Tuesday, June 9, 2026
Home lifestyle एक्शनएड की पहल : जलवायु परिवर्तन के खतरे और समाधान पर चिंतन

एक्शनएड की पहल : जलवायु परिवर्तन के खतरे और समाधान पर चिंतन

By – Prem Pancholi

 

सामाजिक एवं पर्यावरणीय मुद्दों पर कार्य करने वाली सामाजिक संस्था एक्शनएड एवं दून विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में “हिमालयी भविष्य की पुनर्कल्पना” विषय को लेकर तीन दिवसीय “हिमालयी एक्शन स्कूल” का आयोजन दून विश्वविद्यालय में आयोजित किया गया है। इस कार्यक्रम में देश के नौ हिमालयी राज्यों के सरकारी प्रतिनिधि, नीतिगत विशेषज्ञ, शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता तथा मीडिया व स्वैच्छिक संस्थाओं के प्रतिनिधि भाग ले रहे है।

इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि हिमालय में हो रहे विकास को लेकर एक बार फिर से सोचना पड़ेगा। विशेषकर हिमालय क्षेत्र में रह रहे स्थाई निवासियों को लेकर पृथक से एक मॉडल तैयार करना होगा। ताकि पर्यावरण का संतुलन भी बना रहे और स्थाई निवासियों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।

यह बात भी चर्चा के दौरान सामने आई कि “हिमालयन एक्शन स्कूल” हिमालय की जैव विविधता के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण कदम है, जो भविष्य में समाज और सत्ता के मध्य सेतु का कार्य करेगा।

कार्यशाला में चर्चा के दौरान वक्ताओं ने कहा कि ऐसे समय में जब हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते पारिस्थितिक तनाव, दोहनकारी विकास और गहरी होती असमानताओं का सामना कर रहा है, इसलिए जरूरी है अब चर्चा से आगे बढ़कर सामूहिक चिंतन, एकजुटता और कार्रवाई के लिए सभी को एक मंच पर आना होगा।

कार्यशाला में जानकारी दी गई कि इस स्कूल का आयोजन एक्शनएड द्वारा दून विश्वविद्यालय के साथ साझेदारी में किया जा रहा है, जिसमें पूरे हिमालयी क्षेत्र के शोधकर्ता, कार्यकर्ता और सामुदायिक नेताओ को एक साथ लेकर आयेंगे।

इस दौरान बताया गया कि इस कार्यक्रम के तहत ठोस परिणाम तैयार करना, नीतिगत फैसले, कार्य योजनाएँ आदि सहित एक सतत हिमालयी भविष्य फ्रेमवर्क शामिल हैं।

विभिन्न प्रदेशों से आये प्रतिनिधियों ने अपने अपने प्रदेश के पर्यावरणीय मुद्दों पर प्रस्तुतीकरण दिया है। इन प्रस्तुतियों में बताया गया कि हिमालय में पारिस्थितिक परिवर्तन तेजी से हुआ है, जिस कारण हिमालय नाजुक होता जा रहा है। ऐसी समस्याओं के समाधान बावत शासन, स्वायत्तता और स्थानीय नेतृत्व भी प्रभावित हुआ है। हिमालय में बढ़ते प्राकृतिक खतरों के कारण आजीविका, श्रम और सामुदायिक अर्थव्यवस्थाएँ गड़मडा गई है। अर्थात विकास, विस्थापन और पर्यावरणीय मसले न्याय संगत तरीके से नहीं सुलझाए जा रहे हैं।

कुलमिलाकर कार्यक्रम के प्रथम दिन “हिमालयी भविष्य की पुनर्कल्पना” के इस सामूहिक प्रयास को आकार देने और मजबूत करने की नितांत आवश्यकता बताई गई है।

इस अवसर बतौर मुख्यअतिथि महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कहा कि पर्यावरण संकट का सामना सबसे अधिक महिलाएं ही झेलती है। उन्होंने कहा कि समाज को एक साथ मिलकर प्राकृतिक संकटों का समाधान ढूंढना होगा। कहा कि इस कार्यशाला से जो भी संस्तुतियों होगी उन्हें वे सरकार तक पहुंचायेगी।

कार्यक्रम के प्रथम दिन विशिष्ट अतिथि पूर्व कैबिनेट मंत्री व टिहरी के विधायक किशोर उपाध्याय ने कहा कि वे अपनी विधान सभा में कुछ गांव में कार्बन क्रेडिट के लिए स्थानीय लोगों के साथ योजनागत कार्य कर रहे है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में यह एक उदाहरण साबित होगा।

संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य डॉ० सुनीता रतूड़ी ने कहा कि पर्यावरण के खतरों का असर स्वास्थ्य पर सबसे पहले पड़ता है, इसलिए सबसे पहले पर्यावरण संतुलन के लिए सामूहिक कार्य करने होंगे। एक्शनएड के कंट्री डायरेक्टर संदीप चाचरा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का सबसे अधिक प्रभाव वंचित समुदायों, वन पर आधारित रहने वाले लोगों, तथा घुमंतू समुदायों पर पड़ता है। अच्छा हो कि सरकारों को इस ओर एक संयुक्त योजना पर कार्य करें। नेपाल की पूर्व विदेश मंत्री डॉ० विमला राय पौड़ियाल ने कहा कि विकास और पर्यावरण को देखते हुए विकास की संतुलित योजनाएं बनानी होगी।

