Sunday, September 13, 2026
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नजीर बन गई जौनसारी फिल्म मेरे गांव की बाट

मेरे गांव की बाट यानी मेरे गांव का रास्ता नाम से पहली बार जौनसारी पहाड़ी बोली-भाषा की फिल्म सामने आई है। आजकल उत्तराखंड की राजधानी से लेकर एनसीआर दिल्ली और हिमाचल तक इस फिल्म ने दर्शकों के दिल में अमिट छाप छोड़ी है।

दरअसल कहानी में बहुत ट्वीट्स है। फिल्म का कथानक बहुत ही संभावनाओं, समस्या के समाधानों और पहाड़ी रीति रिवाजों से जिस तरह प्रस्तुत किया गया है वह कबीले तारीफ है। अर्थात इन्हीं विषयों में ही प्यार और मुहब्बत को दर्शाया गया है। जबकि आम तौर पर “प्यार” को बहुत ही ग्लैमर में दिखाया जाता है। मगर इस जौनसारी भाषा की पहली फिल्म ग्लैमर की दुनिया में भी जगह बना गई है।

जो गांव छोड़कर गया था वह मजबूरी में नहीं बल्कि एक पारिवारिक संकट की वजह से गांव छोड़ चुका था के दृश्य को जिस तरह से निर्देशक ने संवाद, गीत और संगीत से भरा है वह हर दर्शक को भावविभोर कर देता है।

Jaunsari film
Jaunsari film

फिल्म के कथानाक का मुख्य बिंदु जौनसारी जनजातीय शादी के रिवाज “जोजोड़े” को रखा गया है। यही दृश्य दर्शकों की सबसे पहली पसंद बनती जा रही है। “जाेजोड़े” शादी में दुल्हा नहीं बल्कि दुल्हन को दूल्हे के घर जाना होता है। इस शादी को निर्देशक ने जिस कलात्मक ढंग से संजोया है उसकी तारीफ मे हर दर्शक सिनेमा हॉल से बाहर आकर यही कह रहे है कि “कबीलेतारीफ” फिल्म है। इस फिल्म को जो भी देखे वह यही कहेगा कि अपने बेटे या बेटी की शादी नहीं बल्कि “जोजोड़ा” एक आयोजन करेंगे।

इस फिल्म में समाज के बहुत ही महत्वपूर्ण पक्ष “महिला समानता” को बखूबी दिखाया गया है। ऐसा भावनात्मक संवाद जो हर दर्शक के आंखों में आंसू छलका देता है।कथानक में महिला सम्मान का दृश्य तब सामने आया जब कहानी के एक पात्र के बेटे की शादी उसके जानी दुश्मन की बेटी से होनी थी। मगर दुश्मनी को कैसे एक महिला के सम्मान ने दोस्ती में बदल दी इसे यह फिल्म दिखाने में बहुत ही सफल रही है। जबकि यह दुश्मनी एक राजनीतिक दल के कारण बढ़ी थी। फिल्म की कहानी बताती है कि अलग अलग गांव के दो दोस्त अलग अलग राजनीतिक पार्टी में थे, चुनाव के दौरान एक दोस्त से भावावेश दूसरे दोस्त के उम्मीदवार का पोस्टर फाड़ा गया, जिस पर तत्काल इन दोनों में बड़ा झगड़ा हुआ। जिसका समाधान गांव के सयानों ने भी नहीं निकाल पाया। खैर बीस बरस बाद इन्हीं दोस्त दुश्मन के बेटा बेटी का “प्यार” परवान चढ़ गया। एक दोस्त अपने बेटे के प्यार को मांगने से पहले माफी मांगने गया। पर उस दोस्त दुश्मन ने वही उन दिनों की बात दोहराई जो चुनाव के दौरान पोस्टर फाड़ा गया था। यहां तक कह दिया कि वापस लौट जाओ वरना पोस्टर के जैसे टुकड़े टुकड़े कर दूंगा। इस पर उसके बेटे को भी गुस्सा आया और कहा कि बाबा चलो ऐसे रिश्ते न ही हों तो अच्छा है। माफी मांगने के बाद धमकी। इस पर साथ में जा रखी लड़के की मां ने अपना ढाटू लड़की के पिता के चरणों में डाल दिया और कहा कि जौनसार में महिला का बड़ा सम्मान होता है। यह भी कहा कि बहन के नाते अब तो पुराना गुस्सा छोड़ दो और उनके पति को माफ कर दो। बस इस व्यवहार से दोनों परिवार आपस में सुलहनामा करके अपनी बेटा बेटी का एक दूसरे के साथ “जोजोड़ा” रचाते है। यहीं पर फिल्म समाप्त होती है।

Jaunsari film
Jaunsari film

यह सिर्फ जौनसारी समाज में है कि जिस संकट को कोई नहीं सुलझा सकता है, उसे महिलाएं सुलझाती है और समाज उन्हें पूरा पूरा सम्मान भी देता है। अर्थात महिला समानता की जीती जाती तस्वीर इस जौनसारी फिल्म ने दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।

फिल्म के कथानक में और कई मोड सामने आते है। हास्य, व्यंग्य और दीदार से लबरेज यह फिल्म गांव समाज के साथ साथ गांव में स्वावलंबन को बहुत ही कुशलता के साथ दिखाती है। दरअसल इसी तरह गांव में रोजगार के उम्दा साधन खोजे जा सकते है।

संयुक्त परिवार के प्यार मुहब्बत को जिस तरह से हरेक कलाकार निभा रहा था, वह आज के समाज और एकल परिवारों के लिए सीख दे गये है। हालांकि संयुक्त परिवार आज भी जौनसार बावर में विद्यमान है। जहां जहां संयुक्त परिवार है वहां वहां खुशहाली का अंबार भी देखने को मिलता है।

और हां! फिल्म में जौनसारी गीत, नृत्य ने जो रंग भरने का कार्य किया है उससे समाज, संस्कृति और सभ्यता का बखूबी परिचय दिया गया है।

कुलमिलाकर इस जौनसारी फिल्म में अधिकांश जगह गीतों का सहारा लिया गया है। फिर भी कम संवादों में जिस तरह से फिल्म ने दर्शकों के बीच जो जगह बनाई है उसकी चहुंओर चर्चा है। हालांकि निर्देशक को ऐसा महसूस हुआ होगा कि जौनसार क्षेत्र में या उत्तराखंडी फिल्मों में बहुत ही मंझे हुए कलाकार नहीं मिल पाएंगे। फलस्वरूप फिल्म के मुख्य अभिनेता अभिनव चौहान ने सम्पूर्ण फिल्म में अभिनय कर रहे कलाकारों को बांधने का शगल प्रयास किया है। अभिनव चौहान ने कई टीवी सीरियलो में कार्य किया है। यही वजह रही कि इस फिल्म में अन्य अभिनय करने वाले नए कलाकारों को अभिनव से सीखने का सहज समय मिल गया है। खास बात यह है कि जाने माने फिल्म निर्देशक अनुज जोशी और फिल्म की संकल्पना करने वाले के० एस० चौहान (संयुक्त निदेशक सूचना एवं लोक संपर्क विभाग) ने जो मिलकर एकदम नए कलाकारों यहां कास्ट किया है वह आने वाली फिल्मों के लिए एक नजीर बन गई है।

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