विश्व संगीत दिवस : लोक गायिकाओं के गीत-संगीत का समृद्ध इतिहास रहा है उत्तराखंड में ।
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@Chandrashekhar Tewari
उत्तराखंड के लोक में महिला लोक गायिकाओं के गीत- संगीत का एक लंबा और समृद्ध इतिहास रहा है। इनमें से कुछ ने संचार माध्यमों से प्रसिद्धि पाई तो कुछ ने गुमनामी में रहकर चुपचाप यहां के लोक को अपनी गायन कला से सजाने और संवारने का अद्भुत कार्य किया ।
गीत और नृत्य को जीवन का संचार माना जाता है। सही मायने में लोक में रचे-बसे गीत और नृत्य ही उस समाज की संस्कृति को विशिष्टता प्रदान करते हैं। भारतीय संस्कृति में भगवान शिव और गंधर्वों को आदि संगीत का जनक माना है। उत्तराखंड के गढ़वाल-कुमाऊं-जौनसार इलाके के गीत-संगीत को सदियों से जीवंत बनाने में यहां के बद्दी(बेड़ा),मिरासी, ढाक्की परिवार की अद्वितीय भूमिका रही है। गढ़वाल अंचल के बेड़ा समुदाय के लोग अपनी संगीत परम्परा को गंधर्वों से जोडते हैं और स्वयं को शिव का वंशज मानते हैं।