इस दौरान टिकेंद्र सिंह परमार शिमला, भू वैज्ञानिक प्रो० एसपी सती, एक्शन एड संस्था के एसोसिएट डायरेक्टर खालिद चौधरी, महिला नेत्री हीरा जंगपांगी, सामाजिक कार्यकर्ता अरण्य रंजन, पर्यावरण कार्यकर्ता व वन अधिनियम के जानकार तरुण जोशी, द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट की डॉ० लिवलीन कहलोन, पर्यावरण कार्यकर्ता बच्ची सिंह बिष्ट, राम वांग्यरकपम मणिपुर, सलमा खुर्शीद लोक पर्यावरण परिषद जम्मू कश्मीर, पर्यावरण विज्ञानी सौम्य दत्ता, श्रवण कुमार आचार्य जेएनयू दिल्ली, डॉ० हर्ष डोभाल दून विश्वविद्यालय, सामाजिक कार्यकर्ता डॉ० अतुल सती, पत्रकार लिंडा छकछुआक आदि लोगों ने अपने अपने विचार व्यक्त किए है।
…………………………..
कार्यक्रम का शुभारंभ बतौर मुख्य अतिथि महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कांडवाल, विशिष्ट अतिथि टिहरी के विधायक किशोर उपाध्याय, पूर्व विदेश मंत्री नेपाल डॉ० विमला राय पौड़ियाल, एक्शन एड के कंट्री डायरेक्टर संदीप चाचरा, एक्शन एड के एसोसिएट डायरेक्टर खालिद चौधरी ने किया है।

RELATED ARTICLES

आपदाओं के प्रभाव को न्यूनतम करने के लिए सरकारी वर्जिश

वैज्ञानिक योजना, कुशल प्रशासन और समयबद्ध निर्णय प्रक्रिया के जरिए आपदाओं के प्रभाव को न्यूनतम करने का प्रयास किया जा रहा है।” उन्होंने कहा कि...

पर्यावरण दिवस : पद्मश्री प्रेमचंद शर्मा ने किया कृषि अनुसंधान संस्थान में वृक्षारोपण

विश्व पर्यावरण दिवस पर IATR देहरादून में पौधारोपण एवं गोष्ठी का आयोजन। पद्मश्री प्रेम चंद शर्मा ने छात्रों को मोरिंगा और पंच पल्लव के...

जलवायु परिवर्तन चर्चा : प्राकृतिक संसाधनों पर परंपरागत अधिकारों पर सरकारी कब्जा।

By - Prem Pancholi   दून विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित "हिमालयी एक्शन स्कूल" कार्यक्रम के दूसरे दिन प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, सुशासन, रोजगार, पलायन और...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

आपदाओं के प्रभाव को न्यूनतम करने के लिए सरकारी वर्जिश

वैज्ञानिक योजना, कुशल प्रशासन और समयबद्ध निर्णय प्रक्रिया के जरिए आपदाओं के प्रभाव को न्यूनतम करने का प्रयास किया जा रहा है।” उन्होंने कहा कि...

पर्यावरण दिवस : पद्मश्री प्रेमचंद शर्मा ने किया कृषि अनुसंधान संस्थान में वृक्षारोपण

विश्व पर्यावरण दिवस पर IATR देहरादून में पौधारोपण एवं गोष्ठी का आयोजन। पद्मश्री प्रेम चंद शर्मा ने छात्रों को मोरिंगा और पंच पल्लव के...

एक्शनएड की पहल : जलवायु परिवर्तन के खतरे और समाधान पर चिंतन

By - Prem Pancholi   सामाजिक एवं पर्यावरणीय मुद्दों पर कार्य करने वाली सामाजिक संस्था एक्शनएड एवं दून विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में "हिमालयी भविष्य की...

जलवायु परिवर्तन चर्चा : प्राकृतिक संसाधनों पर परंपरागत अधिकारों पर सरकारी कब्जा।

By - Prem Pancholi   दून विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित "हिमालयी एक्शन स्कूल" कार्यक्रम के दूसरे दिन प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, सुशासन, रोजगार, पलायन और...

स्थानीय समुदाय के बिना आपदा राहत कार्य अधूरा।

By - Prem Pancholi ................................... दून विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित "हिमालयी एक्शन स्कूल" कार्यक्रम के तीसरे दिन सामाजिक संस्था एक्शनएड और दून विश्वविद्यालय के संयुक्त...

सतत विकास और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण हेतु एक साथ आएंगे हिमालयीवासी

By - Prem Pancholi   सामाजिक एवं पर्यावरणीय मुद्दों पर कार्य करने वाली सामाजिक संस्था एक्शनएड एवं दून विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में "हिमालयी भविष्य की...

कहानी : दादी की चिट्ठी

आजकल छुट्टियों में गाँव जा रहे हो? मेरी इस कहानी को पढ़कर जाना - डॉ० ममता कुंवर By - Dr. Mamata Kunwar आज दादी सुबह से...

विश्लेषण : आखिर ज़ेन-जी (Gen-Z) पैसा क्यों नहीं बचा रही?

फाइनेंशियल निहिलिज्म (Financial Nihilism): आखिर ज़ेन-जी (Gen-Z) पैसा क्यों नहीं बचा रही? Dr. Nitin Upadhyay ।। आजकल अक्सर सुनने को मिलता है—"आजकल के बच्चे सेविंग्स नहीं...

यात्रा संस्मरण : जब एक 20 वर्षीय युवती सेल्फ स्टीक से अनजान थी, इस सवाल ने नए भारत के लिए नया सवाल खड़ा कर...

By - Prem Pancholi यह यात्रा मेरी अन्य यात्राओं से भिन्न हो सकती है। क्योंकि यह यात्रा पैदल, बस और रेल के माध्यम से संपन्न...

कहानी : बधाई हो, जज हुआ है, एक नर्स का यह कहना?

By - Deepa Shah  कुछ साल पहले का वो कार्टून आज भी याद आता है। नर्स ऑपरेशन थिएटर से बाहर निकलती है, चेहरे पर थकान...