषयों को उजागर करती हैं।

समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में माननीय अध्यक्ष, राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (State Consumer Disputes Redressal Commission), उत्तराखंड कुमकुम रानी और विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ पत्रकार, कवि एवं लेखक वीरेंद्र डंगवाल ‘पार्थ’ की गरिमामयी उपस्थिति रही।

मुख्य अतिथि कुमकुम रानी ने अपने संबोधन में कहा कि “शाम-सवेरे” में संकलित कहानियाँ शालिनियों के आत्मविश्वास, संवेदनशील सोच और जीवन के यथार्थ को सरल, प्रभावी और सार्थक रूप में प्रस्तुत करती हैं। ऐसी रचनात्मक पहल बालिकाओं को अपनी बात निर्भीकता से रखने, पढ़ने–लिखने की आदत विकसित करने और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरित करती है। उन्होंने पुस्तक की कहानियों से उद्धरणों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन्हें पढ़ते हुए जीवन का यथार्थ सामने आ जाता है। कुमकुम रानी ने उदयन शालिनी फैलोशिप की इस पहल की सराहना करते हुए आशा व्यक्त की कि भविष्य में और अधिक शालिनियां लेखन क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए अपने अनुभव और ज्ञान से अन्य के लिए प्रेरणास्रोत बनेंगी।

विशिष्ट अतिथि वीरेंद्र डंगवाल ‘पार्थ’ ने अपने संबोधन में कहा कि यह कहानी संग्रह दर्शाता है कि शिक्षा केवल अकादमिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं, बल्कि विचारों को अभिव्यक्त करने और समाज को समझने की क्षमता भी देती है। उन्होंने कहा कि ये कहानियाँ पढ़ने से स्पष्ट होता है कि नई पीढ़ी संवेदनशील, विचारशील एवं सामाजिक मुद्दों के प्रति जागरूक है। वीरेंद्र डंगवाल ‘पार्थ’ ने बालिकाओं को नियमित लेखन और पठन जारी रखने हेतु प्रेरित करते हुए कहा कि साहित्य की इस यात्रा में वे हरसंभव सहयोग प्रदान करते रहेंगे।

उदयन शालिनी फैलोशिप देहरादून चैप्टर के संयोजक विमल डबराल ने कहा कि “शाम-सवेरे” केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि युवा लेखिकाओं की साहित्यिक यात्रा की एक सशक्त शुरुआत है, जो भविष्य में और भी रचनात्मक उपलब्धियों के साथ जारी रहेगी। उन्होंने बताया कि शालिनियों के साथ साथ संस्था का भी यह प्रथम प्रयास था जो कि जो कि अल्प समय में पूर्ण किया गया। विमल डबराल ने कहा कि प्रत्येक कहानी किसी न किसी रूप में हमारे जीवन, समाज और हमारे इर्द-गिर्द घटती घटनाओं से जुड़ी है।

कार्यक्रम में पुस्तक से जुड़ी शालिनियों ने भी अपने विचार तथा कहानी लेखन के अपने अनुभव साझा किए। निकिता ने अपनी कहानी को आत्मनिर्भरता और साहस, ज़ाहिदा ने परिवार से दूर रहकर मजबूत बनने, सुहानी ने मेहनत और विश्वास, अज़मतुल बानो ने मानवीय संवेदना और करुणा, स्वाति ने बचपन की मासूमियत, साजिया ने संघर्षों के बीच साहस और आशा तथा साक्षी ने जीवन की भावनात्मक सच्चाइयों को अपनी कहानियों के माध्यम से सशक्त रूप से प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम में उदयन शालिनी फ़ेलोशिप, देहरादून चैप्टर के संयोजक विमल डबराल, सह-संयोजक जी.एस. रावत कोर कमेटी सदस्य डॉ. दलजीत कौर, नीलू खन्ना, कमल शर्मा, सुमन तिवारी, दीपक अहलावत, ममता अहलावत, भोम बहादुर पुन, रुचिता नैथानी, विजय आईज़ैकर, देवेंद्र कांडपाल सहित अन्य गणमान्य अतिथि, दून लाइब्रेरी के सदस्य तथा बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी आदि उपस्थित रहे।

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