Friday, March 6, 2026
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दिल्ली में उत्तराखंडी लोक संस्कृति के प्रसार का अदभुत संगम। पढ़े लेखिका डॉ० हेमा उनियाल की यह रिपोर्ट

By – Dr. Hema Uniyal

दिल्ली: उत्तराखंड के सांस्कृतिक कार्यक्रमों के मामले में राजधानी दिल्ली उभरती जा रही है। लोक संस्कृति, उभरता सिनेमा, लोकगीत, लोक नृत्य, नाट्य मंचन आदि बहुत कुछ यहां प्रदर्शित हो रहा है।कभी तो एक ही दिवस में दो – दो कार्यक्रम भी संपन्न हो रहे हैं।

इस बीच उत्तराखंड की लोक संस्कृति के संरक्षण- संवर्धन पर एक विचार गोष्ठी ” पर्वतीय कला केंद्र” के माध्यम से इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में 22 अगस्त को आयोजित हुई, जिसमें अनेक विद्वत जनों ने भाग लिया और अपने विचार रखे।

“उत्तराखंड फिल्म एवं नाट्य संस्थान” द्वारा एल.टी.जी सभागार में “वीरांगना तीलू रौतेली सम्मान” समारोह तथा हरि सेमवाल के निर्देशन में “हमल विरणु ह्वे जाण नाट्य का मंचन 23 अगस्त को हुआ। वीरांगना”तीलू रौतेली सम्मान” चमोली- गोपेश्वर की समाज सेविका श्रीमती मीना तिवारी को दिया गया।

इसी तरह “कंस्टीट्यूशन क्लब” में “पर्वतीय लोक विकास समिति” व अन्य के सहयोग से “हिमालय आपदा” पर एक संगोष्ठी का आयोजन 20 अगस्त को किया गया जिसमें लोकप्रिय लोकगायिका उप्रेती बहनों की भी उपस्थिति रही।

 “यंग उत्तराखंड सीने अवार्ड “2025 जो सीरी फोर्ट आडिटोरियम में 23 अगस्त को आयोजित हुआ। जिसमें फिल्म “जोना” और “रिखुली” फिल्म सबसे आगे रहीं और “लाइफ टाइम सिने अवार्ड” अदाकारा श्रीमती मंजू बहुगुणा को दिया गया।

साहित्य के प्रति ऐसा अनुराग कि प्रिय राजेश्वरी ‘नादान’ ने तो अपने घर पर ही हिमवन्त कवि चंद्र कुंवर बर्तवाल जी के जन्मदिवस की पुण्य स्मृति में अपने घर पर ही कवियों की एक बैठक कर डाली।

राजधानी दिल्ली में और भी बहुत कुछ निरंतर हो ही रहा है ..। बहुत अच्छा प्रयास है सभी के द्वारा साहित्य के संवर्धन हेतु।

हालांकि लेखिका द्वारा सभी कार्यक्रमों में अपनी व्यस्तता और दूरी के कारण जाना सम्भव नहीं हो पाता। फिर भी कुछ कार्यक्रमों में उपस्थिति हो ही जाती है जो प्रेमपूर्वक आमंत्रित करते हैं।

अभी बीते रविवार 24 अगस्त को उत्तराखंड सदन ,चाणक्यपुरी में “बाला गोरिया” नाटक को लेकर एक समीक्षा बैठक और पुस्तक लोकार्पण कार्यक्रम रखा गया जिसमें शामिल होने का अवसर मिला।इससे पहले “इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र” में आयोजित सेमीनार में भी उपस्थिति रही।

गोलू ,गोलज्यू देवता की उत्पत्ति को गौर भैरव (शिव) के अवतार के रूप में माना गया है। गोलू देवता कई कुलों में इष्ट देवता के रूप में पूजित हैं और न्याय के देवता के रूप में इनकी बड़ी ख्याति जगप्रसिद्ध है। चंपावत,चितई, घोड़ाखाल आदि इनके प्रसिद्ध स्थल हैं….।

प्रसिद्ध नाट्यकर्मी, कलाकार, निर्देशक श्री हेम पंत जी के निर्देशन एवं डॉ कमल कर्नाटक के सह निर्देशन में “बाला गोरिया” का मंचन “श्री सत्य साईं ऑडिटोरियम” लोधी रोड,नई दिल्ली में 19 जुलाई को हुआ था,जिसे नाट्य मंचन,संगीत निर्देशन, पार्श्व गायन, रूप सज्जा, वेश भूषा, प्रकाश एवं स्लाइड प्रदर्शन के माध्यम से बहुत अच्छी प्रसिद्धि मिली थी। सभी कलाकारों ने अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन देने का इसमें प्रयास किया था। “बाला गोरिया” के छोटे और बड़े रूप में यश भट्ट, वेदांत कर्नाटक, बड़ी रानी के रूप में ममता कर्नाटक, कालिंका के रूप में दीपिका पांडे, राजा झालराई के रूप में श्री महेंद्र लटवाल के अभिनय को खूब सराहना मिली और एक यादगार नाटक सभी के जेहन में उतर गया।

समीक्षा बैठक में अनेक साहित्य, संस्कृति, नाट्य विधा से जुड़े लोग शामिल हुए। सभी ने अपने- अपने विचार रखे।

साथ ही “बाला गोरिया” पुस्तक जो श्री हेम पंत द्वारा इस नाट्य पर आधारित लिखी गई है,उसका लोकार्पण भी किया गया। दोपहर में पहाड़ी भोजन की अच्छी व्यवस्था रही।

सार, नाटक एक महत्वपूर्ण विधा है जो हर संवेदनशील व्यक्ति को आकर्षित करती है। नाटकों में विभिन्न प्रयोग हो रहे हैं जो असर कारक भी हैं । पर्वतीय लोक कला मंच से शिद्दत से जुड़े हेम पंत जी एक संजीदा लेखक, कलाकार और नाट्य निर्देशक रहे हैं। कार्यक्रम के स्तर को वह बरकरार रखते हैं और किसी विषय के अच्छे अध्ययन, मनन के बाद वह आगे बढ़ते हैं, और पूरी तैयारी से कार्यक्रम को अंत तक ले जाते हैं।

 

इधर एक बात यह भी अच्छी हुई है कि उत्तराखंड सदन, चाणक्यपुरी में श्रीमान सती जी, श्रीमान मिश्रा जी, डॉ गोविन्द सिंह जी सहित एक अच्छी टीम आई है जो “उत्तराखंड सदन” में कई कार्यक्रमों को करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।पहले यह भवन खाली पड़े रहते थे, इनका उपयोग नहीं के बराबर था। अब यहां खूब चहल – पहल रहती है। मीटिंग स्तर के कार्यक्रम होते रहते हैं। यहां की कैंटीन की भी आय इससे बढ़ रही है। कार्यक्रम करने वालों को भी सुलभता से एक स्थान मिल जाता है।

लेखिका उत्तराखंडी लोक संस्कृति की अध्येता है

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