Thursday, May 14, 2026
Home अल्मोड़ा विश्व संगीत दिवस : लोक गायिकाओं के गीत-संगीत का समृद्ध इतिहास रहा...

विश्व संगीत दिवस : लोक गायिकाओं के गीत-संगीत का समृद्ध इतिहास रहा है उत्तराखंड में

विश्व संगीत दिवस : लोक गायिकाओं के गीत-संगीत का समृद्ध इतिहास रहा है उत्तराखंड में ।

००००००००००

@Chandrashekhar Tewari

उत्तराखंड के लोक में महिला लोक गायिकाओं के गीत- संगीत का एक लंबा और समृद्ध इतिहास रहा है।  इनमें से कुछ ने संचार माध्यमों से प्रसिद्धि पाई तो कुछ ने गुमनामी में रहकर चुपचाप यहां के लोक को अपनी गायन कला से सजाने और संवारने का अद्भुत कार्य किया ।

गीत और नृत्य को जीवन का संचार माना जाता है। सही मायने में  लोक में रचे-बसे गीत और नृत्य ही उस समाज की संस्कृति को विशिष्टता प्रदान करते हैं। भारतीय संस्कृति में भगवान शिव और गंधर्वों को आदि संगीत का जनक माना है। उत्तराखंड के गढ़वाल-कुमाऊं-जौनसार इलाके के गीत-संगीत को सदियों से जीवंत  बनाने में यहां के बद्दी(बेड़ा),मिरासी, ढाक्की परिवार की अद्वितीय भूमिका रही है।  गढ़वाल अंचल के बेड़ा  समुदाय के लोग अपनी संगीत परम्परा को गंधर्वों से जोडते हैं और स्वयं को शिव का वंशज मानते हैं।

Wold clultural day
Wold clultural day

गायन और नृत्य से किसी तरह अपनी आजीविका चलाने वाले ये गुमनाम  साधक ही पहाड़ी लोक संस्कृति के संवाहक हैं। गाने-बजाने की कला में निपुण होने के साथ ही ये लोग गीत रचने में भी सिद्धहस्त  होते हैं। देवी-देवताओं से जुड़े कथानकों से लेकर समाज की सम-सामयिक घटनाओं को भी ये आशु-कवि सहजता से अपने गीतों में ढाल लेते हैं। इनके मिठास भरे गीत और उनकी लय तथा मंथर गति में लास्य व भाव से परिपूर्ण नृत्य हर किसी व्यक्ति के मन को छू लेने में समर्थ रहते हैं.

पहाड़ के लोक में महिला गायन की परंपरा सदियों से चली आ रही है जिसे कुमाऊं में पिठौरागढ़ की कबूतरी देवी के  साथ-साथ गढ़वाल में गौरिकोट की सुंदरी दीदी,डांगचौरा की परतिमा देवी,  दोणि की बचन देई,  टेका की कौशल्या देवी, रूद्रप्रयाग की चकोरी देवी और धौलछीना अल्मोड़ा की आनन्दी देवी के अलावा  और भी अन्य कई सुर साधिकाओं ने आगे बढ़ाया है।यही नही  यहां के अनेक गुमनाम गायिकाओं ने भी पहाड़ की लोक संस्कृति को संवारने में अपना योगदान  दिया है जिसे भुलाया नही जा सकता।

कुमाऊं के कुछ पुराने महिला लोक गायिकाओं का इस संदर्भ में यहाँ पर उदाहरण देना  कदाचित उपयुक्त होगा जिनके गीत एक जमाने में लोकप्रिय रहे थे… आज शायद ही  कहीं उनकी मधुर आवाज पुराने ग्रामोफोन रिकार्ड में  विद्यमान होगी। अल्मोड़ा के वरिष्ठ संस्कृति विशेषज्ञ और साहित्यकार श्री जुगल किशोर पेटशाली जी के अनुसार कुमाऊं के कुछ पुराने लोक गायिकाओं के गाये लोकगीत सौ साल से भी अधिक पुराने हैं जिनमे  मास्टर शेर सिंह , इन्द्रबाई, एवम रामप्यारी का  झोड़ा गीत “सुरमाली कौतिक लागो, मार झपैका” उस जमाने मे काफी लोकप्रिय रहा था। इसके अलावा गोपी देवी का – “हिट वे चना मला कत्यूरा”/”अल्मोड़े की मोहिनी बुलानी किलै नै”/”सोरे की पिरूली पधानी पाणी पिजा पाणी”/ “गांधी रे महात्मा गांधी छुंम’ गीत तथा चंपा देवी का  गाया यह गीत” तली बै मोटर ऐगे ” व ” हाई वे घस्यारी मालू, धुर आये घास काटना”भी सालों पुराने गीत हैं। अपनी विशिष्ठ गायन शैली , खनकदार आवाज के कारण अनेक पुरानी महिला लोक गायक पहाड़ी लोक विरासत की समृद्ध संवाहक रही हैं साथ ही वर्तमान में कई महिला लोक गायिकाएं इस काम को आगे बढ़ा रही हैं।इस संदर्भ में आकाशवाणी की सुप्रसिद्ध गायिका श्रीमती बीना तिवारी,स्व.नईमा खान उप्रेती, श्रीमती कमला देवी ने भी कुमाउनी लोक संगीत  कोअपने गायन से समृद्ध किया है।  इधर एक आध दशक  से उत्तराखंड दूरदर्शन व आकाशवाणी केंद्रों ने भी अपने लोक-संगीत के कार्यक्रमों में कई उभरती लोक गायिकाओं की प्रस्तुति देकर इन्हें नई पहचान देने का महत्वपूर्ण कार्य किया है।

RELATED ARTICLES

यात्रा संस्मरण : जब यायावर डॉ० अरुण कुकसाल मिले जखोली की डॉ० आशा से।

जीवन के आघातों से जूझकर हासिल की कामयाबी-डा. आशा। Dr. Arun kuksal श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, तिलवाड़ा, मयाली से होकर जखोली पहुँचा हूँ। ‘जखोली (समुद्रतल से ऊँचाई लगभग...

