Sunday, September 13, 2026
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सरकार ने खनन से छः अरब से भी अधिक का राजस्व कमाया है – CM Dhami

khananan work uttrakhand
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बीते दिनों मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यह खुशी जाहीर की, कि उनकी सरकार ने खनन से छः अरब से भी अधिक का राजस्व कमाया है। निश्चित तौर पर किसी भी सरकार के लिए यह खुशी की बात होगी। मुख्यमंत्री धामी के लिए तो यह एक प्रकार से खास उपलब्धी है।

अरे भाई यदि आम इंसान भी कुछ कमाता है तो वह भी खुशी से नाच उठता है। यह तो पूरी सरकार है। अब आप सोच रहे होंगे कि मुख्यमंत्री इस रकम का जनता के लिए क्या करने वाले है। यह तो शायद उन्होने अपनी पार्टी भजपा को बता भी दिया होगा कि वह इस रकम का क्या करने वाले है।
इधर कांग्रेस के लोग सकते में आ गये हैं कि उनके लोगों के पास खनन के पट्टे नहीं है। क्या पता होंगे भी। पर जो भी हो, सरकार के खजाने में कमाई की एक रकम तो आई है।

दरअसल सिर्फ खनन से नहीं सरकार के पास शराब से, वन निगम से, उधोग धन्धो से और अन्य तमाम कारोबार से राजस्व एकत्र होता है। अब लोगों में विश्वास जग रहा है कि युवा मुख्यमंत्री धामी ने जैसे खनन की कमाई सार्वजनिक कर दी, वैसे अन्य कमाई भी वे भविष्य में सार्वजनिक करने वाले है, की उनकी सरकार राज्य से कितना राजस्व एकत्रित करती है।

है न पते की बात। यही तो युवा होने का मतलब है। बेहिचक वे राज्य के राजस्व की बात सार्वजनिक कर रहे है। अब लोगों की लालसा बढ रही है कि मुख्यमंत्री यह बताने के लिए बिल्कुल भी गुरेज नहीं करेंगे कि खनन के कारोबार में राज्य के कितने लोग जुड़ है और राज्य से बाहर के कितने लोग जुड़े है तथा कितनी कम्पनीयां हैं जो खनन कारोबार कर रही है। जो युवा मुख्यमंत्री के युवा हिमालय राज्य के पहाड़ो, नदियों का सीना चीर रहे है।

Cm dhami
Cm dhami

मुख्यमंत्री को मालूम है कि नहीं पर उतराखण्ड में जहां जहां खनन हो रहा है वह मानको के अनुसार हो रहा है कि नही? यदि मुख्यमंत्री को मालूम हो भी वे अकेले क्या कर सकते है। नहीं। वह चाहें तो सब कुछ कर सकते है। पर उन्हें कोई बताये कि गौला नदी के किनारे जो रेल लाइन जा रही है वह कभी भी ध्वस्त हो सकती है, सौंग नदी का पानी बरसात में अन्यत्र फैलता है और वह तबाही क्यों मचाता है। ऐसे कई अन्य नदियां भी है। इनके किनारे और छातियों पर बुल्डोजर, जेसीबी तथा विशालकाय मशीने चलाई जा रही है। अब मशीने क्या मानको के अनुरूप चलाई जा रही है या प्रकृति का राक्षसी भक्षण कर रही है। यहां हम सरकार के कुछ आंकड़े बता रहे है। इन आंकड़ो आप जरूर गौर फरमाये।
भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय द्वारा बताया गया कि वर्ष 2022-23 में राज्य सरकार ने भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय उत्तराखण्ड को कुल 875 करोड का राजस्व लक्ष्य दिया गया था, जिसके सापेक्ष भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय द्वारा 472.25 करोड राजस्व अर्जित किया गया है। इसी तरह वर्ष 2023-24 में भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय उत्तराखण्ड को राज्य सरकार ने कुल 875.00 करोड रूपये का लक्ष्य दिया था, जिसके सापेक्ष भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय उत्तराखण्ड को कुल 645.42 करोड राजस्व के रूप में प्राप्त हो गया है।

मुख्यमंत्री धामी जब खनन की कमाई की बात कर रहे थे तो वह यह भी जानकारी दे रहे थे कि खनन कार्य को और अधिक पारदर्शी, सुदृढ़ बनाया जायेगा। अवैध खनन, अवैध परिवहन की प्रभावी रोकथाम एवं राजस्व वृद्धि हेतु आधुनिक Mining digital Transformation and Surveillance System विकसित किया जा रहा है। इस हेतु राज्य सरकार कुल 45 माईन चैक गेट्स स्थापित कर रही है। जिसकी स्वीकृति प्रदान की गयी है और कार्यवाही गतिमान है। मुख्यमंत्री धामी ने यह भी बताया कि खनन के रवन्ना प्रपत्रों को भी डिजिटल रूप दिया जा रहा है।

खनन से राज्य को कमाई हो यह गलत बिल्कुल भी नही है। मगर खनन के कारण राज्य की नदियों में बिन बात पर बाढ आ जाये और कमाई के कई गुना नुकसान हो जाये यह किसी के भी गले नहीं उतरने वाली। तो हमारा राज्य किस प्रकार की कमाई की अपेक्षा करेगा। राज्यवासी तो चाहते हैं कि राज्य की कमाई के विपरित नुकसान ना हो।

वरिष्ठ भू वैज्ञानिक प्रो॰ के॰ एस॰ बल्दिया अब दिवंगत ने अपनी एक किताब में लिखा है कि हिमालय अभी एकदम युवा अवस्था में है। यदि इस पर अनियोजित ढंग से छेड़ छाड़ करेंगे तो यह सर्वाधिक नुकसान गाड़ गदेरो के अलावा नदियों को पंहुचायेगा। उन्होने स्पष्ट किया कि नदियों के सिराहने और किनारे को कभी भी दोहन करने की नहीं सोचे। यदि हम बल्दिया साहब की माने तो उतराखण्ड में विशेषकर पहाडी क्षेत्र में खनन और विकास के विशालकाय निर्माण पर रोक लगानी होगी। पर सवाल फिर वहीं खड़ा हो जाता है कि राजस्व कहां से आयेगा। इसका जबाव हालांकि राजनीतिक पार्टीयां न दे। पर उतराखण्ड में राजस्व के और भी स्रोत है जिस पर युवा मुख्यमंत्री को ध्यान देना होगा। यदि योजनाकारो ने मुख्यमंत्री धामी को सही सही योजना बता दी तो वे ऐसी लोकहित की योजनाओं को लागू करने में तनिक भी समय नहीं लगायेंगे। जैसे इस वक्त उन्होने खनन की कमाई का लेखा जोखा सार्वजनिक कर दिया।

इस पूरी रिपोर्ट में यही लग रहा है कि यदि हम खनन के अलावा अन्य कार्यो पर ध्यान देंगे तो राज्य की कमाई खनन की कमाई से कई गुना अधिक हो सकती है। जिसमें अधिकांश ऐसी योजनाऐं होगी जो पर्यावरण का कदापि दोहन नहीं करेगी। बजाय पर्यावरण की सुरक्षा भी होगी और राजस्व के स्रोत भी बढेंगे।

तोड़ फोड़, दोहन विदोहन से नुकसान अधिक और राजस्व की प्राप्ती कम होती है। ऐसा लोगों का मानना है। लोग ऐसा भी कहते हैं कि पहाड़ो को छोड़कर मैदानी क्षेत्रो में खनन का कार्य लाजमी है। क्योंकि मैदानी क्षेत्रो में नदियों में गाद बढती है। इसलिए गाद को उठाना जरूरी भी है।

यहां चर्चा इस बात पर आगे बढ रही है कि नदियों के सिरहाने, पहाड़ो की तलहटी पर हो रहे खनन से इस बार की खनन की कमाई के कई सौ गुना नुकसान भविष्य में होने की संभावना है। इस बात पर मुख्यमंत्री धामी ने अपने योजनाकारो से कोई जानकारी प्राप्त नहीं की होगी। यदि योजनाकारो ने मुख्यमंत्री धामी को हिमालय के नाजुक स्थिति की पूरी पूरी जानकारी दी है तो उन्होने खनन की कमाई के साथ साथ उस बात को सार्वजनिक क्यों नहीं किया, कि पहाड़ो में कहां कहां पर खनन करना चाहिए, मैदानी क्षेत्रो में भी कितना खनन हुआ है आदि आदि। लगता है कि युवा मुख्यमंत्री को योजनाकार पूरी जानकारी नहीं दे रहे है। इसलिए उन्होने खनन की कमाई का हिसाब किताब राज्यवासियो के सामने रख दिया और पहाडो पर खनन कितना जरूरी है इसकी उन्होने कोई जानकारी नहीं दी है।

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