कथाकार राम प्रकाश अग्रवाल ‘कण’ की एक और कृति पाठकों के बीच

कथाकार राम प्रकाश अग्रवाल ‘कण’ के कथा संग्रह ‘मां जिसकी गोद में सभ्यताएं पलीं’ का लोकार्पण दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र देहरादून के सभागार...

स्मृति शेष : बलदेव सिंह आर्य -उत्तराखंड में शिल्पकार पहचान

बलदेव सिंह आर्य -उत्तराखंड में शिल्पकार पहचान   By - Vinod Arya   सामाजिक न्याय, शिल्पकार चेतना और समानता के महान अग्रदूत बलदेव सिंह आर्य जी (12 मई...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

यात्रा संस्मरण : जब यायावर डॉ० अरुण कुकसाल मिले जखोली की डॉ० आशा से।

जीवन के आघातों से जूझकर हासिल की कामयाबी-डा. आशा। Dr. Arun kuksal श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, तिलवाड़ा, मयाली से होकर जखोली पहुँचा हूँ। ‘जखोली (समुद्रतल से ऊँचाई लगभग...

फूलचंद नारी शिल्प मंदिर गर्ल्स इंटर कॉलेज में अत्याधुनिक स्टेम लैब का उद्घाटन, विज्ञान एवं नवाचार को मिलेगा नया आयाम

फूलचंद नारी शिल्प मंदिर गर्ल्स इंटर कॉलेज में अत्याधुनिक स्टेम लैब का उद्घाटन, विज्ञान एवं नवाचार को मिलेगा नया आयाम। स्पार्क टेक्नोलॉजीज , स्पेक्स एवं...

शास्त्रीय और उप-शास्त्रीय संगीत संध्या का आयोजन

शास्त्रीय और उप-शास्त्रीय संगीत संध्या का आयोजन।   By - Prem Pancholi ।।13 मई, 2026 ,देहरादन।। दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में भारत के लोक सेवा प्रसारक...

कथाकार राम प्रकाश अग्रवाल ‘कण’ की एक और कृति पाठकों के बीच

कथाकार राम प्रकाश अग्रवाल ‘कण’ के कथा संग्रह ‘मां जिसकी गोद में सभ्यताएं पलीं’ का लोकार्पण दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र देहरादून के सभागार...

ट्राइकोग्रामा एक उत्तम प्राकृतिक खेती की तकनीकी। पढ़े पूरी रिपोर्ट

ट्राइकोग्रामा एक सूक्ष्म परजीवी ततैया है जो हानिकारक कीड़ों के अंडों पर हमला करता है। यह लगभग 200 प्रकार के नुकसानदायक कीटों के अंडों...

स्मृति शेष : बलदेव सिंह आर्य -उत्तराखंड में शिल्पकार पहचान

बलदेव सिंह आर्य -उत्तराखंड में शिल्पकार पहचान   By - Vinod Arya   सामाजिक न्याय, शिल्पकार चेतना और समानता के महान अग्रदूत बलदेव सिंह आर्य जी (12 मई...

वरिष्ठ साहित्यकार राम प्रकाश अग्रवाल कण की पुस्तक का लोकार्पण।

पुस्तक लोकार्पण "मॉं जिसके गोद में सभ्यताएं पलीं" लेखक - राम प्रकाश अग्रवाल कण, प्रकाशन - समय साक्ष्य (देहरादून)   By - Neeraj Naithani ।।   लैंसडाउन चौक स्थित...

तुलसी माला को लेकर क्यों विरोध कर रहे हैं बद्रीनाथवासी? पढ़े पूरी रिपोर्ट

By - Sanjana bhagwat   बद्रीनाथ धाम में तुलसी माला को लेकर बामणी गांव के लोगों द्वारा किया जा रहा विरोध केवल एक व्यापारिक विषय नहीं,...

12 मई विशेषांक : शिल्पकारों के उत्थान के लिए लड़ते रहे बलदेव सिंह आर्य।

‘जातीय जड़ता जाने का जश्न मनायें’। उत्तराखण्ड के शिल्पकार वर्ग में सामाजिक-शैक्षिक चेतना के अग्रदूत बलदेव सिंह आर्य (12 मई, 1912 से 22 दिसम्बर, 1992)...

अक्टूबर में होगा फिल्म पुरुस्कार समारोह : उफ्तारा

अक्टूबर में होगा फिल्म पुरुस्कार समारोह। फिल्म परिषद का कार्यालय शीघ्र। सी.ई.ओ. बंशीधर तिवारी का उफतारा ने जताया आभार। दूरदर्शन और संस्कृति विभाग को...